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आला हजरत गेट समेत 150 गेटों का निर्माण रुका
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Tue, 28 Jun 2016 01:04 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में निर्णय दिया था कि राज्य सरकार या उससे जुड़ी एजेंसियां सार्वजनिक तौर पर ऐसे गेट या अन्य निर्माण न कराएं जिससे जनता को परेशानी हो। इसी निर्णय का हवाला देकर हिंदू संगठनों ने जसोली में बन रहे आला हजरत गेट का निर्माण रोकने की मांग उठाई थी। अब नगर निगम ने इस पर विधिक राय मांगी है और तबतक के लिए बोर्ड से मंजूर सभी 150 गेटों के निर्माण पर रोक लगा दी है। तबतक बोर्ड में भी गेट निर्माण का प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा।
अक्षय भानु कटिहा निवासी गुलाबनगर ने महापौर डा. आईएस तोमर और नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की कापी दी है। इसमें बताया गया कि उच्चतम न्यायालय ने स्पेशल लीव टू अपील नंबर 8519/2006 में कहा कि राज्य सरकार किसी भी ऐसे गेट के निर्माण की स्वीकृति नहीं दे सकती जिसमें सरकार का पैसा खर्च हो रहा हो और जनता को परेशानी होती हो। इसी निर्णय पर कटिहा ने कहा है कि आला हजरत गेट के निर्माण पर जो भी बजट खर्च हो रहा है, वह आम जनता का पैसा है न कि किसी प्राइवेट एजेंसी का। अगर किसी को परेशानी हो रही थी तो ऐसे प्रस्ताव बोर्ड में नहीं आने चाहिए थे।
बता दें कि नगर निगम बोर्ड की मीटिंगों में बड़ी संख्या में पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में अपने धर्म या सजातीय महापुरुषों के नाम पर गेटों के निर्माण के प्रस्ताव स्वीकृत करा रखे हैं। इनमें अधिकांश निर्माण बजट उपलब्ध न होने के चलते लंबे समय से लटके हैं। जनवरी 2016 को बोर्ड की मीटिंग में वार्ड 69 घेर शेख मिट्ठू के पार्षद रूबी सलीम के प्रस्ताव पर जसोली में आला हजरत के नाम पर गेट का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। इसके टेंडर हो गए और निर्माण भी होने लगा। भाजपा, शिवसेना समेत हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते प्रशासन ने दोनों पक्षों की मीटिंग बुलाकर पंचायत कराने की कोशिश भी की। कोई फैसला न हो पाने पर गेट का निर्माण रोक दिया गया था। अब नगर निगम बोर्ड से स्वीकृत डेढ़ सौ से ज्यादा गेटों का निर्माण भी ठंडे बस्ते में चला गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर विधिक राय आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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‘आला हजरत गेट का निर्माण प्रशासन ने रोक रखा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को समझने के लिए विधिक राय मांगी गई है। तब तक किसी भी गेट का निर्माण नहीं होगा। भविष्य में गेट निर्माण के प्रस्ताव बोर्ड में भी नहीं लाया जाएगा।’ शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
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अक्षय भानु कटिहा निवासी गुलाबनगर ने महापौर डा. आईएस तोमर और नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की कापी दी है। इसमें बताया गया कि उच्चतम न्यायालय ने स्पेशल लीव टू अपील नंबर 8519/2006 में कहा कि राज्य सरकार किसी भी ऐसे गेट के निर्माण की स्वीकृति नहीं दे सकती जिसमें सरकार का पैसा खर्च हो रहा हो और जनता को परेशानी होती हो। इसी निर्णय पर कटिहा ने कहा है कि आला हजरत गेट के निर्माण पर जो भी बजट खर्च हो रहा है, वह आम जनता का पैसा है न कि किसी प्राइवेट एजेंसी का। अगर किसी को परेशानी हो रही थी तो ऐसे प्रस्ताव बोर्ड में नहीं आने चाहिए थे।
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बता दें कि नगर निगम बोर्ड की मीटिंगों में बड़ी संख्या में पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में अपने धर्म या सजातीय महापुरुषों के नाम पर गेटों के निर्माण के प्रस्ताव स्वीकृत करा रखे हैं। इनमें अधिकांश निर्माण बजट उपलब्ध न होने के चलते लंबे समय से लटके हैं। जनवरी 2016 को बोर्ड की मीटिंग में वार्ड 69 घेर शेख मिट्ठू के पार्षद रूबी सलीम के प्रस्ताव पर जसोली में आला हजरत के नाम पर गेट का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। इसके टेंडर हो गए और निर्माण भी होने लगा। भाजपा, शिवसेना समेत हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते प्रशासन ने दोनों पक्षों की मीटिंग बुलाकर पंचायत कराने की कोशिश भी की। कोई फैसला न हो पाने पर गेट का निर्माण रोक दिया गया था। अब नगर निगम बोर्ड से स्वीकृत डेढ़ सौ से ज्यादा गेटों का निर्माण भी ठंडे बस्ते में चला गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर विधिक राय आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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‘आला हजरत गेट का निर्माण प्रशासन ने रोक रखा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को समझने के लिए विधिक राय मांगी गई है। तब तक किसी भी गेट का निर्माण नहीं होगा। भविष्य में गेट निर्माण के प्रस्ताव बोर्ड में भी नहीं लाया जाएगा।’ शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त