UP: बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाता है टीकाकरण, बरेली की डॉक्यूमेंट्री देशभर में फैलाएगी जागरूकता
बाकरगंज के दो परिवारों को केंद्र में रखकर अन्य परिवारों को भी जागरूक किया तो करीब एक हजार परिवार टीकाकरण के लिए राजी हुए। फिर दिल्ली यूनिसेफ की टीम ने करीब दो माह पहले दोनों परिवारों की डॉक्यूमेंट्री तैयार की।
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बच्चों को जानलेवा 12 बीमारियों से बचाने के बजाय नियमित टीकाकरण का विरोध कर रहे देशभर के प्रतिरोधी परिवारों को बरेली की डॉक्यूमेंट्री जागरूक करेगी। बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की टीम ने बाकरगंज के दो प्रतिरोधी परिवारों की डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। यह उत्तर प्रदेश में लांच हो गई है। इसे अब देशभर में लांच करने की तैयारी है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक, जिले के करीब 2400 परिवार नियमित टीकाकरण के विरोध में थे। इनसे संपर्क कर निशुल्क टीकाकरण के बाद बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा था। फिर भी वे तैयार नहीं हो रहे थे।
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सीएचसी, पीएचसी, यूपीएचसी व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से टीकाकरण का विरोध कर रहे परिवारों की सूची तैयार की गई। यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ की टीम ने भी सचेत किया। जनप्रतिनिधि और क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्ति, धर्मगुरुओं की अपील के बाद कई परिवार टीकाकरण के लिए राजी हुए। इधर, कुछ परिवार ऐसे रहे जिनके बच्चे खसरा और अन्य बीमारियों की चपेट में आए तो परिजन टीकाकरण कराने पहुंचे।
ऐसे मामले संज्ञान में आने पर स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की टीम ने परिवार से संपर्क किया। बाकरगंज के दो परिवारों को केंद्र में रखकर अन्य परिवारों को भी जागरूक किया तो करीब एक हजार परिवार टीकाकरण के लिए राजी हुए। फिर दिल्ली यूनिसेफ की टीम ने करीब दो माह पहले दोनों परिवारों की डॉक्यूमेंट्री तैयार की।
बच्ची को हुआ खसरा तो समझे टीके का महत्व
बाकरगंज की रहने वाली मुस्कान ने अपनी बेटी को एक भी टीका नहीं लगवाया था। आशा कार्यकर्ता और एएनएम के समझाने पर भी वह तैयार नहीं हो रही थीं। बल्कि टीके लगने से बुखार आने, पति की मजदूरी का काम प्रभावित होने समेत कई बहाने बना रही थीं। बेटी खसरा रोग की चपेट में आई तो उन्हें बताया गया कि अगर टीका लगा होता तो बच्ची बीमार न होती।
अब दूसरों को भी टीका लगवा रही हैं नीलम
बाकरगंज की रहने वाली नीलम ने बेटी को एक भी टीका नहीं लगाया था। उनका परिवार टीकाकरण के विरोध में था। स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे थे। मगर बेटी की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें टीकाकरण की अहमियत समझ में आई। विरोध को परे रख केंद्र पर टीकाकरण कराने पहुंचीं।
बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
डॉ. प्रशांत के मुताबिक, बच्चों को वैक्सीन लगने के बाद बुखार का होना बीमारी नहीं बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ना होता है। नियमित टीकाकरण से जापानी इंसेफलाइटिस, टीबी, निमोनिया, रतौंधी, रोटा वायरस, पोलियो, पीलिया, काली खांसी, गलघोंटू, टेटनस, खसरा, हीमोफिलिया इंफ्लूएंजा का खतरा टलता है। इनसे बचाव के लिए टीके शून्य से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क लगते हैं।