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आज अदालत में नगर निगम का पक्ष रखेंगे अपर नगर आयुक्त
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बरेली नगर निगम
धर्मदत्त सिटी अस्पताल के प्रबंधन ने नगर निगम की अर्जी पर दाखिल की आपत्ति
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अस्पताल पर कब्जा लेने के निगम के दावे को नकारा, कहा- लगातार भर्ती हैं मरीज
बरेली। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बाद धर्मदत्त वैद्य सिटी अस्पताल का मामला एक बार फिर सिविल कोर्ट में पहुंच गया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की अर्जी पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। अदालत ने अब बुधवार को अपर आयुक्त को बुलाया है।
सिटी अस्पताल के निदेशक डॉ. अनुपम शर्मा की ओर से दाखिल आपत्ति में कहा गया है कि धर्मदत्त वैद्य आयुर्वेद भवन और धर्मदत्त वैद्य सिटी अस्पताल पर उनका ही कब्जा है। अस्पताल में 18 मार्च से 23 मार्च के बीच लगातार मरीजों का इलाज होता रहा है। ऑपरेशन भी किए जा रहे है। अदालत आदेश देगी तो वह मरीजों के इलाज से संबंधित कागजात भी पेश कर सकते हैं।
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डॉ. अनुपम की अर्जी में कहा गया है कि अपर नगर आयुक्त अजीत सिंह 21 मार्च को सिटी अस्पताल आए थे। उन्होंने नगर निगम के कुछ कर्मचारियों को तीमारदार बता कर प्रवेश कराने का प्रयास किया। जब उनसे अस्पताल में भर्ती मरीज का नाम पूछा गया तो नहीं बता पाए। महिला डॉक्टर ने उन्हें डांटा तो वह उनसे अभद्रता करने के साथ अश्लील बातें बोलने लगे। फिर भी अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया।
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इससे पहले 20 मार्च को नगर निगम की ओर से अर्जी दाखिल की गई थी कि अस्पताल पर नगर निगम का कब्जा है लिहाजा धर्मदत्त सिटी अस्पताल का मुकदमा खारिज किया जाए। अस्पताल के वकील ने मंगलवार को फिर यह मांग दोहराई। इसके जवाब में सिटी अस्पताल की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई जारी रखते हुए 24 मार्च को अपर नगर आयुक्त अजीत सिंह को बुलाया है।
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अस्पताल पर कब्जा लेने के निगम के दावे को नकारा, कहा- लगातार भर्ती हैं मरीज बरेली। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बाद धर्मदत्त वैद्य सिटी अस्पताल का मामला एक बार फिर सिविल कोर्ट में पहुंच गया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम की अर्जी पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। अदालत ने अब बुधवार को अपर आयुक्त को बुलाया है।
सिटी अस्पताल के निदेशक डॉ. अनुपम शर्मा की ओर से दाखिल आपत्ति में कहा गया है कि धर्मदत्त वैद्य आयुर्वेद भवन और धर्मदत्त वैद्य सिटी अस्पताल पर उनका ही कब्जा है। अस्पताल में 18 मार्च से 23 मार्च के बीच लगातार मरीजों का इलाज होता रहा है। ऑपरेशन भी किए जा रहे है। अदालत आदेश देगी तो वह मरीजों के इलाज से संबंधित कागजात भी पेश कर सकते हैं।
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डॉ. अनुपम की अर्जी में कहा गया है कि अपर नगर आयुक्त अजीत सिंह 21 मार्च को सिटी अस्पताल आए थे। उन्होंने नगर निगम के कुछ कर्मचारियों को तीमारदार बता कर प्रवेश कराने का प्रयास किया। जब उनसे अस्पताल में भर्ती मरीज का नाम पूछा गया तो नहीं बता पाए। महिला डॉक्टर ने उन्हें डांटा तो वह उनसे अभद्रता करने के साथ अश्लील बातें बोलने लगे। फिर भी अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया।
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इससे पहले 20 मार्च को नगर निगम की ओर से अर्जी दाखिल की गई थी कि अस्पताल पर नगर निगम का कब्जा है लिहाजा धर्मदत्त सिटी अस्पताल का मुकदमा खारिज किया जाए। अस्पताल के वकील ने मंगलवार को फिर यह मांग दोहराई। इसके जवाब में सिटी अस्पताल की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई जारी रखते हुए 24 मार्च को अपर नगर आयुक्त अजीत सिंह को बुलाया है।