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Bareilly News: कागजों पर इंतजाम... हादसे बयां कर रहे खुले नालों की हकीकत

Sat, 26 Jul 2025 02:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 02:25 AM IST
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Arrangements on paper... Accidents tell the reality of open drains
बरेली। खुले नालों में गिरकर लोगों की जान जाने के बाद भी जिम्मेदार नहीं चेत रहे। शहर के संजय नगर में दो जून को नौ वर्षीय विराट यादव की नाले में गिरने से मौत और लखनऊ में 12 जुलाई को पेंटर सुरेश लोधी के नाले में बहने के बाद शासन ने सख्ती की। इसके बाद नगर निगम के अभियंताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में नालों का निरीक्षण किया। कुछ जगह काम भी कराए गए। इसके बाद भी ज्यादातर जगहों पर खतरा बरकरार है। स्थिति यह है कि हादसे वाली कई जगहों पर न तो बैरिकेडिंग की गई है, न ही हादसे रोकने के लिए नाले को ढंकने सहित अन्य इंतजाम। इस लापरवाही के चलते यहां कभी भी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। शुक्रवार को अमर उजाला की पड़ताल में कई ऐसे स्थान दिखे जहां कभी भी हादसा हो सकता है। पेश है एक रिपोर्ट...
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नाले की रिटेनिंग वॉल गायब
सुभाषनगर पुलिया से जंक्शन की ओर जाने के दौरान सड़क के किनारे नाला है। नाले में एक हिस्से की रिटेनिंग वॉल गायब है। मार्ग पर 24 घंटे में 20 हजार से अधिक वाहनों और हजारों लोगों का आवागमन होता है। जलभराव के दौरान नाले में लोगों के गिरने की आशंका बनी हुई है। आसपास के लोगों ने बताया कि कई बार वाहन सवार यहां गिरते-गिरते बचे।
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मांग के बाद भी नहीं कराया काम
खन्ना बिल्डिंग के पीछे से राजीव कॉलोनी और रत्नाकर मंदिर वाले रास्ते से होते हुए रेलवे लाइन तक गए करीब दो किलोमीटर लंबे नाले के दोनों तरफ लोग रहते हैं। नाले की सुरक्षा दीवार कई जगह क्षतिग्रस्त है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार मांग के बाद भी यहां सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराए गए।
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सफाई के लिए स्लैब हटाने के बाद फिर नहीं लगाए
प्रभा सिनेमाघर के निकट बाटा शोरूम के बाहर एक महीने पहले नाले पर डाले गए स्लैब को साफ-सफाई के लिए हटाया गया था। इन्हें अब तक दोबारा से नहीं लगाया गया है। यही स्थिति इंडियन ऑयल पेट्रोल के पास है। ब्यूरो
लोगों की बात
राजीव कॉलोनी और रत्नाकर मंदिर वाले रास्ते पर बारिश के दौरान जलभराव होता है तो सड़क और नाला अलग-अलग नजर नहीं आते। मेरे पिता भी नाले में गिर चुके हैं। - आशा, रत्नाकर मंदिर के समीप
सुभाषनगर में खुले नाले आबादी के लिए खतरा हैं। इन्हें सुरक्षित करने की आवश्यकता है, मगर जिम्मेदार ध्यान ही नहीं देते। - राजेश पांडेय, सुभाषनगर
पार्षदों की बात
मेरे वार्ड में 3.64 करोड़ रुपये की लागत से नालों को कवर्ड करने का प्रस्ताव बना था, लेकिन अमल नहीं हुआ। खुले नाले के दोनों ओर पांच सौ से अधिक परिवार बसे हैं। आए दिन कोई न कोई बच्चा गिरता है। - शालिनी वर्मा, पार्षद, सुभाषनगर
खुले नाले की समस्या वार्ड में बहुत पुरानी है। मैंने अपने वार्ड की वाल्मीकि बस्ती में 84 मीटर हिस्से में विधायक निधि से जाल लगवाने के लिए पैरवी की है। काम होना है।- बृजेश कुमार पाल, पार्षद, छोटी विहार


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आबादी के बीच खुले नालों को ढंकने या बैरिकेडिंग कराने के निर्देश जारी किए गए थे। अधिकतर काम हो चुका है लेकिन अगर कोई नाला छूट गया है तो वहां भी काम कराएंगे। सभी अवर अभियंताओं से यह प्रमाणपत्र भी लिया जाएगा कि उनके क्षेत्र में खतरे के अंदेशे वाले नालों पर बचाव के जरूरी उपाय सुनिश्चित किए जा चुके हैं। - मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता, नगर निगम
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