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...और बैरंग लौट गईं एनजीओ की सदस्य
Bareilly
Updated Tue, 04 Feb 2014 02:35 PM IST
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बरेली। जिला चिकित्सालय में जिंदगी के लिए जूझ रही संवासिनी की हालत पर भले ही स्थानीय प्रशासन को तरस नहीं आया हो, दिल्ली की एक स्वयंसेवी संस्था की मानवीयता जाग गई। हालांकि कानूनी पेंच के चलते संस्था को संवासिनी को दिल्ली ले जाने में सफलता नहीं मिल पाई।
ब्रेन कैंसर से पीड़ित संवासिनी की हालत नाजुक होने पर जिला चिकित्सालय ने जिला प्रशासन को उसकी मौत की आशंका जताते हुए हायर सेंटर ले जाने के लिए चिट्ठी लिखी थी। तीन दिन बाद भी प्रशासनिक अमले की नींद नहीं टूटी है। अलबत्ता, दिल्ली की एनजीओ नारी ज्योति से जुड़ी ममता कुलकर्णी, सुनीता अरोड़ा व सीमा शर्मा शनिवार दोपहर जिला चिकित्सालय पहुंचीं। इन्होंने संवासिनी का हालचाल पूछा उसे दिल्ली ले जाकर इलाज कराने की इच्छा जताई।
इसके बाद एनजीओ की तीनों सदस्यों ने सीएमएस कार्यालय पहुंच कर संवासिनी को साथ ले जाने का तरीका पूछा लेकिन उन्हें वहां से बताया गया कि यह संभव नहीं है। इसके बाद तीनों सदस्य वापस लौट गई।
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ब्रेन कैंसर से पीड़ित संवासिनी की हालत नाजुक होने पर जिला चिकित्सालय ने जिला प्रशासन को उसकी मौत की आशंका जताते हुए हायर सेंटर ले जाने के लिए चिट्ठी लिखी थी। तीन दिन बाद भी प्रशासनिक अमले की नींद नहीं टूटी है। अलबत्ता, दिल्ली की एनजीओ नारी ज्योति से जुड़ी ममता कुलकर्णी, सुनीता अरोड़ा व सीमा शर्मा शनिवार दोपहर जिला चिकित्सालय पहुंचीं। इन्होंने संवासिनी का हालचाल पूछा उसे दिल्ली ले जाकर इलाज कराने की इच्छा जताई।
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इसके बाद एनजीओ की तीनों सदस्यों ने सीएमएस कार्यालय पहुंच कर संवासिनी को साथ ले जाने का तरीका पूछा लेकिन उन्हें वहां से बताया गया कि यह संभव नहीं है। इसके बाद तीनों सदस्य वापस लौट गई।
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