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शोध और किसान के बीच की खाई पाटने पर होगा मंथन

Fri, 07 Apr 2017 01:14 AM IST
बरेली
बरेली Updated Fri, 07 Apr 2017 01:14 AM IST
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Brainstorming on the gap between research and farmer
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कृषि और पशु अनुसंधान संस्थानों में  कई तकनीक ईजाद होती हैं पर किसानों को इनका लाभ तुरंत शायद ही मिल पाता हो। किसान और शोध के बीच एक खाई सी बनी रहती है पर अब कृषि वैज्ञानिक इस खाई को पाटने की जुगत में लगे हैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में आठ और नौ अप्रैल को देश भर के कृषि वैज्ञानिक इसपर मंथन करने जुटे रहे हैं ताकि संस्थानों में होने वाले शोध का सीधा फायदा किसानों तक पहुंचाया जा सके।
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इंडियन एसोसिएशन फार  एडवांसमेंट ऑफ वेटनरी रिसर्च की ओर से 17वां इंडियन वेटनरी अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें वन हेल्थ पॉलिसी के तहत पशुओं पनपने वाली बीमारियों के लिए एक नई पॉलिसी बनाना, क्रास ब्रीड के जरिये जानवरों की बीमारियों मुक्त प्रजाति बनाना  और स्मॉल होल्डर के तहत किसानों को मेडिकल क्षेत्र में ईजाद होने वाली नई दवाइयां उपलब्ध कराना जैसे विषयों पर विचार होगा। आयोजन सचिव डॉ. रिशेंद्र वर्मा ने बताया कि मंथन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रोफेसर त्रिलोचन महापात्रा, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल  भारत सरकार, स्पेशल चीफ सेक्रेटरी एनडीडी एंड फूड डिपार्टमेंट आंध्र सरकार आईएएस डॉ. मनमोहन सिंह और गेलमेट संस्था के लोग शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि मंथन बाद एक पॉलिसी ड्राफ्ट की जाएगी तो आईसीएआर को भेजी जाएगी।
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