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ऑडिट में खुलासा: जन्मतिथि छिपाकर नौकरती करता रहा बेलदार, पोल खुली तो कहा- हिंदी कम जानता हूं

Sat, 26 Sep 2026 05:39 PM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 26 Sep 2026 05:39 PM IST
सार

शारदा नहर के हैडवर्क्स खंड में बेलदार रतन कुमार सरकार ने जन्मतिथि छिपाई। वह 30 सितंबर 2018 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी करीब आठ साल तक नौकरी करता रहा। ऑडिट में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अब उससे सेवाकाल के वेतन और अन्य लाभ के करीब 50 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। 

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Beldar kept working by concealing his date of birth exposed in Audit
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद

विस्तार

बरेली में शारदा नहर के हैडवर्क्स खंड में बेलदार पद पर तैनात रतन कुमार सरकार वास्तविक जन्मतिथि छिपाकर सेवानिवृत्त की तिथि से करीब आठ साल तक नौकरी करता रहा। स्पष्टीकरण में बेलदार ने सच कुबूल किया, पर तर्क दिया कि हिंदी की कम जानकारी की वजह से यह स्थिति बनी। बेलदार को सेवानिवृत्त करने के साथ ही सेवाकाल के दौरान वेतन व अन्य सेवा लाभ के करीब 50 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली की कार्रवाई जारी है।

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पिछले वर्ष ऑडिट टीम को विभागीय अभिलेखों की जांच में बेलदार रतन कुमार सरकार की जन्मतिथि 09 सितंबर 1958 मिली थी, जबकि वह विभाग से सेवानिवृत्त नहीं हुआ है। ऑडिट टीम ने आपत्ति दर्ज कराते हुए जवाब मांगा तो विभाग ने दस्तावेज खंगाले।
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माना कि 30 सितंबर 2018 को 60 वर्ष की अधिवर्षिता आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए था, फिर भी वह राजकीय सेवा में बने रहे और वेतन व अन्य सेवा लाभ लेते रहे। मामला खुलने पर विभाग ने पहले जन्मतिथि से जुड़े अभिलेख मांगे और कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया।

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दस्तावेजों में अलग-अलग जन्मतिथि संबंधी विसंगति
विभाग के अनुसार सेवा पुस्तिका, स्वास्थ्यता प्रमाणपत्र और शैक्षिक प्रमाणपत्रों में जन्मतिथि को लेकर गंभीर विसंगतियां हैं। स्वास्थ्यता प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 09 सितंबर 1958 बताई गई, जबकि बाद के वर्षों के वार्षिक चरित्र पंजीका में 05 जून 1968 दर्ज है। 1968 की जन्मतिथि के आधार पर 1979 में बेलदार के पद पर कार्यभार ग्रहण करते समय उम्र करीब 11 वर्ष बैठती है। इसी तरह 1971 में कक्षा छह से सात में प्रोन्नति संबंधी प्रमाणपत्र में पांच जून 1968 जन्मतिथि दर्ज है, जिससे उस समय उनकी उम्र महज करीब दो वर्ष होने का विरोधाभासी तथ्य सामने आता है।

'हिंदी कम जानता हूं सिर्फ हस्ताक्षर करता हूं.. 1968 जन्मतिथि सही'
नोटिस के जवाब में रतन कुमार ने जन्मतिथि पांच जून 1968 बताते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति 30 सितंबर 2018 को नहीं बनती। हिंदी भाषा काफी कम जानते हैं पर हिंदी में सिर्फ हस्ताक्षर करते हैं। वार्षिक चरित्र पंजिका में जन्मतिथि खुद नहीं, तत्कालीन लिपिक ने लिखी थी। उन्होंने सिर्फ हस्ताक्षर किए। दावा था कि पांच जून 1968 की जन्मतिथि अनुमानित दर्ज थी। विभाग से कारण बताओ नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया था।

स्वास्थ्यता प्रमाणपत्र को आधार मानकर किया सेवानिवृत्त
एक्सईएन राजीव कुमार सिंह के मुताबिक, विभागीय अभिलेखों और कर्मचारी के स्पष्टीकरण के आधार पर यह तय होना था कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि क्या है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्यता प्रमाणपत्र ही वास्तविक आयु का प्रमाण मानते है। इसके आधार पर उम्र करीब 68 वर्ष होती है। इसी आधार पर कर्मचारी को सेवानिवृत्त किया गया। करीब 50 लाख रुपये वसूली का नोटिस दिया है। धनराशि की भरपाई के बाद ही सेवानिवृत्ति के लाभ मिलेंगे।
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