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‘सूचना’ की नहीं की तस्दीक और बढ़ता गया कांरवा
Bareilly
Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
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बरेली। भर्ती रैली की सूचना एक जिले से दूसरे जिले फैलती चली गई लेकिन किसी ने इसकी तस्दीक संबंधित अधिकारी या कार्यालय से नहीं की। अनजान बनकर शहर में पहुंचे लड़कों को जब असलियत का पता चला तो वह सूचना देने वालों पर नाराज हो रहे थे। ज्यादातर को उनके मित्रों ने ही खुली भर्ती की फोन पर सूचना दी थी।
काशीपुर से आए कलविन्दर यादव के पास कोई एडमिट कार्ड नहीं था। उन्हें तो बस इतना ही पता था कि बरेली में भर्ती है और बैग लेकर रोजगार के लिए घर से निकल पड़े। उनके साथ दो-चार साथी भी हो गए। जंक्शन पहुंचने पर उन्हें असलियत का पता चला तो काफी निराश हुए।
अमरोहा से आए सतपाल और सोनू यादव ने बताया कि उन्हें खुली भर्ती की सूचना मिली थी। स्टेशन पर आने के बाद पुलिस वालों ने एडमिट कार्ड न होने पर वापस जाने को कहा। रात में तुरंत ट्रेन न मिलने पर वह अपने साथियों के साथ प्लेटफार्म पर ही बैठ गए। बिजनौर से आए कपिल कुमार भी यही हाल रहा। गलत सूचना पर पहुंचे लड़के खुद को ठगा सा महसूस कर रहे थे।
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पुलिस बिना एडमिट कार्ड वाले लड़कों को जंक्शन से बाहर जाने ही नहीं दे रही थी। जिनकी ट्रेन आती उसे खुद ही पुलिस कर्मी सूचना देकर रवाना करने में पूरी रात लगे रहे। बरेली के ग्रामीण क्षेत्रों से आए दर्जनों लड़के आवागमन के साधन न होने के अभाव में जंक्शन, रोडवेज और सैटेलाइट पर ही टिके रहे।
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काशीपुर से आए कलविन्दर यादव के पास कोई एडमिट कार्ड नहीं था। उन्हें तो बस इतना ही पता था कि बरेली में भर्ती है और बैग लेकर रोजगार के लिए घर से निकल पड़े। उनके साथ दो-चार साथी भी हो गए। जंक्शन पहुंचने पर उन्हें असलियत का पता चला तो काफी निराश हुए।
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अमरोहा से आए सतपाल और सोनू यादव ने बताया कि उन्हें खुली भर्ती की सूचना मिली थी। स्टेशन पर आने के बाद पुलिस वालों ने एडमिट कार्ड न होने पर वापस जाने को कहा। रात में तुरंत ट्रेन न मिलने पर वह अपने साथियों के साथ प्लेटफार्म पर ही बैठ गए। बिजनौर से आए कपिल कुमार भी यही हाल रहा। गलत सूचना पर पहुंचे लड़के खुद को ठगा सा महसूस कर रहे थे।
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पुलिस बिना एडमिट कार्ड वाले लड़कों को जंक्शन से बाहर जाने ही नहीं दे रही थी। जिनकी ट्रेन आती उसे खुद ही पुलिस कर्मी सूचना देकर रवाना करने में पूरी रात लगे रहे। बरेली के ग्रामीण क्षेत्रों से आए दर्जनों लड़के आवागमन के साधन न होने के अभाव में जंक्शन, रोडवेज और सैटेलाइट पर ही टिके रहे।