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प्रदूषण होता है तो होता रहे... हम तो करेंगे मनमानी
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बरेली। बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने और पर्यावरण स्वच्छ रखने के लिए राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की शर्तों और निर्देशों का पालन प्रशासन नहीं करा पा रहा है। पिछले दिनों बीडीए की ओर से क्रेडाई और ठेकेदारों को चेतावनी दी गई थी कि वह एनजीटी के नियमों के तहत निर्माण सामग्री को सड़क पर स्टोर न करें व निर्माण क्षेत्र को ढंक कर रखें। इसके अलावा करीब दो दर्जन बिंदुओं पर चेताया गया था और तीन दिन का समय दिया गया था। शनिवार को ही यह मियाद पूरी हो गई, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। रविवार को अमर उजाला की टीम ने शहर का जायजा लिया गया तो खुले तौर पर एनजीटी नियमों की धज्जियां उड़ती दिखाई दीं। सड़कों के किनारे पहले से भी अधिक निर्माण सामग्री स्टोर पाई गई, लेकिन मनमानी करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ये वहीं स्थान है, जिन्हें लेकर पहले से विवाद रहा है और इनके ठेकेदारों को बीडीए चेतावनी पहले भी जारी कर चुका है।
संजय नगर गुरुद्वारा क्षेत्र-12:35 बजे
संजय नगर गुरुद्वारे के पास एक भवन खुले में बनाया जाता मिला। इसकी निर्माण सामग्री सड़क किनारे ही स्टोर की गई थी। तेज हवा से मौरंग और ईंटों की गर्द हवा में उड़ रही थी। इसके चलते वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए सांस लेना दूभर हो रहा था।
पीलीभीत रोड, मॉडल टाउन -12:40 बजे
मॉडल टाउन के पास हो रहे निर्माण खुले में किया जा रहा था। यह वही जगह थी जिसके विषय में पूर्व में भी बीडीए को अवगत कराया गया पर बीडीए के निर्देश जारी करने के बावजूद निर्माण बिना ढंके जारी रहा।
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संजय नगर पेट्रोल पंप -12:45 बजे
संजय नगर पेट्रोल पंप तिराहे के पास सड़क के किनारे रेत और बजरी का ढेर पहले से अधिक लगा दिखा। इस स्टोर प्वाइंट को लेकर पहले से विवाद भी रहा है। पर बीडीए के निर्देशोें का कोई पालन होता दिखाई नहीं दिया।
डीडीपुरम - 12:50 बजे
डीडीए की चेतावनी के बावजूद डीडीपुरम के पास सड़क किनारे निर्माण सामग्री इकट्ठा की हुई मिली। इसमें रेत, बजरी, ईंट आदि शामिल है। भवन निर्माण कर्ता द्वारा खुले तौर पर एनजीटी के नियमों की अवहेलना की जा रही थी।
‘बीडीए सभी निर्माणों के साथ हो रहे सड़क किनारे के अतिक्रमणों पर निगाह बनाए हुए है। जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
- अमरीश कुमार श्रीवास्तव, सचिव, बीडीए
फाइलों में ही दबे रह गए एनजीटी के ये निर्देश
भवन निर्माण के दौरान सड़क के किनारे निर्माण सामग्री या मलबा नहीं डाला जाएगा।
भवन निर्माणकर्ता निर्माण सामग्री को तिरपाल से ढंककर रखेगा।
नियम तोड़ने पर एनजीटी के आदेश के अनुसार अर्थदंड डाला जाएगा।
भवन निर्माणस्थल को पूरी तरह तिरपाल या ऐसी ही किसी चीज से कवर करना होगा।
निर्माण स्थल पर धूल उत्सर्जन को रोकने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे।
निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों को मास्क देना होगा ताकि धूल उनकी सांस में न जाए।
इन नियमों को तोड़ने पर दोषी भवन निर्माता पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड व नियम विरुद्घ निर्माण सामग्री को लाने ले जाने पर पांच हजार का अर्थदंड देना होगा।
निर्माण सामग्री, मनवा व अपशिष्ट आदि के नदी आदि में प्रवाहित करने पर भी एनजीटी की शर्तें लागू होंगी।
सामाजिक स्थलों पर निर्माण सामग्री स्टोर करने पर 50 हजार का जुर्माना लगेगा।
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संजय नगर गुरुद्वारा क्षेत्र-12:35 बजे
संजय नगर गुरुद्वारे के पास एक भवन खुले में बनाया जाता मिला। इसकी निर्माण सामग्री सड़क किनारे ही स्टोर की गई थी। तेज हवा से मौरंग और ईंटों की गर्द हवा में उड़ रही थी। इसके चलते वहां से गुजरने वाले लोगों के लिए सांस लेना दूभर हो रहा था।
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पीलीभीत रोड, मॉडल टाउन -12:40 बजे
मॉडल टाउन के पास हो रहे निर्माण खुले में किया जा रहा था। यह वही जगह थी जिसके विषय में पूर्व में भी बीडीए को अवगत कराया गया पर बीडीए के निर्देश जारी करने के बावजूद निर्माण बिना ढंके जारी रहा।
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संजय नगर पेट्रोल पंप -12:45 बजे
संजय नगर पेट्रोल पंप तिराहे के पास सड़क के किनारे रेत और बजरी का ढेर पहले से अधिक लगा दिखा। इस स्टोर प्वाइंट को लेकर पहले से विवाद भी रहा है। पर बीडीए के निर्देशोें का कोई पालन होता दिखाई नहीं दिया।
डीडीपुरम - 12:50 बजे
डीडीए की चेतावनी के बावजूद डीडीपुरम के पास सड़क किनारे निर्माण सामग्री इकट्ठा की हुई मिली। इसमें रेत, बजरी, ईंट आदि शामिल है। भवन निर्माण कर्ता द्वारा खुले तौर पर एनजीटी के नियमों की अवहेलना की जा रही थी।
‘बीडीए सभी निर्माणों के साथ हो रहे सड़क किनारे के अतिक्रमणों पर निगाह बनाए हुए है। जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
- अमरीश कुमार श्रीवास्तव, सचिव, बीडीए
फाइलों में ही दबे रह गए एनजीटी के ये निर्देश
भवन निर्माण के दौरान सड़क के किनारे निर्माण सामग्री या मलबा नहीं डाला जाएगा।
भवन निर्माणकर्ता निर्माण सामग्री को तिरपाल से ढंककर रखेगा।
नियम तोड़ने पर एनजीटी के आदेश के अनुसार अर्थदंड डाला जाएगा।
भवन निर्माणस्थल को पूरी तरह तिरपाल या ऐसी ही किसी चीज से कवर करना होगा।
निर्माण स्थल पर धूल उत्सर्जन को रोकने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे।
निर्माण स्थल पर काम करने वाले मजदूरों को मास्क देना होगा ताकि धूल उनकी सांस में न जाए।
इन नियमों को तोड़ने पर दोषी भवन निर्माता पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड व नियम विरुद्घ निर्माण सामग्री को लाने ले जाने पर पांच हजार का अर्थदंड देना होगा।
निर्माण सामग्री, मनवा व अपशिष्ट आदि के नदी आदि में प्रवाहित करने पर भी एनजीटी की शर्तें लागू होंगी।
सामाजिक स्थलों पर निर्माण सामग्री स्टोर करने पर 50 हजार का जुर्माना लगेगा।