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Bareilly News: ऑटो एनलाइजर मशीन डिब्बे में, भटक रहे मरीज
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बरेली। 300 बेड अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और रेफर की परेशानी से निजात दिलाने के लिए माह भर पहले मंगाई गई ऑटो एनलाइजर मशीन अब तक डिब्बे से बाहर नहीं आई है। सिर्फ किट आधारित जांच हो रही है। रक्त संबंधी जांचों के लिए मरीजों को जिला अस्पताल तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
300 बेड अस्पताल की लैब में बीते दिनों ऑटो एनालाइजर मशीन स्थापित करने की कवायद शुरू हुई, ताकि मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल तक चक्कर न काटने पड़े। मगर, इंस्टालेशन न होने की वजह से अभी भी मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
लैब टेक्नीशियन का दावा है कि इस मशीन से एलएफटी, केएफटी, बायोकेमिस्ट्री समेत तमाम जांच की रिपोर्ट करीब घंटे भर में मिल जाती है। 50 सैंपल एक बार में लगाए जा सकते हैं। जबकि सीबीसी यानी कंपलीट ब्लड काउंट मशीन की तकनीकी खामी अभी भी दूर नहीं हुई है। ज्यादातर जांच किट से हो रही है।
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प्रभारी सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन के मुताबिक ऑटो एनालाइजर इंस्टॉलेशन के लिए संबंधित कंपनी की तकनीकी टीम जल्द आने की उम्मीद है। बीते सप्ताह अनुस्मारक भी भेज चुके हैं। एक बार में 50 सैंपल की जांच होने से मरीजों को रिपोर्ट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अमर उजाला ब्यूरो
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300 बेड अस्पताल की लैब में बीते दिनों ऑटो एनालाइजर मशीन स्थापित करने की कवायद शुरू हुई, ताकि मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल तक चक्कर न काटने पड़े। मगर, इंस्टालेशन न होने की वजह से अभी भी मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
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लैब टेक्नीशियन का दावा है कि इस मशीन से एलएफटी, केएफटी, बायोकेमिस्ट्री समेत तमाम जांच की रिपोर्ट करीब घंटे भर में मिल जाती है। 50 सैंपल एक बार में लगाए जा सकते हैं। जबकि सीबीसी यानी कंपलीट ब्लड काउंट मशीन की तकनीकी खामी अभी भी दूर नहीं हुई है। ज्यादातर जांच किट से हो रही है।
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प्रभारी सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन के मुताबिक ऑटो एनालाइजर इंस्टॉलेशन के लिए संबंधित कंपनी की तकनीकी टीम जल्द आने की उम्मीद है। बीते सप्ताह अनुस्मारक भी भेज चुके हैं। एक बार में 50 सैंपल की जांच होने से मरीजों को रिपोर्ट के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अमर उजाला ब्यूरो