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बरेलवियत सुन्नियों की ठेकेदार नहीं, इनका काम तो सिर्फ फतवे लगाना: खादिम सैयद सरवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 08 Nov 2018 11:52 PM IST
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तमाम दलीलों और सफाई के बावजूद सौ साला उर्स-ए-रजवी के मंच से बरेलवियों को दरगाह अजमेर शरीफ न जाने की हिदायत दिए जाने का मामला तूल पकड़ गया है।
इस मामले में दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन खादिम सैयद सरवर चिश्ती ने कड़ा जवाबी हमला बोलते हुए कहा है कि बरेलवियत सुन्नियों की ठेकेदार नहीं है। उनका काम सिर्फ फतवे लगाना है।
उनकी तालीमात भी सूफिज्म पर आधारित नहीं है, क्योंकि सूफिज्म का काम है लोगों को ईमान की दावत देना और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखना। गरीब नवाज की चौखट इसकी मिसाल है।
उर्स-ए-रजवी के कुल के मौके पर खानकाह-ए-बरकातिया मारहरा शरीफ के सज्जादानशीन अल्लामा सैय्यद अमीन मियां ने ख्वाजा गरीब नवाज हजरत मोईन उद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर शरीफ के खादिमों पर आला हजरत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए मुसलमानों को दरगाह अजमेर शरीफ न जाने की हिदायत दी थी।
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उनका यह बयान अखबारों की सुर्खियां बना तो अगले ही दिन उन्होंने सफाई पेश की और इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने मुसलमानों को अजमेर शरीफ न जाने जैसी कोई हिदायत दी है।
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इस मामले में दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन खादिम सैयद सरवर चिश्ती ने कड़ा जवाबी हमला बोलते हुए कहा है कि बरेलवियत सुन्नियों की ठेकेदार नहीं है। उनका काम सिर्फ फतवे लगाना है।
उनकी तालीमात भी सूफिज्म पर आधारित नहीं है, क्योंकि सूफिज्म का काम है लोगों को ईमान की दावत देना और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखना। गरीब नवाज की चौखट इसकी मिसाल है।
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उर्स-ए-रजवी के कुल के मौके पर खानकाह-ए-बरकातिया मारहरा शरीफ के सज्जादानशीन अल्लामा सैय्यद अमीन मियां ने ख्वाजा गरीब नवाज हजरत मोईन उद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर शरीफ के खादिमों पर आला हजरत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए मुसलमानों को दरगाह अजमेर शरीफ न जाने की हिदायत दी थी।
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उनका यह बयान अखबारों की सुर्खियां बना तो अगले ही दिन उन्होंने सफाई पेश की और इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने मुसलमानों को अजमेर शरीफ न जाने जैसी कोई हिदायत दी है।
इस बीच दरगाह आला हजरत के सरपरस्त मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां ने भी ख्वाजा गरीब नवाज को सभी की आस्था का केंद्र बताते हुए मुसलमानों को वहां न जाने की हिदायत देने जैसी बात से जरा भी इत्तफाक होने से साफ इंकार कर दिया था।
बृहस्पतिवार को दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन खादिम सैयद सरवर चिश्ती ने फोन पर बात करते हुए इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
खास तौर पर उर्स-ए-रजवी के मंच से उन्हें राबजी कहे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अहले बैत की मोहब्बत रजवियत है तो ‘मैं सबसे बड़ा राबजी हूं’।
उन्होंने कहा कि बरेलवी कादरियत की नुमाइंदगी नहीं कर रहे हैं क्योंकि कादरी और चिश्ती तो गौस पाक का सिलसिला है। बरेलवी रजवियत के प्रचारक हैं, जिनका झंडा इस वक्त मुआविया और आले मुआविया है।
बृहस्पतिवार को दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन खादिम सैयद सरवर चिश्ती ने फोन पर बात करते हुए इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
खास तौर पर उर्स-ए-रजवी के मंच से उन्हें राबजी कहे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अहले बैत की मोहब्बत रजवियत है तो ‘मैं सबसे बड़ा राबजी हूं’।
उन्होंने कहा कि बरेलवी कादरियत की नुमाइंदगी नहीं कर रहे हैं क्योंकि कादरी और चिश्ती तो गौस पाक का सिलसिला है। बरेलवी रजवियत के प्रचारक हैं, जिनका झंडा इस वक्त मुआविया और आले मुआविया है।
हमने मुआविया को न कल माना था न आज मानते हैं और न कयामत तक मानेंगे। उन्होंने कहा कि तमाम खानकाहें हैं जो बरेलवियत के खिलाफ हैं।
सैयद सरवर चिश्ती ने यह भी कहा कि कोई किसी भी सलासे (सिलसिले) से ताल्लुक रखता हो, सबका शिजरा हजरत अली से मिलता है। कादरी और चिश्ती में लड़ाई का सवाल ही नहीं होता क्योंकि कादरी और चिश्ती मशरबन भाई हैं।
जो कादरी और चिश्ती सैयदजादे हैं वह नसलन भाई हैं, और दोनों अलीजादे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जितनी खानकाहें और दरगाहें हैं, इक्का-दुक्का को छोड़कर उनमें भी आपसी झगड़े हैं। सैयद सरवर चिश्ती ने बताया कि इस मसले पर अजमेर शरीफ की दरगाह में खादिमों की बैठक भी हुई है, जिसमें तमाम एतराज उठाए गए हैं।
सैयद सरवर चिश्ती ने यह भी कहा कि कोई किसी भी सलासे (सिलसिले) से ताल्लुक रखता हो, सबका शिजरा हजरत अली से मिलता है। कादरी और चिश्ती में लड़ाई का सवाल ही नहीं होता क्योंकि कादरी और चिश्ती मशरबन भाई हैं।
जो कादरी और चिश्ती सैयदजादे हैं वह नसलन भाई हैं, और दोनों अलीजादे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जितनी खानकाहें और दरगाहें हैं, इक्का-दुक्का को छोड़कर उनमें भी आपसी झगड़े हैं। सैयद सरवर चिश्ती ने बताया कि इस मसले पर अजमेर शरीफ की दरगाह में खादिमों की बैठक भी हुई है, जिसमें तमाम एतराज उठाए गए हैं।