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शादी के नाम पर उम्रदराज लोगों को बनाते थे शिकार
सार
मैरिज ब्यूरो के फर्जी कॉल सेंटर से ठगी का मामला
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डीडीपुरम की इसी कोठी में चलता था ठगी की धंधा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विस्तार
लोग हजारों गंवाकर भी नहीं पाते थे दुल्हन, जगहंसाई होने के डर से नहीं करते थे शिकायत
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बरेली। पंजीकृत मैरिज ब्यूरो की वेबसाइट के कॉल सेंटर से उम्रदराज, तलाकशुदा और विदुर महिलाओं-पुरुषों से लंबे समय से ठगी की जा रही थी। हजारों रुपये लुटाने के बाद ठगी का अहसास होने पर भी लोग जगहंसाई होने के डर से शिकायत नहीं करते थे। बदायूं के शख्स ने हिम्मत करके शिकायत की तो धंधे का भंडाफोड़ हो गया। इसके बाद कई और पीड़ितों ने पुलिस को अपना दर्द बताया।
दातागंज के नेत्रपाल की वजह से तीन साल से चल रहे ठगी के धंधे का खुलासा हो सका। शहर की लड़कियां पकड़े जाने के बाद खुद को निर्दोष कहकर छोड़ने की गुहार लगाती रहीं तो पुलिस को ठग भी देर तक वेबसाइट के कागजात और रजिस्ट्रेशन दिखाकर सब कुछ ठीक होने का दावा करता रहा। जब ठगे गए लोगों के नाम-पते सामने लाए गए तो उसने सच स्वीकार कर लिया। सीओ थ्री श्वेता यादव, सीओ प्रथम दिलीप सिंह ने आरोपी से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली बातें पता लगीं। ऑनलाइन मैच प्वाइंट के नाम से वेबसाइट का पंजीकरण बिल्कुल सही निकला। हालांकि इसके नियम कायदों का कॉल सेंटर पर पालन नहीं हो रहा था। वेबसाइट की ओर से निशुल्क पंजीकरण की सुविधा थी पर ये लोग कस्टमर से अपने खातों में रकम डलवा रहे थे।
लोगों से पहले पंजीकरण के नाम पर और फिर लड़की से मिलवाने, शादी तय कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। कई मामलों में यह वसूली साढ़े सात हजार तक सीमित रही, तो कई में 70 हजार तक पहुंच गई। सूत्रों के मुताबिक शादी के लिए ये लोग 40 साल से ज्यादा उम्र वाले ऐसे लोगों को फंसाते थे, जिनका तलाक हो गया हो या फिर जिनकी पत्नी की मृत्यु हो गई हो। पंजीकरण के बाद इन्हीं लड़कियों में से कुछ संबंधित महिला बनकर होटल में परिवारों से मिलने के नाम पर रुपये लेती थीं। पुलिस ने विवाह के लिए पूर्व पंजीकृत लोगों से बात की तो पता लगा कि आज तक किसी की विवाह के लिए बातचीत नहीं कराई गई। तगड़ा नुकसान होने के बाद जब पीड़ित बार-बार सेंटर के नंबर पर कॉल करता था तो उसे ऑफ कर दिया जाता था। ऐसे लोग कभी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। कई ने तो अपने परिवारों से भी धोखाधड़ी की बात छिपाई।
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दातागंज के नेत्रपाल की वजह से तीन साल से चल रहे ठगी के धंधे का खुलासा हो सका। शहर की लड़कियां पकड़े जाने के बाद खुद को निर्दोष कहकर छोड़ने की गुहार लगाती रहीं तो पुलिस को ठग भी देर तक वेबसाइट के कागजात और रजिस्ट्रेशन दिखाकर सब कुछ ठीक होने का दावा करता रहा। जब ठगे गए लोगों के नाम-पते सामने लाए गए तो उसने सच स्वीकार कर लिया। सीओ थ्री श्वेता यादव, सीओ प्रथम दिलीप सिंह ने आरोपी से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली बातें पता लगीं। ऑनलाइन मैच प्वाइंट के नाम से वेबसाइट का पंजीकरण बिल्कुल सही निकला। हालांकि इसके नियम कायदों का कॉल सेंटर पर पालन नहीं हो रहा था। वेबसाइट की ओर से निशुल्क पंजीकरण की सुविधा थी पर ये लोग कस्टमर से अपने खातों में रकम डलवा रहे थे।
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लोगों से पहले पंजीकरण के नाम पर और फिर लड़की से मिलवाने, शादी तय कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। कई मामलों में यह वसूली साढ़े सात हजार तक सीमित रही, तो कई में 70 हजार तक पहुंच गई। सूत्रों के मुताबिक शादी के लिए ये लोग 40 साल से ज्यादा उम्र वाले ऐसे लोगों को फंसाते थे, जिनका तलाक हो गया हो या फिर जिनकी पत्नी की मृत्यु हो गई हो। पंजीकरण के बाद इन्हीं लड़कियों में से कुछ संबंधित महिला बनकर होटल में परिवारों से मिलने के नाम पर रुपये लेती थीं। पुलिस ने विवाह के लिए पूर्व पंजीकृत लोगों से बात की तो पता लगा कि आज तक किसी की विवाह के लिए बातचीत नहीं कराई गई। तगड़ा नुकसान होने के बाद जब पीड़ित बार-बार सेंटर के नंबर पर कॉल करता था तो उसे ऑफ कर दिया जाता था। ऐसे लोग कभी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। कई ने तो अपने परिवारों से भी धोखाधड़ी की बात छिपाई।
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