{"_id":"57210d444f1c1bf631a9250f","slug":"bareilly-oil-will-take-the-game-of-life","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरेली के तेल का खेल तो जान ले लेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरेली के तेल का खेल तो जान ले लेगा
ब्यूराो अमर उजाला बरेली
Updated Thu, 28 Apr 2016 12:34 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाकई यह खबर परेशान करने वाली है। नकली सरसों का तेल बनाने का सामान खुलेआम बरेली के बाजार में बिक रहा है। थोड़े से एसेंस और केमिकल कलर की मिलावट से सैकड़ों लीटर तेल तैयार किया जा रहा है। हूबहू असली दिखने वाला यह तेल तमाम सस्ते ब्रांडों की चिप्पी के साथ घरों में पहुंच रहा है। ये तेल हालांकि तुरंत असर न दिखाएं लेकिन ये आदमी के शरीर के लिए खतरनाक हैं। ये गुर्दे और लीवर पर सीधे अटैक करते हैं। इस कारोबार पर नियंत्रण रोकने वाले विभागों की मिलीभगत से सारा काम हो रहा है और इनके अवैध कारोबार से वाणिज्यकर के अफसर कर्मचारी भी खूब कमा रहे हैं। नेताओं का भी दखल है इसलिए सब चल रहा है।
बरेली में दर्जनों ब्रांड नियम कानून को धता बताते हुए हर दिन हजारों किलो तेल सप्लाई करते हैं। लाखों रुपये प्रतिदिन टैक्स चोरी करने वालेे तमाम कारोबारियों के दो दर्जन से ज्यादा ब्रांड बोतल और टिन में उपलब्ध हैं। पैकिंग पर छपे दावों पर यकीन किया जाए तो उत्पाद कतई नकली नहीं है। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन लाइसेंसी भी इस काम में पीछे नहीं हैं। नकली सरसों तेल देखने में कुछ साफ सुथरा दिखता है।
दो सौ टन कारोबार
बरेली बाजार में हर दिन दो लाख किलो से ज्यादा सरसों तेल खपाया जा रहा है। इस धंधे में ज्यादातर कारोबारी टैक्स चोरी में लिप्त हैं। लाइसेंस बिना विभागीय मिलीभगत से धंधा धड़ल्ले से चल रहा है।
विज्ञापन
ऐसे बनता है सरसों तेल
तीस टन पाम ऑयल/ रिफाइंड से भरे एक टैंकर में दो बोतल सिंथेटिक मसटर्ड ऑयल और दो पैकेट ऑयल यलो 2 जी मिलाना है। इससे साठ रुपये में बिकने वाले एक लीटर उत्पाद की कीमत 90 रुपये हो जाती है।
इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में आने वाले अखाद्य पीला रंग ऑयल यलो 2 जी आधा किलो पैकेट पांच सौ रुपये में श्यामगंज बाजार में उपलब्ध है। महाराजा नाम से नकली सरसों सुगंध से भरी पांच सौ ग्राम बोतल बास मंडी और शास्त्री बाजार में मिलेगी। इसकी प्रिंट कीमत नौ सौ रुपये है।
मैजिक का मैजिक
स्वाति ऑयल इंडस्ट्री हापुड़ द्वारा तैयार एक लीटर मैजिक नाम की बोतल सौ रुपये में बिक रही है। इसमें सिंथेटिक रंग पाया गया है। माधोबाड़ी बरेली में बने एक उत्पाद में भी ये कृत्रिम रंग मिला है।
बिना लाइसेंस कारोबार
खाद्य तेल कारोबार में खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग ने जारी लाइसेंस होना अनिवार्य है। दो खाद्य तेल मिलाकर बेचने के लिए एग मार्क लाइसेंस लेना होता। बरेली में सात- आठ लोगों के पास ये है लेकिन बाकी लोग इसके बगैर कारोबार कर रहे हैं। इनकी असल संख्या भी किसी के पास नहीं है। कुछ ने पैकिंग का लाइसेंस ले रखा है और उसी के आधार पर बड़ा धंधा चल रहा है।
घर बैठे चेक करें
पाम ऑयल से बने सरसों के तेल में केमिकल होता है। सरसों तेल कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दें। अगर ये पाम ऑयल में रंग मिला कर बना है तो जम जाएगा।
इन्फो
रविंद्रा का सरसों का तेल फेल
बरेली। पिछले साल एफएसडीए की टीम ने विभिन्न ब्रांडों के खाद्य तेल के नमूने लिए जिनमें हापुड़ के रविंद्रा ब्रांड परीक्षण में खरा नहीं उतरा है। प्रयोगशाला में हुई जांच में इसे अनसेफ बताया गया। एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि कथित रविंद्रा सहित कई ब्रांड नकली हैं।
नमूनों का ब्योरा
पिछले साल मात्र 11 नमूने लिए गए। इनमें से सात की रिपोर्ट मिली है। जिसमें से एक को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है। चार नमूने अधोमानक पाए गए। जबकि एक मिस ब्रांड और एक के लेबिल में कमी पाई गई है। इनमें से अधोमानक वाले एक ब्रांड पर एडीएम (सिटी) ने50 हजार रुपये का जुर्माना किया है।
विज्ञापन
बरेली में दर्जनों ब्रांड नियम कानून को धता बताते हुए हर दिन हजारों किलो तेल सप्लाई करते हैं। लाखों रुपये प्रतिदिन टैक्स चोरी करने वालेे तमाम कारोबारियों के दो दर्जन से ज्यादा ब्रांड बोतल और टिन में उपलब्ध हैं। पैकिंग पर छपे दावों पर यकीन किया जाए तो उत्पाद कतई नकली नहीं है। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन लाइसेंसी भी इस काम में पीछे नहीं हैं। नकली सरसों तेल देखने में कुछ साफ सुथरा दिखता है।
विज्ञापन
दो सौ टन कारोबार
बरेली बाजार में हर दिन दो लाख किलो से ज्यादा सरसों तेल खपाया जा रहा है। इस धंधे में ज्यादातर कारोबारी टैक्स चोरी में लिप्त हैं। लाइसेंस बिना विभागीय मिलीभगत से धंधा धड़ल्ले से चल रहा है।
विज्ञापन
ऐसे बनता है सरसों तेल
तीस टन पाम ऑयल/ रिफाइंड से भरे एक टैंकर में दो बोतल सिंथेटिक मसटर्ड ऑयल और दो पैकेट ऑयल यलो 2 जी मिलाना है। इससे साठ रुपये में बिकने वाले एक लीटर उत्पाद की कीमत 90 रुपये हो जाती है।
इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में आने वाले अखाद्य पीला रंग ऑयल यलो 2 जी आधा किलो पैकेट पांच सौ रुपये में श्यामगंज बाजार में उपलब्ध है। महाराजा नाम से नकली सरसों सुगंध से भरी पांच सौ ग्राम बोतल बास मंडी और शास्त्री बाजार में मिलेगी। इसकी प्रिंट कीमत नौ सौ रुपये है।
मैजिक का मैजिक
स्वाति ऑयल इंडस्ट्री हापुड़ द्वारा तैयार एक लीटर मैजिक नाम की बोतल सौ रुपये में बिक रही है। इसमें सिंथेटिक रंग पाया गया है। माधोबाड़ी बरेली में बने एक उत्पाद में भी ये कृत्रिम रंग मिला है।
बिना लाइसेंस कारोबार
खाद्य तेल कारोबार में खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग ने जारी लाइसेंस होना अनिवार्य है। दो खाद्य तेल मिलाकर बेचने के लिए एग मार्क लाइसेंस लेना होता। बरेली में सात- आठ लोगों के पास ये है लेकिन बाकी लोग इसके बगैर कारोबार कर रहे हैं। इनकी असल संख्या भी किसी के पास नहीं है। कुछ ने पैकिंग का लाइसेंस ले रखा है और उसी के आधार पर बड़ा धंधा चल रहा है।
घर बैठे चेक करें
पाम ऑयल से बने सरसों के तेल में केमिकल होता है। सरसों तेल कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दें। अगर ये पाम ऑयल में रंग मिला कर बना है तो जम जाएगा।
इन्फो
रविंद्रा का सरसों का तेल फेल
बरेली। पिछले साल एफएसडीए की टीम ने विभिन्न ब्रांडों के खाद्य तेल के नमूने लिए जिनमें हापुड़ के रविंद्रा ब्रांड परीक्षण में खरा नहीं उतरा है। प्रयोगशाला में हुई जांच में इसे अनसेफ बताया गया। एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि कथित रविंद्रा सहित कई ब्रांड नकली हैं।
नमूनों का ब्योरा
पिछले साल मात्र 11 नमूने लिए गए। इनमें से सात की रिपोर्ट मिली है। जिसमें से एक को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है। चार नमूने अधोमानक पाए गए। जबकि एक मिस ब्रांड और एक के लेबिल में कमी पाई गई है। इनमें से अधोमानक वाले एक ब्रांड पर एडीएम (सिटी) ने50 हजार रुपये का जुर्माना किया है।