UP: जेई ने पूछा- 25 हजार बोल दूं सर, एसडीओ बोले- पुलिसवाले हैं...ज्यादा नहीं; घूस लेते दो आरोपी गिरफ्तार
बरेली में सुभाषनगर बिजली उपकेंद्र में तैनात जेई सूरजलाल गुप्ता और संविदाकर्मी को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इस मामले से संबंधित एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। यह रिकॉर्डिंग जेई और एसडीओ की बातचीत की है। इस मामले में एसडीओ पर भी गाज गिर सकती है।
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बरेली में 26 जनवरी को 12:55 बजे जेई सूरजलाल गुप्ता और एसडीओ रातजगत वर्मा के बीच 59 सेकेंड की बातचीत की रिकॉर्डिंग वायरल हो रही है। इसमें रुपयों को लेकर बात हो रही है। जेई पूछते हैं- 25 हजार बोल दूं सर? इस पर एसडीओ कहते हैं-: पुलिस वाले हैं। ज्यादा नहीं, जो इजिली पॉसिबल (आसानी से संभव) हो।
यह रिकॉर्डिंग बयां कर रही है कि बिजली निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। इस कॉल के ठीक 37 मिनट बाद पांच हजार की रिश्वत लेते जेई सूरजलाल गुप्ता व संविदाकर्मी नरेंद्र सिंह रावत को गिरफ्तार कर लिया गया था। जांच टीम को यह रिकॉर्डिंग जेई के फोन से मिली है। लेनदेन के खेल की जानकारी होने के बाद एसडीओ ने उसे रोका नहीं, बल्कि खुद भी इसमें शामिल हो गए।
एसडीओ पर आईपीसी की धारा 120 बी यानी साजिश रचने का आरोप है। उन्हें सह अभियुक्त के तौर पर नामजद किया गया है। मुख्य अभियंता रणविजय सिंह ने बताया कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल होगा। प्रबंध निदेशक को रिपोर्ट भेजी गई है। एसडीओ का सोमवार शाम तक निलंबन हो जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जांच के लिए शिकायत करते हैं इंतजार, कैसे खुलेगा भ्रष्टाचार
अधिशासी अभियंता अमित आनंद ने बताया कि भ्रष्टाचार से जुड़े दूसरे मामलों में अगर शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी। अभी तक उन्होंने अपने स्तर से कोई जांच शुरू नहीं कराई है। अगर विभागीय अधिकारी ऐसे ही शिकायत का इंतजार करते रहेंगे तो भ्रष्टाचार के मामले कैसे खुलेंगे?
ये था मामला
सुभाषनगर थाना क्षेत्र के नवजीवन अपार्टमेंट निवासी परमीत कुमार, बदायूं रोड पर मकान बनवा रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी से सहमति के आधार पर बिजली ली थी, लेकिन जेई और कुली ने वीडियो बनाकर उनके खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी और 25 हजार रुपये मांगे। दोनों ने बार-बार दबाव बनाया गया तो परमीत ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के डिप्टी एसपी को अवगत कराया और उधर, पांच हजार रुपये में मामला तय किया।
26 जनवरी को जैसे ही पांच हजार रुपये दिए गए, टीम ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। बारीकी से जांच हुई तो कई और मामले भी खुल सकते हैं। एसीओ इश्तियाक अहमद ने एफआईआर में भी स्पष्ट लिखा है कि रिश्वत के बिना जेई कोई काम नहीं करता था। संविदाकर्मी इसमें सहयोगी हैं।