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Bareilly News: ब्लैक स्पॉट लाइलाज, हादसे में घायलों के कैशलेस इलाज की तैयारी
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बरेली। सड़क हादसों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिले में चिह्नित 46 ब्लैक स्पॉट पर सुधार के काम कराने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि, हादसों में घायल होने वालों को गोल्डन ऑवर में त्वरित इलाज मुहैया कराने के लिए कमर कस ली है। स्वास्थ्य विभाग ने ट्राॅमा सेंटर (क्रिटिकल केयर) सुविधायुक्त 30 निजी अस्पताल सूचीबद्ध किए हैं। शासन की मंजूरी और बजट जारी होने के बाद यहां घायलों का कैशलेस इलाज होगा।
नए साल की शुरुआत में शासन ने सड़क दुर्घटना में घायलों को जल्द कैशलेस चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए सीटी-आरएवी (कैशलेस ट्रीटमेंट–रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स) योजना के तहत हाईवे, ब्लैक स्पॉट के पास संचालित निजी अस्पताल, ट्रामा सेंटर को सूचीबद्ध करने के निर्देश जिला प्रशासन और सीएमओ को दिए थे। नोडल अफसर एसीएमओ डॉ. पवन कपाही के मुताबिक, बदायूं, पीलीभीत, रामपुर, नैनीताल, शाहजहांपुर हाईवे पर संचालित 49 से ज्यादा बेड के निजी अस्पतालों और ट्राॅमा सेंटरों को सूचीबद्ध कर लिया गया है।
डॉ. कपाही ने बताया कि इन अस्पतालों में 24 घंटे एक सर्जन, एक ऑर्थोपेडिक और एक एनेस्थेटिक सेवाएं देते हैं। मल्टीस्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाएं भी मिलती हैं। सभी अस्पताल पंजीकृत हैं। आयुष्मान योजना में भी सूचीबद्ध हैं, लेकिन शासकीय स्वीकृति के बिना नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते।
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डॉ. कपाही के मुताबिक, सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के संचालकों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों काे प्रशिक्षण दिया जा चुका है। योजना के तहत इन अस्पतालों में घायलों को अग्रिम भुगतान किए बिना तत्काल इलाज मिलेगा। संबंधित प्रक्रिया, दस्तावेज, नोडल अफसरों की भूमिका, इलाज संबंधी दिशा-निर्देश, निगरानी संबंधी प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध करा दी गई है।
घायलाें के इलाज के लिए जिला मोटर वाहन दुर्घटना निधि ट्रस्ट का गठन किया गया है। डीएम अविनाश सिंह इसके अध्यक्ष और डॉ. पवन कपाही शिकायत निवारण अधिकारी होंगे। इलाज संबंधी अड़चन पर मोबाइल नंबर 9058015880, 8273056963 पर संपर्क कर सकते हैं। योजना का लाभ दुर्घटना की तिथि से सात दिन तक मिलेगा। अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही भुगतान किया जाएगा।
हाईवे पर खड़ी निजी एंबुलेंस की मनमानी पर भी नकेल कसने की तैयारी है। अक्सर हादसे के बाद निजी एंबुलेंस घायलों को गठजोड़ वाले अस्पताल ले जाती हैं। वहां इलाज की पर्याप्त व्यवस्था न होने से घायलों की जान जोखिम में रहती है। अब घायलों को योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल में पहुंचाना होगा। घायल को कहीं और ले जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले की सड़कों पर चिह्नित 46 ब्लैक स्पॉट पर तीन साल में 577 हादसे हुए। इनमें 258 लोगों की जान चली गई, जबकि 220 लोग घायल हुए। इसके बावजूद जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। यहां सुधार के लिए कोई काम नहीं हुए। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हर माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक सुधार के निर्देश तो दिए जाते हैं, पर उनको पूरी तरह क्रियान्वयन नहीं हो पाता। कुछ जगह सुधार होता है, बाकी जगह हादसे होते रहते हैं।
जिले में नेशनल हाईवे पर 13 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर अहलादपुर, लालपुर, मयूर वन चेतना केंद्र पुल, फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र में उचसिया, टिसुआ, फरीदपुर थाना क्षेत्र में टोल प्लाजा के पास स्थित पेट्रोल पंप, गौसगंज पुलिया, गुड्डू भट्ठा के पास, पचौमी अड्डा, मनौरा थाना क्षेत्र में रम्पुरा, खेड़ा, बिथरी थाना क्षेत्र में बिथरी चैनपुर पुल, नवदिया झादा में आए दिन हादसे होते हैं।
जिले में स्टेट हाईवे पर 11 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इनमें बहेड़ी थाना क्षेत्र के मंडनपुर शुमाली, शेरगढ़, वन विभाग तिराहा, नवाबगंज मुख्य चौराहा, बरखन तिराहा, गरगैया, देवरनियां थाना क्षेत्र में सेमीखेड़ा कट, देवरनियां रेलवे फाटक, कटरा ढाल रेलवे फाटक, रिछा रेलवे फाटक शामिल हैं।
ब्लैक स्पॉट की पांच साल तक निगरानी की जाती है। वहां शाॅर्ट टर्म की थीम पर सुधार कराया जाता है और वहां पर नजर रखी जाती है। दोबारा दुर्घटना होने पर फिर सुधार कराए जाते हैं। - अश्विनी चौहान, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
तीन साल तक मानीटरिंग के बाद वर्ष 2025 में इनको ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। संबंधित स्थानों पर सुधार के कार्य कराए जा रहे हैं। - भगत सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
गोल्डन ऑवर के तहत घायलों व मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाकर बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने में सरकारी एंबुलेंस कारगर साबित हो रही हैं। 102, 108 एंबुलेंस से औसतन सात मिनट में पीड़ित अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्ष अप्रैल से दिसंबर तक जिले में संचालित 43 एंबुलेंस (102) के लिए 19,117 कॉल आईं। इनमें रोगी संबंधित 19,011 कॉल्स रहीं। इसमें 11,969 केस में मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया। 7,022 केस ड्रॉप बैक रहे। औसत समय 6.39 मिनट रहा। वहीं, 43 एंबुलेंस (108) पर 9,527 कॉल के सापेक्ष 9,164 में एंबुलेंस रोगी संबंधित रहीं। 9,164 मरीजों को एंबुलेंस सेवा मिली। औसत समय 7.18 मिनट रहा। दोनों एंबुलेंस सेवाओं से अस्पताल पहुंचाए गए 20-20 मरीजों से बात कर दावों का सत्यापन भी किया गया। एंबुलेंस मैनेजर शिवम सोनी के मुताबिक, मरीजाें, घायलों को बेहतर सेवा मुहैया कराने के लिए पायलट और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन प्रशिक्षित हैं। हॉट स्पॉट पर एंबुलेंस मौजूद रहती हैं।
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नए साल की शुरुआत में शासन ने सड़क दुर्घटना में घायलों को जल्द कैशलेस चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए सीटी-आरएवी (कैशलेस ट्रीटमेंट–रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स) योजना के तहत हाईवे, ब्लैक स्पॉट के पास संचालित निजी अस्पताल, ट्रामा सेंटर को सूचीबद्ध करने के निर्देश जिला प्रशासन और सीएमओ को दिए थे। नोडल अफसर एसीएमओ डॉ. पवन कपाही के मुताबिक, बदायूं, पीलीभीत, रामपुर, नैनीताल, शाहजहांपुर हाईवे पर संचालित 49 से ज्यादा बेड के निजी अस्पतालों और ट्राॅमा सेंटरों को सूचीबद्ध कर लिया गया है।
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डॉ. कपाही ने बताया कि इन अस्पतालों में 24 घंटे एक सर्जन, एक ऑर्थोपेडिक और एक एनेस्थेटिक सेवाएं देते हैं। मल्टीस्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाएं भी मिलती हैं। सभी अस्पताल पंजीकृत हैं। आयुष्मान योजना में भी सूचीबद्ध हैं, लेकिन शासकीय स्वीकृति के बिना नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते।
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डॉ. कपाही के मुताबिक, सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के संचालकों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के चिकित्सकों काे प्रशिक्षण दिया जा चुका है। योजना के तहत इन अस्पतालों में घायलों को अग्रिम भुगतान किए बिना तत्काल इलाज मिलेगा। संबंधित प्रक्रिया, दस्तावेज, नोडल अफसरों की भूमिका, इलाज संबंधी दिशा-निर्देश, निगरानी संबंधी प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध करा दी गई है।
घायलाें के इलाज के लिए जिला मोटर वाहन दुर्घटना निधि ट्रस्ट का गठन किया गया है। डीएम अविनाश सिंह इसके अध्यक्ष और डॉ. पवन कपाही शिकायत निवारण अधिकारी होंगे। इलाज संबंधी अड़चन पर मोबाइल नंबर 9058015880, 8273056963 पर संपर्क कर सकते हैं। योजना का लाभ दुर्घटना की तिथि से सात दिन तक मिलेगा। अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही भुगतान किया जाएगा।
हाईवे पर खड़ी निजी एंबुलेंस की मनमानी पर भी नकेल कसने की तैयारी है। अक्सर हादसे के बाद निजी एंबुलेंस घायलों को गठजोड़ वाले अस्पताल ले जाती हैं। वहां इलाज की पर्याप्त व्यवस्था न होने से घायलों की जान जोखिम में रहती है। अब घायलों को योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल में पहुंचाना होगा। घायल को कहीं और ले जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले की सड़कों पर चिह्नित 46 ब्लैक स्पॉट पर तीन साल में 577 हादसे हुए। इनमें 258 लोगों की जान चली गई, जबकि 220 लोग घायल हुए। इसके बावजूद जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। यहां सुधार के लिए कोई काम नहीं हुए। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हर माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठक सुधार के निर्देश तो दिए जाते हैं, पर उनको पूरी तरह क्रियान्वयन नहीं हो पाता। कुछ जगह सुधार होता है, बाकी जगह हादसे होते रहते हैं।
जिले में नेशनल हाईवे पर 13 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर अहलादपुर, लालपुर, मयूर वन चेतना केंद्र पुल, फतेहगंज पूर्वी थाना क्षेत्र में उचसिया, टिसुआ, फरीदपुर थाना क्षेत्र में टोल प्लाजा के पास स्थित पेट्रोल पंप, गौसगंज पुलिया, गुड्डू भट्ठा के पास, पचौमी अड्डा, मनौरा थाना क्षेत्र में रम्पुरा, खेड़ा, बिथरी थाना क्षेत्र में बिथरी चैनपुर पुल, नवदिया झादा में आए दिन हादसे होते हैं।
जिले में स्टेट हाईवे पर 11 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इनमें बहेड़ी थाना क्षेत्र के मंडनपुर शुमाली, शेरगढ़, वन विभाग तिराहा, नवाबगंज मुख्य चौराहा, बरखन तिराहा, गरगैया, देवरनियां थाना क्षेत्र में सेमीखेड़ा कट, देवरनियां रेलवे फाटक, कटरा ढाल रेलवे फाटक, रिछा रेलवे फाटक शामिल हैं।
ब्लैक स्पॉट की पांच साल तक निगरानी की जाती है। वहां शाॅर्ट टर्म की थीम पर सुधार कराया जाता है और वहां पर नजर रखी जाती है। दोबारा दुर्घटना होने पर फिर सुधार कराए जाते हैं। - अश्विनी चौहान, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
तीन साल तक मानीटरिंग के बाद वर्ष 2025 में इनको ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। संबंधित स्थानों पर सुधार के कार्य कराए जा रहे हैं। - भगत सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
गोल्डन ऑवर के तहत घायलों व मरीजों को तेजी से अस्पताल पहुंचाकर बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने में सरकारी एंबुलेंस कारगर साबित हो रही हैं। 102, 108 एंबुलेंस से औसतन सात मिनट में पीड़ित अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्ष अप्रैल से दिसंबर तक जिले में संचालित 43 एंबुलेंस (102) के लिए 19,117 कॉल आईं। इनमें रोगी संबंधित 19,011 कॉल्स रहीं। इसमें 11,969 केस में मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया। 7,022 केस ड्रॉप बैक रहे। औसत समय 6.39 मिनट रहा। वहीं, 43 एंबुलेंस (108) पर 9,527 कॉल के सापेक्ष 9,164 में एंबुलेंस रोगी संबंधित रहीं। 9,164 मरीजों को एंबुलेंस सेवा मिली। औसत समय 7.18 मिनट रहा। दोनों एंबुलेंस सेवाओं से अस्पताल पहुंचाए गए 20-20 मरीजों से बात कर दावों का सत्यापन भी किया गया। एंबुलेंस मैनेजर शिवम सोनी के मुताबिक, मरीजाें, घायलों को बेहतर सेवा मुहैया कराने के लिए पायलट और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन प्रशिक्षित हैं। हॉट स्पॉट पर एंबुलेंस मौजूद रहती हैं।