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यहां भी कमाल... सर्वे के बाद किट भी बंट गई पर गांव वालों को खबर ही नहीं
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : demo photo
कोरोना से सात जान गंवा चुके नवाबगंज के गांव हरदुआ किफायतुल्ला में सरकारी मजाक
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ग्रामीण बोले- हर घर में खांसी-बुखार के मरीज फिर भी स्वास्थ्य विभाग से कोई नहीं आया
नवाबगंज। तहसील मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर गांव हरदुआ किफायतुल्ला कोरोना से सात लोगों की जान गंवा चुका है। अब भी यहां लगभग हर घर में बुखार और खांसी के मरीज हैं। स्वास्थ्य विभाग का रिकॉर्ड बता रहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप गांव में सर्वे करने के बाद हर संदिग्ध संक्रमित को कोरोना किट बांटी जा चुकी है लेकिन गांव के लोग स्वास्थ्य विभाग के इस दावे पर हैरत में हैं। वे इसे सफेद झूठ करार देते हुए कहते हैं कि अब तक गांव में न कोई टीम सर्वे करने आई है और न किसी को कोरोना किट दी गई है।
हरदुआ किफायतुल्ला की आबादी करीब छह हजार है। बड़ी आबादी होने के कारण गांव में एक स्वास्थ्य उप केंद्र और एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के साथ तीन आंगनबाड़ी केंद्र भी हैं। इन केंद्रों पर दो एएनएम, चार आशा बहू और एक सुपरवाइजर तैनात है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक-एक सहायिका और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की तैनाती है लेकिन इस सबके बावजूद गांव के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कोरोना के दौर में उनकी दिक्कतें और ज्यादा बढ़ गई हैं। सात लोगों की मौत के बाद बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों वाले कई लोग झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं तो कई नवाबगंज और बरेली जाकर निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
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एक तरफ लगातार मौतें दूसरी तरफ लापरवाही
गांव में कोरोना संक्रमण फैलने के पीछे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता की कमी भी है। संक्रमण से सात लोगों की मौत होने के बाद गांववाले खौफ में तो हैं लेकिन मास्क और कोविड नियमों का पालन अब भी नहीं कर रहे। न कोई उन्हें यह समझाने वाला है कि उनकी यह लापरवाही उनके साथ उनके परिवार के लिए भी घातक सिद्ध हो सकती है। कुछ पढ़े-लिखे युवा जरूर लोगों को एहतियात बरतने के लिए कह रहे हैं।
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महीने में सिर्फ एक-दो बार आते हैं स्वास्थ्य कर्मी
गांववालों के मुताबिक गांव में दो-दो अस्पताल होने के बावजूद एएनएम कभी पंचायत घर तो कभी किसी के घर बैठकर मरीजों को देखती हैं, वह भी महीने में एक या दो बार। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर डॉक्टर तो आते है लेकिन उनका कोई समय निर्धारित नहीं है। कब आएं और कब चले जाएं, किसी को पता नहीं रहता।
चौंके... कब हुआ सर्वे
गांव में कोरोना का सर्वे कब हुआ, हमें तो कोई जानकारी नहीं है। कुछ लोगों की मौतें सांस लेने में दिक्कत, बुखार और खांसी से हुई है। गांव में सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया है और न कोरोना किट बांटी गई है। अब भी गांव में बहुत से लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। - दामोदर दास, ग्रामीण
मैं खुद बुखार और बदन दर्द से पीड़ित हूं। स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम गांव में सर्वे करने नहीं आई है और न कोई दवा बांटी गई है। कोरोना महामारी से पूरा देश लड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों को कम से कम गांवों में सैनिटाइजेशन करने के बारे में तो सोचना चाहिए। - सूरजपाल, ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग की टीम के सर्वे में कोरोना संदिग्ध मिले 62 लोगों को किट बांटी गई है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आशा बहुओं ने कोरोना किट दी हैं। यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. अजमेर सिंह, सीएचसी अधीक्षक नवाबगंज
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ग्रामीण बोले- हर घर में खांसी-बुखार के मरीज फिर भी स्वास्थ्य विभाग से कोई नहीं आया नवाबगंज। तहसील मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर गांव हरदुआ किफायतुल्ला कोरोना से सात लोगों की जान गंवा चुका है। अब भी यहां लगभग हर घर में बुखार और खांसी के मरीज हैं। स्वास्थ्य विभाग का रिकॉर्ड बता रहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप गांव में सर्वे करने के बाद हर संदिग्ध संक्रमित को कोरोना किट बांटी जा चुकी है लेकिन गांव के लोग स्वास्थ्य विभाग के इस दावे पर हैरत में हैं। वे इसे सफेद झूठ करार देते हुए कहते हैं कि अब तक गांव में न कोई टीम सर्वे करने आई है और न किसी को कोरोना किट दी गई है।
हरदुआ किफायतुल्ला की आबादी करीब छह हजार है। बड़ी आबादी होने के कारण गांव में एक स्वास्थ्य उप केंद्र और एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के साथ तीन आंगनबाड़ी केंद्र भी हैं। इन केंद्रों पर दो एएनएम, चार आशा बहू और एक सुपरवाइजर तैनात है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक-एक सहायिका और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की तैनाती है लेकिन इस सबके बावजूद गांव के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कोरोना के दौर में उनकी दिक्कतें और ज्यादा बढ़ गई हैं। सात लोगों की मौत के बाद बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों वाले कई लोग झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं तो कई नवाबगंज और बरेली जाकर निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
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एक तरफ लगातार मौतें दूसरी तरफ लापरवाही
गांव में कोरोना संक्रमण फैलने के पीछे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता की कमी भी है। संक्रमण से सात लोगों की मौत होने के बाद गांववाले खौफ में तो हैं लेकिन मास्क और कोविड नियमों का पालन अब भी नहीं कर रहे। न कोई उन्हें यह समझाने वाला है कि उनकी यह लापरवाही उनके साथ उनके परिवार के लिए भी घातक सिद्ध हो सकती है। कुछ पढ़े-लिखे युवा जरूर लोगों को एहतियात बरतने के लिए कह रहे हैं।
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महीने में सिर्फ एक-दो बार आते हैं स्वास्थ्य कर्मी
गांववालों के मुताबिक गांव में दो-दो अस्पताल होने के बावजूद एएनएम कभी पंचायत घर तो कभी किसी के घर बैठकर मरीजों को देखती हैं, वह भी महीने में एक या दो बार। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर डॉक्टर तो आते है लेकिन उनका कोई समय निर्धारित नहीं है। कब आएं और कब चले जाएं, किसी को पता नहीं रहता।चौंके... कब हुआ सर्वे
गांव में कोरोना का सर्वे कब हुआ, हमें तो कोई जानकारी नहीं है। कुछ लोगों की मौतें सांस लेने में दिक्कत, बुखार और खांसी से हुई है। गांव में सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया है और न कोरोना किट बांटी गई है। अब भी गांव में बहुत से लोग खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। - दामोदर दास, ग्रामीणमैं खुद बुखार और बदन दर्द से पीड़ित हूं। स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम गांव में सर्वे करने नहीं आई है और न कोई दवा बांटी गई है। कोरोना महामारी से पूरा देश लड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों को कम से कम गांवों में सैनिटाइजेशन करने के बारे में तो सोचना चाहिए। - सूरजपाल, ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग की टीम के सर्वे में कोरोना संदिग्ध मिले 62 लोगों को किट बांटी गई है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आशा बहुओं ने कोरोना किट दी हैं। यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. अजमेर सिंह, सीएचसी अधीक्षक नवाबगंज