बीडीए को मोबाइल टावर भी नहीं दिखाई देते
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मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने गौरैया की प्रजाति लगभग समाप्त सा कर दी है। डाक्टरों के मुताबिक मोबाइल टावर का रेडिएशन एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के रेडिएशन से ज्यादा खतरनाक है। शहर में बीएसएनएल, एयरटेल, आइडिया, वोडाफोन, रिलायंस, टाटा डोकोमों, एयरसेल, यूनीनॉर आदि के करीब साढ़े छह सौ से ज्यादा टावर लगे हैं। एक संचार कंपनी आर्मी एरिया में मोबाइल टावर लगवा रही थी। सेना के अधिकारियों की आपत्ति पर बीडीए ने इसे ध्वस्त करा दिया। मगर बाकी अनाधिकृत टावरों को ध्वस्त कराने के लिए शिकायतकर्ताओं को नियमों का हवाला देकर टरकाया जा रहा है। पुराना शहर के बुखारपुरा, शहदाना चौराहा, गुलमोहर पार्क कालोनी, खुर्रम गौंटिया, मढ़ीनाथ, सेटेलाइट रोड के अलावा कालीबाड़ी में निजी अस्पताल की छत पर पांच मोबाइल टावर एक साथ लगे हैं। शहर में जितने मोबाइल टावर लगे हैं, बीडीए में किसी का पंजीकरण नहीं है। दो दर्जन से ज्यादा मोबाइल टावर अनाधिकृत तरीके से लगाए जाने की शिकायतें मिल चुकी हैं।
‘मोबाइल टावर के नियमों में कुछ बदलाव किया गया है। मैं बरेली लौटने पर इस बारे में पता करूंगा। अगर कोई मोबाइल टावर बिना नक्शा स्वीकृत कराए अनाधिकृत तरीके से लग रहा है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।’
-डॉ. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए