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भाजपा का पैतरा... आखिर तक बहुमत के मुगालते में रही सपा
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सपा के वरिष्ठ नेताओ के साथ पहुचे सपा समर्थक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
संतोष गंगवार की रणनीति के तहत सपा के खेमे में भेज दिए गए थे भाजपा के चार सदस्य
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बहुमत पूरा हो जाने के झांसे में आई सपा में इन्हीं सदस्यों ने रचा क्रॉस वोटिंग का तानाबाना
बरेली। यह केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का ही पैतरा था कि समाजवादी पार्टी के नेता आखिर तक इस मुगालते में रहे कि उनके पास बहुमत लायक सदस्य हो चुके हैं और इसी वजह से यह भी नहीं भांप पाए कि खुद उनके ही सदस्यों में अच्छी-खासी सेंध लग चुकी है। दरअसल संतोष गंगवार की रणनीति के तहत भाजपा के चार सदस्यों को सपा के खेमे में भेजा गया था जिन्होंने एक तरफ सपा के नेताओं को बहुमत पूरा हो जाने के मुगालते में रखा, दूसरी ओर उन्हीं के सदस्यों को भी तोड़ने में भाजपा की मदद की।
समाजवादी पार्टी के मुकाबले जिला पंचायत चुनाव में आधे ही सदस्य जीतने के बाद भाजपा में शीर्षस्तर तक भारी चिंता थी। ऐसे में अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के लिए हाईकमान ने जिले के सबसे वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को कमान सौंपी थी। भाजपा प्रत्याशी के तौर पर रश्मि पटेल के नाम की घोषणा के दिन से ही संतोष गंगवार ने इस चुनाव के प्रमुख रणनीतिकार के तौर पर काम शुरू कर दिया। उन्हीं की रणनीति का नतीजा रहा कि भाजपा सपा में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग कराने में कामयाब रही और भारी बहुमत से चुनाव जीत लिया।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक मतदान से चार दिन पहले केंद्रीय मंत्री की रणनीति के तहत भाजपा के चार भरोसेमंद जिला पंचायत सदस्यों को सपा के खेमे में भेज दिया गया था। इन सदस्यों ने पहले सपा के दो वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और सपा प्रत्याशी को समर्थन देने की पेशकश की। यह रणनीति इस नजरिए से तैयार की गई थी कि समाजवादी पार्टी के पास अपने 26 सदस्य हैं ही, प्रसपा के एक सदस्य के साथ उनकी संख्या पहले से 27 हो चुकी है, ऐसे में भाजपा के चार सदस्य पहुंच जाने से वह बहुमत के आंकड़े 31 तक पहुंच जाएंगे लिहाजा फिर सपा की नजर निर्दलीय सदस्यों पर ही रहेगी और वह भाजपा में कोई तोड़फोड़ करने की बात सोचेगी भी नहीं।
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पार्टी के सूत्र बताते हैं कि हुआ भी ठीक ऐसा ही। सपा ने इसी तरह से गिनती की और खुद के पास 31 सदस्य मानकर निर्दलीयों से संपर्क साधने की कोशिश में जुट गई। हालांकि निर्दलियों पर भाजपा पहले ही कब्जा कर चुकी ती। भाजपा से सपा के खेमे में भेजे गए चार सदस्यों ने दो मुस्लिम सदस्यों का वोट दिलाने का भरोसा भी सपा नेताओं को दिलाया। सपा नेताओं को भाजपा की इस रणनीति की भनक तक नहीं लगी और वह अंत तक खुद को जीता हुआ मानकर चलती रही। भाजपा ने बसपा और सभी निर्दलीय सदस्यों को साथ लेकर सपा में भी तोड़फोड़ कर दी। सपा के सात सदस्यों से क्रॉस वोटिंग कराने में भी भाजपा के चार सदस्यों की अहम भूमिका रही।
हमारा दुर्भाग्य... पहले से पता होने के बाद भी नहीं रोक पाए क्रॉस वोटिंग
बरेली। समाजवादी पार्टी में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में अगुवा माने जा रहे पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार ने कहा कि यह पार्टी का दुर्भाग्य है कि 26 सदस्य होने के बावजूद हमारी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकी। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि क्रॉस वोटिंग करने वालों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया था और इसका पार्टी में भी जिक्र हुआ था लेकिन फिर भी इसे रोका नहीं जा सका। पूर्व मंत्री ने कहा कि पार्टी में अब दोबारा ऐसे लोगों के नाम पर चर्चा की जाएगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष पदके चुनाव की कमान सपा में पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार ने संभाल रखी थी। पार्टी प्रत्याशी की हार पर उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारे और हमारी पार्टी के लिए इससे ज्यादा और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं हो सकता कि 26 सदस्य होने के बावजूद हम चुनाव हार गए। यह जाहिर सी बात है कि पार्टी में क्रॉस वोटिंग हुई है। कुछ सदस्य ऐसे हैं जो थे तो हमारे साथ लेकिन अंदरखाने विपक्षी पार्टी का साथ दे रहे थे। उन्हाेंने कहा कि ऐसा भी नहीं था कि क्रॉस वोटिंग करने वाले चेहरों को संगठन पहचानता नहीं है। पार्टी संगठन बैठक में इन नामों का जिक्र तक हो चुका था। अब समय आने पर इस बात को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखा जाएगा।
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बहुमत पूरा हो जाने के झांसे में आई सपा में इन्हीं सदस्यों ने रचा क्रॉस वोटिंग का तानाबाना बरेली। यह केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का ही पैतरा था कि समाजवादी पार्टी के नेता आखिर तक इस मुगालते में रहे कि उनके पास बहुमत लायक सदस्य हो चुके हैं और इसी वजह से यह भी नहीं भांप पाए कि खुद उनके ही सदस्यों में अच्छी-खासी सेंध लग चुकी है। दरअसल संतोष गंगवार की रणनीति के तहत भाजपा के चार सदस्यों को सपा के खेमे में भेजा गया था जिन्होंने एक तरफ सपा के नेताओं को बहुमत पूरा हो जाने के मुगालते में रखा, दूसरी ओर उन्हीं के सदस्यों को भी तोड़ने में भाजपा की मदद की।
समाजवादी पार्टी के मुकाबले जिला पंचायत चुनाव में आधे ही सदस्य जीतने के बाद भाजपा में शीर्षस्तर तक भारी चिंता थी। ऐसे में अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के लिए हाईकमान ने जिले के सबसे वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को कमान सौंपी थी। भाजपा प्रत्याशी के तौर पर रश्मि पटेल के नाम की घोषणा के दिन से ही संतोष गंगवार ने इस चुनाव के प्रमुख रणनीतिकार के तौर पर काम शुरू कर दिया। उन्हीं की रणनीति का नतीजा रहा कि भाजपा सपा में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग कराने में कामयाब रही और भारी बहुमत से चुनाव जीत लिया।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक मतदान से चार दिन पहले केंद्रीय मंत्री की रणनीति के तहत भाजपा के चार भरोसेमंद जिला पंचायत सदस्यों को सपा के खेमे में भेज दिया गया था। इन सदस्यों ने पहले सपा के दो वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और सपा प्रत्याशी को समर्थन देने की पेशकश की। यह रणनीति इस नजरिए से तैयार की गई थी कि समाजवादी पार्टी के पास अपने 26 सदस्य हैं ही, प्रसपा के एक सदस्य के साथ उनकी संख्या पहले से 27 हो चुकी है, ऐसे में भाजपा के चार सदस्य पहुंच जाने से वह बहुमत के आंकड़े 31 तक पहुंच जाएंगे लिहाजा फिर सपा की नजर निर्दलीय सदस्यों पर ही रहेगी और वह भाजपा में कोई तोड़फोड़ करने की बात सोचेगी भी नहीं।
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पार्टी के सूत्र बताते हैं कि हुआ भी ठीक ऐसा ही। सपा ने इसी तरह से गिनती की और खुद के पास 31 सदस्य मानकर निर्दलीयों से संपर्क साधने की कोशिश में जुट गई। हालांकि निर्दलियों पर भाजपा पहले ही कब्जा कर चुकी ती। भाजपा से सपा के खेमे में भेजे गए चार सदस्यों ने दो मुस्लिम सदस्यों का वोट दिलाने का भरोसा भी सपा नेताओं को दिलाया। सपा नेताओं को भाजपा की इस रणनीति की भनक तक नहीं लगी और वह अंत तक खुद को जीता हुआ मानकर चलती रही। भाजपा ने बसपा और सभी निर्दलीय सदस्यों को साथ लेकर सपा में भी तोड़फोड़ कर दी। सपा के सात सदस्यों से क्रॉस वोटिंग कराने में भी भाजपा के चार सदस्यों की अहम भूमिका रही।
हमारा दुर्भाग्य... पहले से पता होने के बाद भी नहीं रोक पाए क्रॉस वोटिंग
बरेली। समाजवादी पार्टी में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में अगुवा माने जा रहे पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार ने कहा कि यह पार्टी का दुर्भाग्य है कि 26 सदस्य होने के बावजूद हमारी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकी। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि क्रॉस वोटिंग करने वालों को पहले ही चिह्नित कर लिया गया था और इसका पार्टी में भी जिक्र हुआ था लेकिन फिर भी इसे रोका नहीं जा सका। पूर्व मंत्री ने कहा कि पार्टी में अब दोबारा ऐसे लोगों के नाम पर चर्चा की जाएगी।जिला पंचायत अध्यक्ष पदके चुनाव की कमान सपा में पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार ने संभाल रखी थी। पार्टी प्रत्याशी की हार पर उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारे और हमारी पार्टी के लिए इससे ज्यादा और कुछ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं हो सकता कि 26 सदस्य होने के बावजूद हम चुनाव हार गए। यह जाहिर सी बात है कि पार्टी में क्रॉस वोटिंग हुई है। कुछ सदस्य ऐसे हैं जो थे तो हमारे साथ लेकिन अंदरखाने विपक्षी पार्टी का साथ दे रहे थे। उन्हाेंने कहा कि ऐसा भी नहीं था कि क्रॉस वोटिंग करने वाले चेहरों को संगठन पहचानता नहीं है। पार्टी संगठन बैठक में इन नामों का जिक्र तक हो चुका था। अब समय आने पर इस बात को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखा जाएगा।