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UP: वरुण गांधी और संघमित्रा के टिकट पर संशय, दोनों सांसदों की वजह से अटका इस सीट के प्रत्याशी का एलान
Tue, 12 Mar 2024 01:32 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 12 Mar 2024 01:32 PM IST
सार
बरेली का टिकट वरुण और संघमित्रा फैक्टर में फंस गया है। दोनों के टिकट के लेकर पार्टी से लेकर जनता तक असमंजस में है। दोनों सांसद बगावती तेवर अपनाकर भाजपा को मुश्किल में डाल चुके हैं। टिकट मिलने और कटने पर विरोध तय है।
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Bjp Candidate List 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरेली लोकसभा सीट से भाजपा का प्रत्याशी तय न हो पाने की वजह से पार्टी से लेकर जनता तक असमंजस में है। चर्चाओं और अफवाहों का बाजार गर्म है। राजनीति के जानकारों की मानें तो बरेली का टिकट पहले ही तय हो गया होता, अगर मंडल की बदायूं और पीलीभीत सीटों का पेच न फंसा होता।
बरेली मंडल में पांच लोकसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें दो लोकसभा सीटों आंवला व शाहजहांपुर से भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। बरेली, पीलीभीत व बदायूं के प्रत्याशी चयन में पेच फंसा है। सूत्र बताते हैं कि बदायूं व पीलीभीत के टिकट की वजह से बरेली सीट से प्रत्याशी की घोषणा नहीं हो सकी है।
दरअसल, बदायूं की सांसद संघमित्रा व पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी दोनों ही अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी व सरकार पर छींटाकशी करते रहे। अब अगर इनके टिकट बदले तो नए सिरे से जातीय समीकरण तय करने में बरेली का टिकट भी प्रभावित हो सकता है।
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लाठी लेकर घूमी थीं संघमित्रा, भाजपाइयों को बताया था गुंडा
विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़कर सपा में गए स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी डॉ. संघमित्रा मौर्य बदायूं से सांसद हैं। चुनाव के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर जिले की फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र से सपा के उम्मीदवार थे। चुनाव में भाजपा के सुरेंद्र कुशवाहा ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। वहां दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में बवाल भी हुआ था। स्वामी प्रसाद की गाड़ी तोड़ दी गई थी।
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बरेली मंडल में पांच लोकसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें दो लोकसभा सीटों आंवला व शाहजहांपुर से भाजपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। बरेली, पीलीभीत व बदायूं के प्रत्याशी चयन में पेच फंसा है। सूत्र बताते हैं कि बदायूं व पीलीभीत के टिकट की वजह से बरेली सीट से प्रत्याशी की घोषणा नहीं हो सकी है।
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दरअसल, बदायूं की सांसद संघमित्रा व पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी दोनों ही अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी व सरकार पर छींटाकशी करते रहे। अब अगर इनके टिकट बदले तो नए सिरे से जातीय समीकरण तय करने में बरेली का टिकट भी प्रभावित हो सकता है।
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लाठी लेकर घूमी थीं संघमित्रा, भाजपाइयों को बताया था गुंडा
विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़कर सपा में गए स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी डॉ. संघमित्रा मौर्य बदायूं से सांसद हैं। चुनाव के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर जिले की फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र से सपा के उम्मीदवार थे। चुनाव में भाजपा के सुरेंद्र कुशवाहा ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। वहां दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में बवाल भी हुआ था। स्वामी प्रसाद की गाड़ी तोड़ दी गई थी।
उस वक्त संघमित्रा मौर्य वहां लाठी लेकर भीड़ को दौड़ाती नजर आई थीं। उनके कई वीडियो वायरल हुए थे। इसमें वह भाजपाइयों को गुंडा बताती नजर आई थीं। कई और मौकों पर वह पार्टी लाइन से अलग हटकर विरोध जताती दिखीं। हालांकि, विधानसभा चुनाव में स्वामी व सपा की हार के बाद उनके सुर नरम पड़े और वह पार्टी के कार्यक्रमों में आने लगीं। वह खुद को भाजपा का सच्चा सिपाही बताकर पीएम मोदी की तारीफ कर चुकी हैं पर उनका टिकट होने पर पार्टी में विरोध तय माना जा रहा है।
महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते रहे वरुण
पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी शुरू से ही मोदी खेमे से इतर राय रखते रहे हैं। हाल के कुछ साल में उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार को जमकर घेरा है। कभी बेरोजगारी तो कभी महंगाई के मुद्दे पर उनके बयान पार्टी पदाधिकारियों को असहज करते रहे। अग्निवीर भर्ती को लेकर भी उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। वरुण गांधी के पार्टी व सरकार विरोधी बयान सोशल मीडिया पर छाए रहे।
पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी शुरू से ही मोदी खेमे से इतर राय रखते रहे हैं। हाल के कुछ साल में उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार को जमकर घेरा है। कभी बेरोजगारी तो कभी महंगाई के मुद्दे पर उनके बयान पार्टी पदाधिकारियों को असहज करते रहे। अग्निवीर भर्ती को लेकर भी उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। वरुण गांधी के पार्टी व सरकार विरोधी बयान सोशल मीडिया पर छाए रहे।
विपक्षी पार्टियों के नेता इन्हें री-ट्वीट कर सरकार की खिल्ली उड़ाते रहे। अब चुनाव नजदीक आने पर उनके सुर भी नरम पड़ गए हैं। वह कुछ मामलों में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर चुके हैं। वरुण को टिकट नहीं मिला तो यहां मुकाबला और भी रोचक हो सकता है। उनके समक्ष और भी विकल्प खुले हुए हैं।
शीर्ष नेतृत्व के स्तर से प्रत्याशियों का चयन हो रहा है। पार्टी कई सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। बाकी सीटों पर भी प्रत्याशियों के नाम की घोषणा जल्द ही की जाएगी। जो भी प्रत्याशी तय होंगे, पार्टी कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से उन्हें चुनाव लड़ाएंगे। भाजपा की यही विशेषता है। - दुर्विजय सिंह शाक्य, अध्यक्ष, भाजपा ब्रज प्रांत
समर्थक कर रहे सोशल मीडिया पर पोस्ट
बरेली सीट से टिकट के दावेदारों के समर्थक भी सोशल मीडिया पर अपने-अपने नेताओं के संबंध में पोस्ट डाल रहे हैं। वर्तमान सांसद के समर्थकों ने उनके अनुभव और संघर्ष के बारे सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है। वहीं, दूसरे नेताओं के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने नेताओं को मौका दिए जाने की बातें लिखी हैं।
बरेली सीट से टिकट के दावेदारों के समर्थक भी सोशल मीडिया पर अपने-अपने नेताओं के संबंध में पोस्ट डाल रहे हैं। वर्तमान सांसद के समर्थकों ने उनके अनुभव और संघर्ष के बारे सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है। वहीं, दूसरे नेताओं के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने नेताओं को मौका दिए जाने की बातें लिखी हैं।