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दबंग हैं कोटेदार, हाकिम भी लाचार
Bareilly
Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
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बरेली। पूरे जिले में शायद ही कोटे की कोई दुकान कभी समय पर खुलती हो। हाल यह है कि तमाम लोगों ने सस्ते गल्ले की दुकानों पर जाना ही छोड़ दिया है। जरा सा विरोध करने पर तयशुदा राशन और तेल देने के बजाय कोटेदार देख लेने की धमकी देकर दबंगई दिखाते हैं। विशेष कार्य दिवस पर भी चेकिंग के लिए सप्लाई इंस्पेक्टर नहीं पहुंचते। कोटे की दुकानों से राशन न मिलने से हर तरफ पब्लिक में नाराजगी है, लेकिन हाकिम और राजनेता इसका बिल्कुल भी ख्याल नहीं कर रहे हैं।
बड़ी विहार में इतवार को राशन ब्लैक किए जाने पर कार्डधारक भड़क गए थे। उन्होंने कोटे की दुकान पर जमकर हंगामा किया। सभासद और उनके पति ने भी साथ दिया। नतीजतन, कोटेदार को दुकान बंद करके भागना पड़ा। इस मामले में डीएसओ केबी सिंह ने सोमवार को जांच के आदेश दिए। उनका कहना है कि लोगों की शिकायत सही पाए जाने पर कोटेदार का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। लेकिन, आम लोगों का कहना है कि यह दिक्कत तमाम इलाकों में है। इसलिए हर जगह पूर्ति विभाग के अफसरों को निगरानी बढ़ानी होगी।
शेरगढ़ के वार्ड छह के सभासद नन्हे शाह सोमवार को एक अर्जी लेकर डीएसओ दफ्तर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वहां के कोटेदार ने जाली कार्ड बनवा रखे हैं। तमाम सीधे साधे लोगों के कार्ड भी अपने पास रख लिए हैं। किसी महीने उन्हें राशन देता है और किसी महीने दुकान ही नहीं खोलता। लोग विरोध करते हैं तो लड़ने पर उतारू हो जाता है। उन्होंने डीएसओ को बताया, ‘यह मत सोचना कि मैं खुद कोटा लेना चाहता हूं। या तो इस कोटेदार को सुधार दो या फिर किसी और को कोटा दे दो।’ जोगीनवादा के भूपेंद्र एक साल से कोटे की दुकान पर नहीं गए। कहते हैं कि सास जिंदा थीं तो वह राशन और तेल ले आती थीं। अब दस बार चक्कर लगाओ तो कहीं जाकर दुकान खुली मिलती है। मजदूरी का हर्जा करो, इससे अच्छा है कि खुले मार्केट से राशन खरीद लो। सेमलखेड़ा के अख्तर ने भी कई महीनों से कोटेदार से कुछ नहीं लिया। उनकी भी यही शिकायत है कि अधिकार के साथ राशन मांगो तो कोटेदार धमकी देने लगता है। इसलिए उसकी दुकान पर जाना ही छोड़ दिया।
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नियम है कि सुबह 8-12 बजे तक और दोपहर बाद 3.30-7.30 बजे तक कोटे की दुकानें खुलनी चाहिए। इतवार और बुधवार को विशेष कार्यदिवस होने से सुबह आठ से चार बजे तक दुकान खुलनी चाहिए। इंस्पेक्टरों को भी अपने-अपने तय क्षेत्रों में चेकिंग के लिए मौजूद रहना चाहिए, मगर शायद ही कहीं कोई चेकिंग होती हो। सेटिंग की वजह से उन्होंने सबकुछ कोटेदारों के भरोसे छोड़ रखा है। इसी का नतीजा है कि कोटे का मिट्टी का तेल गंगापुर के खुले मार्केट में बिक रहा है। खाद्यान्न भी ब्लैक कर लिया जाता है।
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हर महीने बंटने के लिए आने वाला राशन-तेल
गेहूं : 9057.832 मीट्रिक टन
चावल : 8586.731 मीट्रिक टन
चीनी : 808 मीट्रिक टन
केरोसिन : 2902 किलो लीटर
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सुधार के लिए इतनी कार्रवाई काफी नहीं
एक सितंबर से अब तक 61 कोटे की दुकानें निलंबित की गईं। 52 कोटेदारों के अनुबंध पत्र निरस्त हुए। आठ कोटेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। तीन कोटेदार गिरफ्तार हुए। 19.87 लाख रुपये की बरामदगी हुई। 3.25 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी भी जब्त हुई। इसके बावजूद गड़बड़ नहीं रुक रही है।
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हमारी कोशिश रहती है कि सभी कोटेदार समय पर और निर्धारित मात्रा में सभी कार्डधारकों को राशन, तेल और चीनी बांटें। लेकिन शासन को भी हमारे बारे में सोचना चाहिए। अंत्योदय कार्डों पर 6 रुपये प्रति क्विंटल, बीपीएल-एपीएल कार्डों पर 17 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन दिया जाता है। इसी तरह मिट्टी के तेल पर 50 पैसा प्रति लीटर कमीशन मिलता है। इस राशि से गोदाम से दुकान तक माल लाने का खर्चा भी नहीं निकलता।-हरिशंकर कन्नौजिया, सचिव, उचित दर विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन
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जिला में पूर्ति निरीक्षकों के 17 पद हैं, लेकिन मात्र 10 पूर्ति निरीक्षक ही हैं। इनमें से भी तीन इसी महीने रिटायर हो रहे हैं। कोशिश करते हैं कि विशेष कार्य दिवस पर चेकिंग भी कराई जाए, लेकिन यह सही है कि स्टाफ की कमी के कारण सभी जगह नहीं पहुंच पाते। जहां से भी शिकायत मिलती है, फौरन कार्रवाई करते हैं। पिछले चार महीने के कारवाई के आंकड़े ये साबित करते हैं।-केबी सिंह, डीएसओ
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बड़ी विहार में इतवार को राशन ब्लैक किए जाने पर कार्डधारक भड़क गए थे। उन्होंने कोटे की दुकान पर जमकर हंगामा किया। सभासद और उनके पति ने भी साथ दिया। नतीजतन, कोटेदार को दुकान बंद करके भागना पड़ा। इस मामले में डीएसओ केबी सिंह ने सोमवार को जांच के आदेश दिए। उनका कहना है कि लोगों की शिकायत सही पाए जाने पर कोटेदार का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। लेकिन, आम लोगों का कहना है कि यह दिक्कत तमाम इलाकों में है। इसलिए हर जगह पूर्ति विभाग के अफसरों को निगरानी बढ़ानी होगी।
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शेरगढ़ के वार्ड छह के सभासद नन्हे शाह सोमवार को एक अर्जी लेकर डीएसओ दफ्तर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वहां के कोटेदार ने जाली कार्ड बनवा रखे हैं। तमाम सीधे साधे लोगों के कार्ड भी अपने पास रख लिए हैं। किसी महीने उन्हें राशन देता है और किसी महीने दुकान ही नहीं खोलता। लोग विरोध करते हैं तो लड़ने पर उतारू हो जाता है। उन्होंने डीएसओ को बताया, ‘यह मत सोचना कि मैं खुद कोटा लेना चाहता हूं। या तो इस कोटेदार को सुधार दो या फिर किसी और को कोटा दे दो।’ जोगीनवादा के भूपेंद्र एक साल से कोटे की दुकान पर नहीं गए। कहते हैं कि सास जिंदा थीं तो वह राशन और तेल ले आती थीं। अब दस बार चक्कर लगाओ तो कहीं जाकर दुकान खुली मिलती है। मजदूरी का हर्जा करो, इससे अच्छा है कि खुले मार्केट से राशन खरीद लो। सेमलखेड़ा के अख्तर ने भी कई महीनों से कोटेदार से कुछ नहीं लिया। उनकी भी यही शिकायत है कि अधिकार के साथ राशन मांगो तो कोटेदार धमकी देने लगता है। इसलिए उसकी दुकान पर जाना ही छोड़ दिया।
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नियम है कि सुबह 8-12 बजे तक और दोपहर बाद 3.30-7.30 बजे तक कोटे की दुकानें खुलनी चाहिए। इतवार और बुधवार को विशेष कार्यदिवस होने से सुबह आठ से चार बजे तक दुकान खुलनी चाहिए। इंस्पेक्टरों को भी अपने-अपने तय क्षेत्रों में चेकिंग के लिए मौजूद रहना चाहिए, मगर शायद ही कहीं कोई चेकिंग होती हो। सेटिंग की वजह से उन्होंने सबकुछ कोटेदारों के भरोसे छोड़ रखा है। इसी का नतीजा है कि कोटे का मिट्टी का तेल गंगापुर के खुले मार्केट में बिक रहा है। खाद्यान्न भी ब्लैक कर लिया जाता है।
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हर महीने बंटने के लिए आने वाला राशन-तेल
गेहूं : 9057.832 मीट्रिक टन
चावल : 8586.731 मीट्रिक टन
चीनी : 808 मीट्रिक टन
केरोसिन : 2902 किलो लीटर
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सुधार के लिए इतनी कार्रवाई काफी नहीं
एक सितंबर से अब तक 61 कोटे की दुकानें निलंबित की गईं। 52 कोटेदारों के अनुबंध पत्र निरस्त हुए। आठ कोटेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। तीन कोटेदार गिरफ्तार हुए। 19.87 लाख रुपये की बरामदगी हुई। 3.25 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी भी जब्त हुई। इसके बावजूद गड़बड़ नहीं रुक रही है।
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हमारी कोशिश रहती है कि सभी कोटेदार समय पर और निर्धारित मात्रा में सभी कार्डधारकों को राशन, तेल और चीनी बांटें। लेकिन शासन को भी हमारे बारे में सोचना चाहिए। अंत्योदय कार्डों पर 6 रुपये प्रति क्विंटल, बीपीएल-एपीएल कार्डों पर 17 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन दिया जाता है। इसी तरह मिट्टी के तेल पर 50 पैसा प्रति लीटर कमीशन मिलता है। इस राशि से गोदाम से दुकान तक माल लाने का खर्चा भी नहीं निकलता।-हरिशंकर कन्नौजिया, सचिव, उचित दर विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन
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जिला में पूर्ति निरीक्षकों के 17 पद हैं, लेकिन मात्र 10 पूर्ति निरीक्षक ही हैं। इनमें से भी तीन इसी महीने रिटायर हो रहे हैं। कोशिश करते हैं कि विशेष कार्य दिवस पर चेकिंग भी कराई जाए, लेकिन यह सही है कि स्टाफ की कमी के कारण सभी जगह नहीं पहुंच पाते। जहां से भी शिकायत मिलती है, फौरन कार्रवाई करते हैं। पिछले चार महीने के कारवाई के आंकड़े ये साबित करते हैं।-केबी सिंह, डीएसओ