Bareilly News: इंसाफ की राह में रस्सी का सांप... कठघरे में पुलिस, जिन्हें बनाया मुल्जिम, वह अदालत से हुए बरी
बरेली में अदालत में ऐसे कई मामले आए, जब पुलिस की कहानी झूठी साबित हुई। पुलिस ने जिस आरोपी को मुठभेड़ में गोली मारकर गिरफ्तार किया, अदालत में उन पर आरोप साबित नहीं हो सके।
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पुलिस का बनाया रस्सी का सांप कई बार इन्साफ की राह में रोड़े अटकाता है। गलत विवेचना की वजह से निर्दोष लोगों को झूठे आरोप में जेल जाना पड़ जाता है। खुद को निर्दोष साबित करने में उनके कई साल बर्बाद हो जाते हैं। बरेली में अदालत में ऐसे कई मामले आए, जब पुलिस की कहानी झूठी साबित हुई। पुलिस ने जिस आरोपी को मुठभेड़ में गोली मारकर गिरफ्तार किया, अदालत में उन पर आरोप साबित नहीं हो सके। वह बाइज्जत बरी हुए। ऐसे मामलों में न्यायालय ने पुलिस पर लापरवाही बरतने और फर्जी कहानी गढ़ने जैसी गंभीर टिप्पणियां भी कीं। इनमें से कुछ मामले काफी चर्चित भी रहे।
मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किए हत्यारोपी, अदालत से दोषमुक्त
वर्ष 2021 में नवाबगंज के गांव जरेली में पंचायत के दौरान दोहरा हत्याकांड हुआ था। गोलीबारी में कई लोग घायल भी हुए थे। वादी ने नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अजहर, मंजर और सरवर को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया, पर कई अहम साक्ष्यों को विवेचना में शामिल ही नहीं किया। न्यायालय में ट्रायल के दौरान पूरा मामला पलट गया। सभी आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया। आर्म्स एक्ट के आरोप भी साबित नहीं हो सके। कोर्ट ने कहा कि पार्टीबंदी में हत्याएं हुईं। पुलिस ने गुडवर्क दिखाने के लिए सोच-समझकर रिपोर्ट लिखी थी।
दहेज हत्या के आरोपी पति और सास को किया बरी
14 फरवरी 2024 को हाफिजगंज थाना क्षेत्र के धर्मपुर गांव में एक महिला ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। महिला के पिता ने उसके पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद पति और सास को आरोपी बनाया। ट्रायल के दौरान कोर्ट ने पाया कि संतान न होने के कारण महिला ने आत्महत्या की थी। मौके पर गर्भावस्था परीक्षण की किट भी मिली थी। न्यायालय ने पुलिस पर टिप्पणी की कि पति और सास को बिना किसी आधार के गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शक्तियों का दुरुपयोग किया और विवेचना में लापरवाही बरती।
मामूली कहासुनी...पुलिस ने गढ़ दी हमले की कहानी
जून 2020 में इटौआ खुशहाल तिराहे पर शीशगढ़ पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, बाइक सवार तीन मांस तस्करों की घेराबंदी की तो आरोपी फायरिंग कर भाग गए। पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट लगी तीन बाइकें मौके से बरामद कीं। पुलिस ने किच्छा दरऊ निवासी तीन सगे भाइयों के खिलाफ चार्जशीट लगाई। कोर्ट में पुलिस की कहानी झूठी साबित हुई। कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया। निर्णय में उल्लेख किया कि लगता है वाहन चेकिंग के दौरान आरोपियों से कहासुनी हुई और पुलिस ने यह कहानी गढ़ दी। कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश भी दिए थे।
दहेज हत्या में विवाहिता के पिता को सुनाई सजा
वर्ष 2023 में बिशारतगंज थाना क्षेत्र में एक महिला की ससुराल में मौत हो गई थी। पिता ने बेटी के ससुराल वालों के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजकर चार्जशीट लगाई थी। न्यायालय में वादी पिता ने बताया कि उसने पहले गलत बयान दिया था। उसकी बेटी ही ससुराल वालों से झगड़ा करती थी। न्यायालय ने कहा कि झूठे आरोपों की वजह से निर्दोष लोगों को मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने महिला के पिता को उतने ही दिन जेल में रहने की सजा सुनाई, जितने दिन (800 दिन) निर्दोष ससुराल वालों ने जेल में बिताए थे। इसमें भी पुलिस की विवेचना सवालों के घेरे में रही।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि पुलिस अपनी ओर से विवेचना में पूरी स्थिति स्पष्ट करती है। सही तथ्यों के आधार पर ही चार्जशीट या एफआर लगाई जाती है। अगर विवेचकों की ओर से कोई लापरवाही या मनमानी सामने आती है तो पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी उनके विरुद्ध कार्रवाई करते हैं। किसी मामले में कोर्ट के निर्देश मिलते हैं तो उसका पूरा अनुपालन किया जाता है। तीन नए कानून लागू होने के बाद विवेचना पर निगरानी पहले के सापेक्ष और बढ़ाई गई है।