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सरकारी स्कूलों में बच्चों की भरमार... प्राइवेट में दिखे दो-चार
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साइकिल से स्कूल जातीं छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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पहले दिन परिषदीय स्कूलों में ज्ञानोत्सव कार्यक्रम में हुआ बच्चों का स्वागत
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बरेली। कोरोना संक्रमण की आशंका और ऑफलाइन परीक्षा की मांग कर रहे अभिभावकों ने आखिरकार बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। वहीं, पहले से ही अभिभावकों की मंशा भांपकर ज्यादातर निजी स्कूल सोमवार को पहले दिन खुले भी नहीं। लिहाजा, निजी स्कूलों में सन्नाटा पसरा रहा। दूसरी ओर, परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में उम्मीद से ज्यादा छात्र पहुंचे। पहले दिन ज्ञानोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों का स्वागत कर कोरोना काल पर चर्चा की गई।
करीब 11 माह के लंबे इंतजार के बाद शासनादेश के सोमवार से खुले स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को रोस्टर के अनुरूप बुलाया जाना था। इसके लिए निजी और परिषदीय स्कूलों में तैयारियां की गईं थीं। मगर, कोरोना संक्रमण के कुछ राज्यों में फिर से केस बढ़ने पर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार कर दिया था। इसका निजी स्कूलों पर खासा असर दिखाई दिया। जिले के ज्यादातर निजी स्कूल बंद रहे। उन्होंने ऑनलाइन क्लास और परीक्षाएं संपन्न कराने का निर्णय लिया है। कुछ निजी स्कूल खुले भी तो उनमें बच्चों की संख्या 20 फीसदी के आसपास रही। सरकारी स्कूलों की स्थिति इससे उलट रही। बड़ी संख्या में सभी कक्षाओं के छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचे।
कोविड प्रोटोकॉल का दिखा पालन
भरतौल और नरियावल स्थित प्राइमरी स्कूल मेें सभी बच्चे मास्क लगाकर पहुंचे। स्कूल में उनका तिलक कर स्वागत किया गया और फिर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कक्षाओं में बिठाया गया। प्रधानाध्यापिका डॉ. शिवानी ने बताया कि पहले दिन बच्चोें को फल वितरित किए गए। उन्हें कोर्स वर्क के बजाय खेल-खेल में पढ़ाई कराई गई, ताकि बच्चे माहौल में घुलमिल सकें। कहा, अगले हफ्ते से पढ़ाई का शेड्यूल लागू होगा। हालांकि, कई स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं दिखाई दिया। सीटों पर सटकर विद्यार्थियों को बिठाया गया था। बच्चे मास्क भी नहीं लगाए थे।
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साफ-सफाई से बना मिड-डे मील
स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को हर हाल में मिड-डे मील देने के निर्देश शासन ने दिए थे। इसके लिए पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली गईं थीं। सोमवार को स्कूल खुलने के बाद रसोइया ने मेन्यू के अनुसार खाना बनाया। साफ सुथरे किचन में खाना पकाने के बाद परोसा गया। इसकी फोटो और वीडियो भी बीएसए को व्हाट्सएप पर भेजी गईं। शिक्षक आनंद ने बताया कि 11 माह के लंबे अंतराल के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों को कोई दिक्कत न हो इसका पूरा ख्याल रखा गया। भविष्य में भी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
वर्जन:
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के माता पिता कोरोना संक्रमण के प्रति सजग हैं, इसलिए उन्होंने बच्चों को स्कूल न भेजने का फैसला किया था। उधर, परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक कोरोना संक्रमण के प्रति ज्यादा सजग नहीं हैं। अगर, एक भी बच्चा संक्रमित हुआ तो निजी स्कूलों में कोई भी बच्चों को नहीं भेजेगा। - अंकुर सक्सेना, अध्यक्ष अभिभावक संघ
करीब 11 माह के लंबे इंतजार के बाद शासनादेश के सोमवार से खुले स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को रोस्टर के अनुरूप बुलाया जाना था। इसके लिए निजी और परिषदीय स्कूलों में तैयारियां की गईं थीं। मगर, कोरोना संक्रमण के कुछ राज्यों में फिर से केस बढ़ने पर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार कर दिया था। इसका निजी स्कूलों पर खासा असर दिखाई दिया। जिले के ज्यादातर निजी स्कूल बंद रहे। उन्होंने ऑनलाइन क्लास और परीक्षाएं संपन्न कराने का निर्णय लिया है। कुछ निजी स्कूल खुले भी तो उनमें बच्चों की संख्या 20 फीसदी के आसपास रही। सरकारी स्कूलों की स्थिति इससे उलट रही। बड़ी संख्या में सभी कक्षाओं के छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचे।
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कोविड प्रोटोकॉल का दिखा पालन
भरतौल और नरियावल स्थित प्राइमरी स्कूल मेें सभी बच्चे मास्क लगाकर पहुंचे। स्कूल में उनका तिलक कर स्वागत किया गया और फिर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कक्षाओं में बिठाया गया। प्रधानाध्यापिका डॉ. शिवानी ने बताया कि पहले दिन बच्चोें को फल वितरित किए गए। उन्हें कोर्स वर्क के बजाय खेल-खेल में पढ़ाई कराई गई, ताकि बच्चे माहौल में घुलमिल सकें। कहा, अगले हफ्ते से पढ़ाई का शेड्यूल लागू होगा। हालांकि, कई स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं दिखाई दिया। सीटों पर सटकर विद्यार्थियों को बिठाया गया था। बच्चे मास्क भी नहीं लगाए थे।
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साफ-सफाई से बना मिड-डे मील
स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को हर हाल में मिड-डे मील देने के निर्देश शासन ने दिए थे। इसके लिए पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली गईं थीं। सोमवार को स्कूल खुलने के बाद रसोइया ने मेन्यू के अनुसार खाना बनाया। साफ सुथरे किचन में खाना पकाने के बाद परोसा गया। इसकी फोटो और वीडियो भी बीएसए को व्हाट्सएप पर भेजी गईं। शिक्षक आनंद ने बताया कि 11 माह के लंबे अंतराल के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों को कोई दिक्कत न हो इसका पूरा ख्याल रखा गया। भविष्य में भी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
वर्जन:
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चों के माता पिता कोरोना संक्रमण के प्रति सजग हैं, इसलिए उन्होंने बच्चों को स्कूल न भेजने का फैसला किया था। उधर, परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक कोरोना संक्रमण के प्रति ज्यादा सजग नहीं हैं। अगर, एक भी बच्चा संक्रमित हुआ तो निजी स्कूलों में कोई भी बच्चों को नहीं भेजेगा। - अंकुर सक्सेना, अध्यक्ष अभिभावक संघ