सरकारी जमीन में 'खेल': बरेली में डीएम ने तहसीलदार को हटाया, कानूनगो और लेखपाल किए निलंबित
बरेली के नवाबगंज तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीन में खेल किया गया। एक शिकायत पर डीएम ने जांच कराई तो पूरे खेल का खुलासा हुआ। इस मामले में डीएम ने तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल पर कार्रवाई की है। जानते हैं पूरा मामला...।
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बरेली के नवाबगंज तहसील क्षेत्र के गांव ज्योरा मकरंदपुर में सरकारी जमीन में खेल के मामले में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है, जबकि कानूनगो श्याम सुंदर गुप्ता और लेखपाल रामचंद्र को निलंबित किया है। इन तीनों पर अभिलेखों का परीक्षण न करने, अपर आयुक्त को गलत रिपोर्ट भेजने और आदेश की फोटो कॉपी के आधार पर खतौनी पर नाम दर्ज करने का आरोप है।
वर्ष 2013 में ज्योरा मकरंदपुर गांव के संतराम, उसकी पत्नी व भाई के नाम पर कृषि पट्टे हुए थे। इन तीनों को करीब साढ़े चार बीघा सरकारी जमीन दी गई थी। आरोप है कि संतराम ने तहसील कर्मियों से सांठगांठ करके गाटा संख्या 16 की चार बीघा जमीन भी अपने नाम चढ़वा ली। इसकी शिकायत गांव के ही लालाराम ने जिलाधिकारी से की तो मामले की जांच हुई। बाद में चार फरवरी 2024 को नवाबगंज थाने में संतराम के खिलाफ धोखाधड़ी आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसी बीच संतराम की मृत्यु हो गई और पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इससे पट्टा निरस्त नहीं हुआ और जमीन संतराम के नाम ही दर्ज रही।
हर स्तर पर की गई लापरवाही
इस जमीन को अपने नाम कराने के लिए संतराम के आश्रितों की ओर से एडीएम न्यायिक की कोर्ट में वाद दाखिल किया गया, जहां से उसे निरस्त कर दिया गया। इस आदेश के विरुद्ध अपर आयुक्त की कोर्ट में वाद दाखिल हुआ। वहां से इस मामले में तहसील से रिपोर्ट मांगी गई तो कानूनगो श्याम सुंदर गुप्ता ने धारा 38 के अंतर्गत बिना लेखपाल की रिपोर्ट की फाइल तहसीलदार को भेज दी।
तहसीलदार ने भी परीक्षण किए बिना उसे अपर आयुक्त को भेज दिया। इसके आधार पर फरवरी 2026 में संतराम के वारिसान के पक्ष में फैसला हो गया। अपर आयुक्त के आदेश की प्रति की फोटो कॉपी के आधार पर ही खतौनी पर जमीन वारिसान के नाम दर्ज कर दी गई।
ऐसे खुला मामला
दो मई को नवाबगंज तहसील में आयोजित समाधान दिवस में ज्योरा मकरंदपुर के प्रधान रवि बाबू, लालाराम और सूरजपाल ने शिकायतीपत्र देकर जिलाधिकारी अविनाश सिंह को प्रकरण से अवगत कराया। डीएम के आदेश पर एसडीएम नवाबगंज उदित पवार ने जांच कराई तो अपर आयुक्त को गलत रिपोर्ट भेजने, अभिलेखों से छेड़छाड़ करने और आदेश की फोटो कॉपी के आधार पर खतौनी में नाम दर्ज करने की पुष्टि हुई। एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने रविवार को तीनों पर कार्रवाई की।