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तेल में उबाल... किराना खामोश, दालें धड़ाम

Thu, 27 May 2021 01:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 01:35 AM IST
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Boil in oil ... Grocery silence, pulses blunt
किराना की दुकान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

कारोबार में मंदी के बावजूद खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार उछाल

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बरेली। रसोई में हर दिन इस्तेमाल होने वाले इडेवल ऑयल के दाम लॉकडाउन में लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि किराना बाजार में मांग में आई कमी के चलते इडेवल ऑयल से निर्मित उत्पादों के दामों में नरमी है। कुछ मेवा में भी तेजी दिख रही है। किराना और दाल मंडी में मंदी चल रही है।
घरेलू तिलहन उत्पाद और उपज मांग के अनुरूप नहीं होने से भारतीय बाजार विदेशी खाद्य तेलों पर निर्भर हो गया है। मांग पूरी करने के लिए 65 प्रतिशत से ज्यादा का आयात हो रहा है। उधर, सरकार देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए आयात शुल्क 38.5 प्रतिशत कर रहा है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पिछले साल के मुकाबले खाद्य तेलों के दाम दोगुना तक बढ़ चुके हैं। खुदरा बाजार में इस समय रिफाइंड तेल 160 रुपये तो सरसों तेल 180 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। तीन-चार दिनों से रिफाइंड के दामों में कुछ और तेजी आई है। 15 किलो के टिन पर 25-30 रुपये बढ़ गए हैं। माना जा रहा है कि शुद्धता की वजह से सरसों तेल की मांग बढ़ी है, इसलिए उसके दामों में लगातार उछाल आ रहा है। यह स्थिति रही तो कुछ ही दिनों में सरसों तेल दो सौ रुपये प्रति किलो हो जाएगा। हालांकि रिफाइंड के दामों में स्थिरता बनी रहने की संभावना है।
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दालों के दामों में गिरावट

दो सप्ताह में दाल बाजार में भारी गिरावट आई है। कारोबारियों के मुताबिक विभिन्न दालों के 10 से 15 प्रतिशत तक भाव गिरे हैं। उनके अनुसार लॉकडाउन के चलते मांग में कमी है, इसलिए दाम गिर रहे हैं। इस बीच नई उपज भी बाजार में आने लगी है। विदेशी दालों का बड़ा भंडार भी हो गया है।
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सब्जियों ने गिराया दालों का भाव

व्यापारी बताते हैं कि लॉकडाउन में आम लोगों की आमदनी प्रभावित हुई है। गरीब और मजदूरों का काम ठप हो गया है, इसलिए ये लोग किसी तरह घर-गृहस्थी चला रहे हैं। उधर, सब्जियां सस्ती हो रही हैं। मौसमी सब्जियों की बाजार में ज्यादा आमद हो रही है। टमाटर, आलू और प्याज भी सस्ता है। पिछले साल इन दिनों में टमाटर, आलू, प्याज 80 रुपये प्रति किलो तक तक बेचा गया था लेकिन फिलहाल खुदरा बाजार में टमाटर 10 रुपये तो आलू-प्याज 15-20 रुपये किलो बिक रहा है। सब्जियां सस्ती होने से लोग दालें नहीं खरीद रहे हैं, इसका सीधा असर दलहन कारोबार पर पड़ रहा है।

किराना बाजार सुस्त

उच्च, मध्यम या फिर गरीब सभी के किचन में हर दिन घी, तेल, हल्दी, मिर्च नमक और कुछ मसाले इस्तेमाल होते हैं। इन आइटमों पर दाम नहीं बढे़ हैं क्योंकि वैवाहिक कार्यक्रम सीमित हो रहे हैं और होटल-रेस्त्रां आदि बंद हैं, इसलिए किराना आइटमों की मांग सिर्फ घरों तक ही सीमित हो गई है। अपेक्षित मांग न होने से किराना बाजार में मंदी है, लेकिन मुनक्का आदि कुछ मेवा के दामों में जबरदस्त उछाल है।

1100 करोड़ का है दाल और खाद्य तेल कारोबार

हर रसोई में दाल और खाद्य तेल इस्तेमाल होता है। बरेली बाजार में हर माह खाद्य तेल और दालों का कारोबार 11 सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का होता है। इसमें सबसे ज्यादा खाद्य तेल व्यापार है। खाद्य तेल कारोबार में बरेली का बाजार बड़ा स्थान रखता है। एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का टर्नओवर प्रति माह होता है। बताया जाता है कि दैनिक खाद्य वस्तु क्षेत्र में इडेबल ऑयल से बड़ा अन्य कोई बाजार नहीं है।

थोक और फुटकर दरों में अंतर

आम आदमी को मंडी से फुटकर सामान खरीदना पड़ता है। थोक बाजार में दालों के दाम भले ही कम हो रहे हैं पर फुटकर दरों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। आलम यह है कि थोक मंडी से निकला सामान दुकानों पर महंगा बिक रहा है।
दालों के थोक दाम क्विंटल और फुटकर दाम प्रति किलो में

दाल थोक मंडी भाव फुटकर मंडी भाव

  • चना 5500 65
  • दाल चना 6200 70
  • चना कावली 7400 82
  • मसूर 6650 70
  • दाल मसूर 7500 80
  • दाल अरहर 8500 90
  • दाल मटर 5800 65
  • मूंग दाल 8400 90
  • राजमा 1100 120

भारतीय तिलहन उपज करीब एक तिहाई मांग ही पूरी करने में सक्षम है, इसलिए विदेशी उत्पादों पर निर्भर होना पड़ रहा है। इसका असर कीमतों पर पड़ता है। क्याेंकि विदेशी खाद्य तेल मंगाने पर कस्टम के साथ ही और भी खर्चें होते हैं। - घनश्याम खंडेलवाल, उधमी

किराना बाजार में अपेक्षित मांग नहीं है, इसलिए कीमतें स्थिर हैं। किचन में फिलहाल किराना जिंसों की कीमतों बढ़ने की उम्मीद भी नहीं है। हालांकि कुछ मेवा के दाम बढे़ हैं। - गुलशन सब्बरवाल, अध्यक्ष श्यामगंज किराना मर्चेंट एसोसिएशन

इन दिनाें सरसाें की कीमत में करीब 70 प्रतिशत तक उछाल है। सरकारी समर्थन मूल्य 44 सौ रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि खुले बाजार में 75 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारी सरसों खरीद रहे हैं, इसलिए तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। - मुख्तार मंसूरी, आढ़ती

दालों की मांग में आई कमी से कीमतों में गिरावट आ रही है। दो सप्ताह में दामों में 15 प्रतिशत तक कमी आई है, क्याेंकि लॉकडाउन में दालों की खपत में काफी कमी आई है। लोग सब्जियों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। - अवधेश अग्रवाल, दाल कारोबारी

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