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जिला महिला चिकित्सालय की प्रमुख अधीक्षक से दो टूक
Bareilly
Updated Wed, 14 Aug 2013 05:37 AM IST
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सवाल : बलात्कार सरीखे मामलों में मेडिकल परीक्षण को क्या कोई डाक्टरों का पैनल है?
डा. स्नेहलता : पैनल सरीखी कोई व्यवस्था नहीं है। 55 वर्ष तक की आयु की जो भी डाक्टर शिफ्ट ड्यूटी में होती हैं, वे ही मेडिकल करती हैं।
सवाल : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शासन द्वारा बलात्कार पीड़ित के मेडिकल परीक्षण संबंधी और चिकित्सकों संबंधी कुछ दिशा निर्देश हैं। क्या उनका अनुपालन अस्पताल में हो रहा है?
डा. स्नेहलता : हां, उसी आधार पर अब हर ऐसे मामले में परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट डाक्टर द्वारा एक तय प्रोफार्मा में सप्लीमेंट्री मेडिकल रिपोर्ट के रूप में तैयार होती है।
सवाल :उसमें स्पष्ट लिखा है कि मेडिकल परीक्षा से पहले यथासंभव मनोचिकित्सक की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। ऐसा क्यों नहीं हुआ?
डा. स्नेहलता : अपने यहां कोई मनोचिकित्सक नहीं है। पुलिस अगर मांग भेजती है कि मनोचिकित्सक को भी दिखाया जाए तो उसकी व्यवस्था कराई जाती है।
सवाल : मेडिकल परीक्षण के लिए यहां आने वाली पीड़ित के साथ डाक्टर से लेकर स्टाफ भी ठीक से पेश नहीं आते। सीबीगंज कांड की पीड़ित भी घंटों लेबर रूम में पड़ी रही थी। क्या कहेंगी आप?
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डा. स्नेहलता : ना..ना.. ऐसा नहीं है। पूरा केयर होता है। सीबीगंज वाली लड़की लेबर रूम में लावारिस तो नहीं पड़ी थी। वह भरती करके उसमें रखी गई थी। इसे दूसरे रूप में नहीं लेना चाहिए।
सवाल : अक्सर ऐसे मामलों में आपके अस्पताल में पुलिस और मेडिकल स्टाफ में केस को हल्का करने के लिए सांठगांठ का आरोप लगता है?
डा. स्नेहलता : नहीं यहां कोई सांठगांठ नहीं है। अपने परीक्षण में डाक्टर जो पाता है, वही वह रिपोर्ट में लिखता है।
सवाल : कुल मिलाकर जिला महिला अस्पताल और यहां की कार्यशैली पर उंगली उठने लगी है। क्या कहेंगी आप?
डा. स्नेहलता : उंगली तो किसी भी पर उठाई जा सकती है। आप इंटरव्यू लेने आए हैं। हम चाहें तो आप पर बदतमीजी से पेश आने का आरोप लगा सकते हैं।
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डा. स्नेहलता : पैनल सरीखी कोई व्यवस्था नहीं है। 55 वर्ष तक की आयु की जो भी डाक्टर शिफ्ट ड्यूटी में होती हैं, वे ही मेडिकल करती हैं।
सवाल : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शासन द्वारा बलात्कार पीड़ित के मेडिकल परीक्षण संबंधी और चिकित्सकों संबंधी कुछ दिशा निर्देश हैं। क्या उनका अनुपालन अस्पताल में हो रहा है?
डा. स्नेहलता : हां, उसी आधार पर अब हर ऐसे मामले में परीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट डाक्टर द्वारा एक तय प्रोफार्मा में सप्लीमेंट्री मेडिकल रिपोर्ट के रूप में तैयार होती है।
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सवाल :उसमें स्पष्ट लिखा है कि मेडिकल परीक्षा से पहले यथासंभव मनोचिकित्सक की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। ऐसा क्यों नहीं हुआ?
डा. स्नेहलता : अपने यहां कोई मनोचिकित्सक नहीं है। पुलिस अगर मांग भेजती है कि मनोचिकित्सक को भी दिखाया जाए तो उसकी व्यवस्था कराई जाती है।
सवाल : मेडिकल परीक्षण के लिए यहां आने वाली पीड़ित के साथ डाक्टर से लेकर स्टाफ भी ठीक से पेश नहीं आते। सीबीगंज कांड की पीड़ित भी घंटों लेबर रूम में पड़ी रही थी। क्या कहेंगी आप?
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डा. स्नेहलता : ना..ना.. ऐसा नहीं है। पूरा केयर होता है। सीबीगंज वाली लड़की लेबर रूम में लावारिस तो नहीं पड़ी थी। वह भरती करके उसमें रखी गई थी। इसे दूसरे रूप में नहीं लेना चाहिए।
सवाल : अक्सर ऐसे मामलों में आपके अस्पताल में पुलिस और मेडिकल स्टाफ में केस को हल्का करने के लिए सांठगांठ का आरोप लगता है?
डा. स्नेहलता : नहीं यहां कोई सांठगांठ नहीं है। अपने परीक्षण में डाक्टर जो पाता है, वही वह रिपोर्ट में लिखता है।
सवाल : कुल मिलाकर जिला महिला अस्पताल और यहां की कार्यशैली पर उंगली उठने लगी है। क्या कहेंगी आप?
डा. स्नेहलता : उंगली तो किसी भी पर उठाई जा सकती है। आप इंटरव्यू लेने आए हैं। हम चाहें तो आप पर बदतमीजी से पेश आने का आरोप लगा सकते हैं।
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