बरेलीः प्रसव के लिए भर्ती महिला में कोरोना की पुष्टि, डॉक्टरों ने खींचे हाथ
रामपुर बाग के एक अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती हुई महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों ने डिलीवरी के केस लेने से हाथ खींच लिए हैं। बुधवार को गंभीर हालत से गुजर रही एक महिला को सरकारी महिला अस्पताल से सीधे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया जहां उसकी डिलीवरी कराने के लिए इतनी मोटी फीस की मांग की गई कि महिला के परिवार के पसीने छूट गए। इसके बाद कई और अस्पतालों में इनकार सुनने के बाद बमुश्किल चौपुला चौराहे के पास एक अस्पताल में महिला का प्रसव हुआ लेकिन इस अस्पताल में भी इस परिवार के साथ ऐसा बर्ताव किया गया कि उसे डॉक्टर के पैरों पर गिरकर रहम की भीख मांगनी पड़ी।
किला के जसौली इलाके में रहने वाले शिव प्रकाश गुप्ता के छोटे भाई पिंटू की गर्भवती पत्नी पूनम का जिला महिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। सोमवार शाम प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद करीब आठ बजे परिवार के लोग पूनम को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। परिवार के मुताबिक महिला अस्पताल में पूनम को भर्ती तो किया गया लेकिन रात करीब 11 बजे पीलीभीत बाईपास के एक निजी मेडिकल कॉलेज को रेफर कर दिया। एंबुलेंस से उन्हें वहां पहुंचवा भी दिया गया।
शिव प्रकाश के मुताबिक वे मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो वहां भी पूनम को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। उनसे कहा गया कि मेडिकल कॉलेज में सिर्फ कोरोना मरीज भर्ती होंगे। परिवार वालों ने काफी खुशामद की तो थोड़ी देर बाद शर्त रख दी कि 35 हजार रुपये कैश जमा करने पर ही ऑपरेशन होगा। रात के वक्त इतनी रकम रात में दे पाने में असमर्थता जताई तो मेडिकल कॉलेज ने भी पूनम को भर्ती नहीं किया। इसके बाद परिवार वाले पूनम को लेकर सिटी स्टेशन रोड के तीन और नर्सिंग होम में पहुंचे लेकिन वहां भी उनके साथ यही सलूक किया गया।
देर रात परिवार पूनम को लेकर चौपुला के एक अस्पताल में पहुंचा जहां 28 हजार रुपये कैश जमा कराने को कहा गया। बमुश्किल 12 हजार का इंतजाम हुआ जो उन्होंने जमा करा दिया। परिवार वालों के मुताबिक डॉक्टर ने कोरोना की जांच की फीस अलग से मांगी। परिवार वालों ने महिला अस्पताल में पहले ही कोरोना की जांच हो जाने की बात कही लेकिन अस्पताल ने बगैर दोबारा जांच कराए ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया। मजबूरन उन्हें हामी भरनी पड़ी। सुबह करीब 4.45 बजे महिला का ऑपरेशन हुआ।
परिवार का कहना है कि प्रसव होते ही डॉक्टर ने पूरी रकम मांगी। उन्होंने थोड़ा इंतजार करने को कहा तो उसने प्रसूता को लगाई डिप निकाल दी। प्रसूता की हालत बिगड़ी तो परिजनों को डॉक्टर के पैरों में गिरकर रहम की फरियाद करनी पड़ी। मंगलवार सुबह दस बजे अस्पताल में कैश जमा कराया। अभी कोरोना की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है, जिसकी फीस भी परिवार से मांगी जा रही है।
महिला की हालत बेहद नाजुक थी। अगर उसका ऑपरेशन कर देते तो बच्चे और मां की जान पर बन जाती। अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है, इसलिए उसके परिवार को आईसीयू की सुविधा वाले अस्पताल में सिजेरियन प्रसव कराने का सुझाव दिया गया। उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल भी भिजवाया ताकि कोई दिक्कत न हो। - डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल