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Bareilly News: बैंकों ने आत्मनिर्भर बनने के लिए दी करोड़ों की रकम, अब नहीं कर रहे वापस
Mon, 03 Nov 2025 01:10 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 03 Nov 2025 01:10 AM IST
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बरेली। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने व उन्हें सूक्ष्म व लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जिले की बैंकों ने करोड़ों रुपये की रकम हजारों लोगों को ऋण के रूप में दी, लेकिन अब बैंकों को अपनी ही रकम वापस लेने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
प्रदेश सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग के लिए को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही है, जिसमें स्वरोजगार के लिए पांच लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक के ऋण बिना किसी गारंटी के दिए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 बैंक ने स्वरोजगार के जो ऋण का वितरण किया था। उसमें से 93,296 हजार लोग 7081.31 करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुका पा रहे हैं। जिसकी वजह बैंक के ऊपर भार पड़ रहा है। जिला उद्योग विभाग के हर वित्तीय वर्ष में अलग-अगल योजनाओं को तहत सैकड़ों फाइलें बैंकों को भेजी जाती है, लेकिन इनमें से अधिकतर फाइल बैंक में किसी न किसी वजह से निरस्त कर दी जाती है। जनवरी से जून तक ही बैंकों ने अनुमानित करीब आठ हजार फाइल निरस्त कर दी। एलडीएम वीके अरोरा का कहना है कि ऋण वसूली के लिए बैंकों को समय समय पर पत्र लिखे जाते है। हर बैंक का प्रयास होता है कि खाता एनपीए की श्रेणी में न किए जाए।
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सरकारी बैंक की ज्यादा फंसी धनराशि
- आंंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंक एमएसएमई का ऋण वसूलने में ढिलाई बरत रही हैं। सरकारी बैंक में करीब 55,478 खाते में करीब 3864.08 करोड़ रुपये की रकम वापस नहीं आई है। वहीं बात अगर प्राइवेट बैंक की करे तो 19,213 खातों में 2984.12 करोड़ रुपये की रकम अटकी है। इसके अलावा अन्य छोटी बैंक व को-ऑपरेटिव बैंकों में भी रकम अटकी है। ऋण वसूली को लेकर बैंकिंग की मासिक बैठक में जिलाधिकारी अनिवाश सिंह जोर दे चुके है।
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प्रदेश सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग के लिए को बढ़ावा देने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही है, जिसमें स्वरोजगार के लिए पांच लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक के ऋण बिना किसी गारंटी के दिए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 बैंक ने स्वरोजगार के जो ऋण का वितरण किया था। उसमें से 93,296 हजार लोग 7081.31 करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुका पा रहे हैं। जिसकी वजह बैंक के ऊपर भार पड़ रहा है। जिला उद्योग विभाग के हर वित्तीय वर्ष में अलग-अगल योजनाओं को तहत सैकड़ों फाइलें बैंकों को भेजी जाती है, लेकिन इनमें से अधिकतर फाइल बैंक में किसी न किसी वजह से निरस्त कर दी जाती है। जनवरी से जून तक ही बैंकों ने अनुमानित करीब आठ हजार फाइल निरस्त कर दी। एलडीएम वीके अरोरा का कहना है कि ऋण वसूली के लिए बैंकों को समय समय पर पत्र लिखे जाते है। हर बैंक का प्रयास होता है कि खाता एनपीए की श्रेणी में न किए जाए।
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सरकारी बैंक की ज्यादा फंसी धनराशि
- आंंकड़ों के मुताबिक सरकारी बैंक एमएसएमई का ऋण वसूलने में ढिलाई बरत रही हैं। सरकारी बैंक में करीब 55,478 खाते में करीब 3864.08 करोड़ रुपये की रकम वापस नहीं आई है। वहीं बात अगर प्राइवेट बैंक की करे तो 19,213 खातों में 2984.12 करोड़ रुपये की रकम अटकी है। इसके अलावा अन्य छोटी बैंक व को-ऑपरेटिव बैंकों में भी रकम अटकी है। ऋण वसूली को लेकर बैंकिंग की मासिक बैठक में जिलाधिकारी अनिवाश सिंह जोर दे चुके है।
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