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आभार बरेली: गलियों से निकल चौड़ी सड़कों पर रफ्तार भरता शहर, इस बदलाव का साक्षी बना 'अमर उजाला'
Tue, 17 Jan 2023 06:19 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 17 Jan 2023 06:19 PM IST
सार
अमर उजाला का बरेली में शुरू हुआ सफर 55वें साल में प्रवेश कर गया है। हर बीतते साल के साथ यह रिश्ता और मजबूत हुआ है। शहर की हर चुनौती और उपलब्धि के जहां हम साक्षी बने, वहीं ज्वलंत मुद्दों को उठाकर शहर के विकास में योगदान दिया। यह सफर आगे भी यूं ही जारी रहेगा। 54वीं वर्षगांठ के अवसर पर आपके लिए यह विशेष प्रस्तुति...
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स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई लाइटों से जगमगाता स्टेडियम रोड
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जरी जरदोजी और बांस बेंत के फर्नीचर से पहचाने जाने वाले शहर बरेली में पॉश कॉलोनियां, अपार्टमेंट का तेजी से विकास हो रहा है। बढ़ती जा रही जनसंख्या के साथ शहर का दायरा भी बढ़ा। सभी को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नगर निगम और बरेली विकास प्राधिकरण का सीमा क्षेत्र बढ़ा। फ्लाईओवर, अंडरपास, ओवरब्रिज और मॉडल रोड अब शहर की पहचान बन रहे हैं।
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बरेली नगर निगम बनने के बाद शहर में विकासपरक योजनाएं तेजी से लागू की गईं। साल 1975 में आवास विकास और 1977 में अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट के तहत बरेली विकास प्राधिकरण की स्थापना हुई। इसके बाद बरेली में विकास का सिलसिला तेज हुआ। आवास विकास ने साल 1977 में जनकपुरी, 1981 में राजेंद्र नगर, 1982 में सिविल लाइंस, 1983 में गांधीनगर में पॉश कॉलोनी बसी। बीडीए ने करगैना, सुभाषनगर, प्रेमनगर में कॉलोनी विकसित की। साल 2000 में रामगंगा आवासीय योजना का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लॉन्च हुआ। कॉलोनियों के आने से लोगों को खूबसूरत आशियाना की चाहत पूरी हुई।
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वर्तमान में शहर के पीलीभीत बाईपास, शाजहांपुर रोड, मिनी बाईपास, दिल्ली हाइवे, बदायूं रोड सुभाषनगर की ओर पॉश कॉलोनियों तेजी से विकसित हुईं। कई नई कॉलोनियों के विकास के लिए प्रोजेक्ट बीडीए के पास लंबित है। रामगंगा आवासीय कॉलोनी का विकास भी तेजी से हो रहा है। आने वाले दिनों में नया शहर के तौर पर इस कॉलोनी के विकास की पहचान होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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स्मार्ट सिटी से बरेली में बढ़ रही सुविधाएं
स्मार्ट सिटी परियोजना के चौथे चरण में 19 जनवरी 2018 को बरेली का चुनाव हुआ। अब तक स्मार्ट सिटी के 63 प्रोजेक्ट में से 41 के कार्य पूरे हो चुके हैं। सरकार से विकास कार्य के लिए प्राप्त एक हजार करोड़ में से 686.82 करोड़ का बजट खर्च हुआ है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से शहर के 145 स्थानों पर नौ सौ सीसी कैमरे लगे हैं।बरेली हाट, मल्टीलेवल पार्किंग, एसडब्ल्यूएम कार्यशाला, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, स्काई वॉक, मेजर रोड फेज-1, मेजर रोड फेज-2, इंक्यूबेशन सेंटर एंड ऑडिटोरियम आदि निर्माण कार्य चल रहे हैं। सड़कों को मॉडल रोड की तर्ज पर सौंदर्यीकरण हो रहा है। भूमिगत बिजली लाइन समेत शहर की धरोहर को संजोने और कॉलोनियों में सुविधाएं मुहैया कराने के कार्य हो रहे हैं।
ड्रेनेज सिस्टम, अवैध कब्जे बरेली की बड़ी चुनौती
गली मोहल्लों तक सड़क, नाली बन रही है। फिर भी बारिश में कई इलाकों में जलभराव की समस्या है। सड़कें टूट जाती हैं। घरों के अंदर तक पानी घुस जाता है और लाखों रुपये का नुकसान होता है। यहां डामर के बजाय सीसी रोड बनाना ज्यादा बेहतर है। विशेषज्ञ टीम से सर्वेक्षण के बाद शहर के ड्रेनेज को मैनेज करने और अगले 30 वर्ष में आबादी और क्षेत्रफल विस्तार का अनुमान लगाते हए सिस्टम विकसित करने की जरूरत है।नगर निगम के सेवानिवृत्त अधिशासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि अभियंता विभागों में आपसी समन्वय के अभाव से जनता पीड़ित होती है। बिना प्लानिंग के काम हो रहा है। शहर के कई हिस्सों में जाम, कामर्शियल कांप्लेक्सों में पार्किंग न होने और चौड़ी हुई सड़कों के दोनों किनारों पर अवैध कब्जे, ई-रिक्शा के मार्ग तय न होना और जरूरत से कई गुना ज्यादा ई-रिक्शा संचालित होने से दिक्कत होती है।