{"_id":"5856e9c24f1c1baa60c06524","slug":"be-absorbed-in-the-grain-market-are-old-notes","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनाज मंडी में खपाए जा रहे हैं पुराने नोट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनाज मंडी में खपाए जा रहे हैं पुराने नोट
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 19 Dec 2016 01:48 AM IST
विज्ञापन
500 के पुराने नोट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रचलन से बाहर हुए 500 और एक हजार के नोटों को किसानों के बीच खपाया जा रहा है। आखिरी दस दिनों में इस तरह पुराने नोटों को खपाने की कवायद काफी तेज हो गई है। आढ़ती और राइस मिलर इसके लिए काले धन वालों से 10 फीसदी तक की दलाली ले रहे हैं। यह स्थिति बरेली और आसपास के जिलों की प्रमुख मंडियों और ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रही है। कुछ ने तो किसानों को एडवांस में ये नोट दे दिए हैं। गेहूं अप्रैल और मई में लेने का भी वादा कर लिया है। यानी किसानों के ऊपर चार महीने एडवांस में नोटों की बौछार हो रही है।
बरेली मंडल में हर साल औसतन नवंबर से फरवरी तक करीब एक लाख क्विंटल तक गेहूं खरीद होती रही है। लेकिन नोटबंदी से गेहूं क ी खरीद की रफ्तार दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। हर दिन कागजों पर ढाई लाख क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीद दिखाई जा रही है। मंडी परिषद की मिलीभगत से आढ़तों पर सिक्स आर भी काटी जा रही है। धान खरीद का खेल भी राइस मिलों में काफी खामोशी से चल रहा है। कागजों में शाहजहांपुर और पीलीभीत में हर दिन 10 से 12 करोड़ रुपये की खरीद पुराने नोटों से हो रही है। बदायूं में जहां धान की उपज बहुत कम होती है, वहां भी काफी ज्यादा खरीद दिखाई जा रही है। बरेली की आंवला, देवचरा, रिछा, बहेड़ी, फरीदपुर, धौराटांडा, शाही, भुता आदि इलाकों में कई राइस मिलर धान की खरीद कर काले धन को सफेद करने के धंधे में लगे हुए हैं।
ऐसे हो रहा है धंधा
10 से 12 प्रतिशत पर नोट बदले जाने का धंधा कारोबारी, आढ़ती, किसान और दलालों के इर्द-गिर्द ही चल रहा है। इस धंधे में वाणिज्यकर और मंडी परिषद के कुछ अफसरों का नेटवर्क भी शामिल है। क्योंकि वही मंडी समिति की सिक्स आर उपलब्ध कराने के साथ-साथ मौन सहमति भी देते हैं।
विज्ञापन
न खेत में गेहूं न किसानों के पास, फिर भी दिखा रहे खरीद
इस समय धान का सीजन चल रहा है। सरकारी क्रय केंद्र खाली पड़े हैं, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। जबकि नोट बदली में लगे धंधेबाज किसानों को प्रति क्विंटल दो सौ से तीन सौ रुपये ज्यादा तक कीमत देकर धान खरीद रहे हैं। इस खरीद में अपनी प्रतिबंधित करेंसी खपाई जा रही है। गेहूं खरीद में तो प्रतिबंधित नोट खपाने की हद पार हो गई है। क्योंकि इस समय गेहूं न तो खेत में है और न किसानों के पास। खेतों में बुआई होने के बाद गेहूं की फसल अभी अंकुरण की स्थिति में है।
कभी भी की जा सकती है खरीद
अनाज, दलहन, तिलहन आदि की किसानों से खरीद कभी भी की जा सकती है। आढ़ती खरीद पर निर्धारित मंडी शुल्क देता है। इसी के आधार पर हम खरीद भी मानते हैं।- एसपी यादव, उप निदेशक मंडी परिषद
विज्ञापन
बरेली मंडल में हर साल औसतन नवंबर से फरवरी तक करीब एक लाख क्विंटल तक गेहूं खरीद होती रही है। लेकिन नोटबंदी से गेहूं क ी खरीद की रफ्तार दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। हर दिन कागजों पर ढाई लाख क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीद दिखाई जा रही है। मंडी परिषद की मिलीभगत से आढ़तों पर सिक्स आर भी काटी जा रही है। धान खरीद का खेल भी राइस मिलों में काफी खामोशी से चल रहा है। कागजों में शाहजहांपुर और पीलीभीत में हर दिन 10 से 12 करोड़ रुपये की खरीद पुराने नोटों से हो रही है। बदायूं में जहां धान की उपज बहुत कम होती है, वहां भी काफी ज्यादा खरीद दिखाई जा रही है। बरेली की आंवला, देवचरा, रिछा, बहेड़ी, फरीदपुर, धौराटांडा, शाही, भुता आदि इलाकों में कई राइस मिलर धान की खरीद कर काले धन को सफेद करने के धंधे में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
ऐसे हो रहा है धंधा
10 से 12 प्रतिशत पर नोट बदले जाने का धंधा कारोबारी, आढ़ती, किसान और दलालों के इर्द-गिर्द ही चल रहा है। इस धंधे में वाणिज्यकर और मंडी परिषद के कुछ अफसरों का नेटवर्क भी शामिल है। क्योंकि वही मंडी समिति की सिक्स आर उपलब्ध कराने के साथ-साथ मौन सहमति भी देते हैं।
विज्ञापन
न खेत में गेहूं न किसानों के पास, फिर भी दिखा रहे खरीद
इस समय धान का सीजन चल रहा है। सरकारी क्रय केंद्र खाली पड़े हैं, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। जबकि नोट बदली में लगे धंधेबाज किसानों को प्रति क्विंटल दो सौ से तीन सौ रुपये ज्यादा तक कीमत देकर धान खरीद रहे हैं। इस खरीद में अपनी प्रतिबंधित करेंसी खपाई जा रही है। गेहूं खरीद में तो प्रतिबंधित नोट खपाने की हद पार हो गई है। क्योंकि इस समय गेहूं न तो खेत में है और न किसानों के पास। खेतों में बुआई होने के बाद गेहूं की फसल अभी अंकुरण की स्थिति में है।
कभी भी की जा सकती है खरीद
अनाज, दलहन, तिलहन आदि की किसानों से खरीद कभी भी की जा सकती है। आढ़ती खरीद पर निर्धारित मंडी शुल्क देता है। इसी के आधार पर हम खरीद भी मानते हैं।- एसपी यादव, उप निदेशक मंडी परिषद