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आतंकी हमले के बाद सेना और वायु सेना क्षेत्र में बढ़ी सतर्कता
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 19 Sep 2016 01:48 AM IST
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सुरक्षा बेहतर की गई
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कश्मीर के उरी इलाके में सेना के बेस कैंप पर हुए हमले के बाद यहां के सेना क्षेत्र और त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। चेकिंग के लिए तैनात क्यूआरटी टीमें दो गुनी कर दी हैं। सेना के आसपास के मार्गों पर निकलने वाले वाहनों पर नजर हैं, पैदल तथा बाइक से जाने वालों की आईडी परिचयपत्र चेक किए जा रहे हैं।
सेना ने लाल फाटक चनेटी, ठिरिया निवाजत खां, बीयावानी कोठी के सामने। टेलीफोन एक्सचेंज रोड, बदायूं रोड, स्टेशन रोड, शाहजहांपुर रोड आदि रास्तोें पर सेना की सक्रियता बढ़ गई है। इन रास्तों से गुजरने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है। खुफिया संगठन को सक्रिय कर दिया है। त्रिशूल एयरबेस बाउंड्रीवाल के आसपास दिन और रात में गश्त बढ़ा दी है। इसके लिए पुलिस की मदद ली जा रही है। कंजादासपुर तथा अन्य गांवों में रहने वाले लोगों चा चाल चलन देखा जा रहा है। इन गांवों में पांच साल के दौरान बसे लोगों का चिट्ठा तैयार करने में पुलिस की मदद ली जा रही है। सेना की खुफिया टीम का मानना है कि आसपास के गांवों में 150 से अधिक परिवार आए हैं। इन परिवारों के पूर्व के पतों का पता कराकर उनके दूसरे जिलों और राज्यों से रिपोर्ट ली जा रही है। आशंका है कि अभी हाल में आए परिवारों में स्लीपिंग माड्यूल के लोग तो नहीं हैं।
अब तो कर ही लीजिए त्रिशूल की सुरक्षा की चिंता
पठानकोट हमले के बाद से त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को लेकर भी कमियां ढूंढी गईं। चिंतित एयरफोस ने तमाम खतरों के प्रति आगाह किया। गृह मंत्रालय से भी निर्देश मिले लेकिन सारा प्रशासनिक अमला मिलकर एयरफोर्स से सटी अवैध कालोनियों का न तो कुछ बिगाड़ पाया और न ही बाउंड्रीवाल की ऊंचाई बढ़ी और न ही रिंग रोड का निर्माण हो सका। पिछले नौ महीने से सिर्फ बैठकें हुईं हैं। अवैध निर्माण का चिह्नांकन हुआ लेकिन चिह्नांकन की रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। पुलिस ने भी आसपास के आधा दर्जन गांवों के घरों का सत्यापन कराने के दावे किए लेकिन कुछ नहीं क र सकी। बीडीए अफसर अतिक्रमण तो रोक नहीं पाए लेकिन अवैध कब्जे कराने का रेट बढ़ गया। नगर निगम ने अवैध मकानों पर गृह और जलकर लगाकर इन अवैध मकानों पर वैधता की मुहर लगा दी। वहीं दूसरी ओर दिल्ली से वायु सेना के अधिकारी यहां के कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एसएसपी कोे सुरक्षा के लिए रिमाइंडर पर रिमाइंडर दे रहे हैं लेकिन यहां के अधिकारी कतई गंभीर नहीं हैं।
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इसी साल जनवरी के महीने में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद यहां के त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को सेना मुख्यालय से निर्देश दिए गए थे। दिल्ली से वायु सेना के अधिकारियों की टीम बरेली, आगरा, हिंडन सहित आधा दर्जन एयरबेस की सुरक्षा को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव से कोआर्डिनेटर कर रहे हैं। उनकी ओर से करीब आठ चिट्ठियां जारी हुईं। इसको लेकर तीन बार कमिश्नर और चार बार डीएम के साथ बैठक हुईं। इन बैठकों में बीडीए, नगर निगम, पुलिस, प्रशासनिक तथा पंचायतराज विभाग के अधिकारियों ने कागजों पर तैयारियां कीं।
विभागों की यह रही लापरवाही
बीडीए-त्रिशूल एयरबेस के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण रुकवाने थे लेकिन वहां अब भी अवैध निर्माण हो रहे हैं। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरा मुद्दा यह था कि प्रतिबंधित क्षेत्र के 50 मीटर के दायरे से अवैध कब्जे ध्वस्त होंगे लेकिन किसी भी अवैध निर्माण की एक ईंट तक नहीं हटाई गई।
नगर निगम को अवैध बने मकानों से जलकर और गृहकर खत्म करना था लेकिन ऐसा नहीं किया। उल्टे र्कई अवैध भवनों पर मिलीभगत से टैक्स लगा दिया ताकि वह अवैध निर्माण को नियमित बनाने के लिए अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रख सकें।
तहसील- सदर तहसील को प्रतिबंधित क्षेत्र की जमीन का चिह्नांकन करके गाटा वार इनकी बिक्री को प्रतिबंधित करने के लिए सब रजिस्ट्रार को ब्योरा देना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तहसील टीम ने ब्योरा तैयार किया लेकिन उसे तहसील की फाइलों में सीमित कर दिया।
पुलिस को त्रिशूल एयरबेस के आसपास के दर्जनभर गांव और कालोनी कंजादासपुर, मुड़िया अहमदनगर, परतापुर चौधरी, फरीदापुर चौधरी, परतापुर जीवन सहाय, अहलादपुर, कुर्मांचल नगर, सन सिटी विस्तार आदि कालोनियों में रह हे परिवारों का रजिस्टर तैयार किया जाना था लेकिन रजिस्टर नहीं बना है। न ही इन घरों सत्यापन हुआ है। परिवारों का सत्यापन होने पर यह जानकारी हो सक ती थी कि आसपास रह रहे लोग अपराधिक गतिविधियों के तो नहीं हैं।
जिला पंचायत
जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला पंचायत दोनों ही विभाग त्रिशूल की सुरक्षा को लेकर लापरवाह हैं। आसपास के तालाब में गंदगी और मृत पक्षियों के कारण लड़ाकू विमानों से पक्षियों के टकराने की घटनाएं हुईं हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को लेकर बीस साल पहले हुई विजिलेंस जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। जबकि इस रिपोर्ट के आधार पर थाना इज्जतनगर में बीडीए के तीन उपाध्यक्ष, आधा दर्जन इंजीनियर और वायु सेना के एक अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस रिपोर्ट में त्रिशूल के आसपास मकान और कालोनी बनाने के लिए इन सभी को जिम्मेदार ठहराया गया था। बीडीए ने तो मकानों और कालोनियों के मानचित्र तक पास कर दिए थे।
‘त्रिशूल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर है। पूर्व में जो निर्णय लिए गए हैं, उनमें से कुछ पर काम हुआ है। सुरक्षा की दृिष्ट से जो काम अधूरे रह गए हैं, उनको पूरा कराने के लिए जल्द ही पुलिस, प्रशासनिक और वायु सेना के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। उसी में सुरक्षा को लेकर तैयार किए गए एक्शन प्लान पर काम होगा।’ प्रमांशु कुमार, कमिश्नर
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सेना ने लाल फाटक चनेटी, ठिरिया निवाजत खां, बीयावानी कोठी के सामने। टेलीफोन एक्सचेंज रोड, बदायूं रोड, स्टेशन रोड, शाहजहांपुर रोड आदि रास्तोें पर सेना की सक्रियता बढ़ गई है। इन रास्तों से गुजरने वाले संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है। खुफिया संगठन को सक्रिय कर दिया है। त्रिशूल एयरबेस बाउंड्रीवाल के आसपास दिन और रात में गश्त बढ़ा दी है। इसके लिए पुलिस की मदद ली जा रही है। कंजादासपुर तथा अन्य गांवों में रहने वाले लोगों चा चाल चलन देखा जा रहा है। इन गांवों में पांच साल के दौरान बसे लोगों का चिट्ठा तैयार करने में पुलिस की मदद ली जा रही है। सेना की खुफिया टीम का मानना है कि आसपास के गांवों में 150 से अधिक परिवार आए हैं। इन परिवारों के पूर्व के पतों का पता कराकर उनके दूसरे जिलों और राज्यों से रिपोर्ट ली जा रही है। आशंका है कि अभी हाल में आए परिवारों में स्लीपिंग माड्यूल के लोग तो नहीं हैं।
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अब तो कर ही लीजिए त्रिशूल की सुरक्षा की चिंता
पठानकोट हमले के बाद से त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को लेकर भी कमियां ढूंढी गईं। चिंतित एयरफोस ने तमाम खतरों के प्रति आगाह किया। गृह मंत्रालय से भी निर्देश मिले लेकिन सारा प्रशासनिक अमला मिलकर एयरफोर्स से सटी अवैध कालोनियों का न तो कुछ बिगाड़ पाया और न ही बाउंड्रीवाल की ऊंचाई बढ़ी और न ही रिंग रोड का निर्माण हो सका। पिछले नौ महीने से सिर्फ बैठकें हुईं हैं। अवैध निर्माण का चिह्नांकन हुआ लेकिन चिह्नांकन की रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। पुलिस ने भी आसपास के आधा दर्जन गांवों के घरों का सत्यापन कराने के दावे किए लेकिन कुछ नहीं क र सकी। बीडीए अफसर अतिक्रमण तो रोक नहीं पाए लेकिन अवैध कब्जे कराने का रेट बढ़ गया। नगर निगम ने अवैध मकानों पर गृह और जलकर लगाकर इन अवैध मकानों पर वैधता की मुहर लगा दी। वहीं दूसरी ओर दिल्ली से वायु सेना के अधिकारी यहां के कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एसएसपी कोे सुरक्षा के लिए रिमाइंडर पर रिमाइंडर दे रहे हैं लेकिन यहां के अधिकारी कतई गंभीर नहीं हैं।
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इसी साल जनवरी के महीने में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद यहां के त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को सेना मुख्यालय से निर्देश दिए गए थे। दिल्ली से वायु सेना के अधिकारियों की टीम बरेली, आगरा, हिंडन सहित आधा दर्जन एयरबेस की सुरक्षा को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव से कोआर्डिनेटर कर रहे हैं। उनकी ओर से करीब आठ चिट्ठियां जारी हुईं। इसको लेकर तीन बार कमिश्नर और चार बार डीएम के साथ बैठक हुईं। इन बैठकों में बीडीए, नगर निगम, पुलिस, प्रशासनिक तथा पंचायतराज विभाग के अधिकारियों ने कागजों पर तैयारियां कीं।
विभागों की यह रही लापरवाही
बीडीए-त्रिशूल एयरबेस के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण रुकवाने थे लेकिन वहां अब भी अवैध निर्माण हो रहे हैं। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरा मुद्दा यह था कि प्रतिबंधित क्षेत्र के 50 मीटर के दायरे से अवैध कब्जे ध्वस्त होंगे लेकिन किसी भी अवैध निर्माण की एक ईंट तक नहीं हटाई गई।
नगर निगम को अवैध बने मकानों से जलकर और गृहकर खत्म करना था लेकिन ऐसा नहीं किया। उल्टे र्कई अवैध भवनों पर मिलीभगत से टैक्स लगा दिया ताकि वह अवैध निर्माण को नियमित बनाने के लिए अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रख सकें।
तहसील- सदर तहसील को प्रतिबंधित क्षेत्र की जमीन का चिह्नांकन करके गाटा वार इनकी बिक्री को प्रतिबंधित करने के लिए सब रजिस्ट्रार को ब्योरा देना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तहसील टीम ने ब्योरा तैयार किया लेकिन उसे तहसील की फाइलों में सीमित कर दिया।
पुलिस को त्रिशूल एयरबेस के आसपास के दर्जनभर गांव और कालोनी कंजादासपुर, मुड़िया अहमदनगर, परतापुर चौधरी, फरीदापुर चौधरी, परतापुर जीवन सहाय, अहलादपुर, कुर्मांचल नगर, सन सिटी विस्तार आदि कालोनियों में रह हे परिवारों का रजिस्टर तैयार किया जाना था लेकिन रजिस्टर नहीं बना है। न ही इन घरों सत्यापन हुआ है। परिवारों का सत्यापन होने पर यह जानकारी हो सक ती थी कि आसपास रह रहे लोग अपराधिक गतिविधियों के तो नहीं हैं।
जिला पंचायत
जिला पंचायतराज अधिकारी और जिला पंचायत दोनों ही विभाग त्रिशूल की सुरक्षा को लेकर लापरवाह हैं। आसपास के तालाब में गंदगी और मृत पक्षियों के कारण लड़ाकू विमानों से पक्षियों के टकराने की घटनाएं हुईं हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा को लेकर बीस साल पहले हुई विजिलेंस जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। जबकि इस रिपोर्ट के आधार पर थाना इज्जतनगर में बीडीए के तीन उपाध्यक्ष, आधा दर्जन इंजीनियर और वायु सेना के एक अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस रिपोर्ट में त्रिशूल के आसपास मकान और कालोनी बनाने के लिए इन सभी को जिम्मेदार ठहराया गया था। बीडीए ने तो मकानों और कालोनियों के मानचित्र तक पास कर दिए थे।
‘त्रिशूल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर है। पूर्व में जो निर्णय लिए गए हैं, उनमें से कुछ पर काम हुआ है। सुरक्षा की दृिष्ट से जो काम अधूरे रह गए हैं, उनको पूरा कराने के लिए जल्द ही पुलिस, प्रशासनिक और वायु सेना के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। उसी में सुरक्षा को लेकर तैयार किए गए एक्शन प्लान पर काम होगा।’ प्रमांशु कुमार, कमिश्नर