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करोड़ों के बिजली बिल घोटाले की जांच शुरू
Bareilly
Updated Wed, 19 Nov 2014 05:30 AM IST
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बरेली। निजी बिलिंग कंपनी और बिजली विभाग के अफसरों की मिलीभगत से हुए करोड़ों के घोटाले की जांच शुरू हो गई है। मंगलवार को मुख्यालय से पहुंचे चीफ इंजीनियर ने कागजात तलब कर पूरे दिन छानबीन की। हालांकि अफसर वांछित रिकॉर्ड देने में बहानेबाजी करते रहे।
बिजली विभाग ने वर्ष 2010 में मीरगंज, फरीदपुर, बहेड़ी, आंवला, नवाबगंज और बरेली तहसील में कंप्यूटराइज बिलिंग शुरू कराने को निजी कंपनी एन साफ्ट को ठेका दिया था। कंपनी को मीटर रीडिंग, बिल बनाना और बांटना, चेक से भुगतान लेना और बकाएदारों की कनेक्शन काटने आदि काम करने थे। अफसरों की साठगांठ से कंपनी ने कई हजार बिलों को संशोधित कर तीन से चार करोड़ रुपये की रकम कम करा दी। करोड़ों का यह घोटाला कर कंपनी पिछले साल कारोबार समेटकर यहां से निकल गई। इसके बाद बिल संशोधन संबंधी रिकॉर्ड भी गायब कर दिया गया।
‘अमर उजाला’ के इस घोटाले का खुलासा करने के बाद जेई और कर्मचारी संगठन सक्रिय हो गए। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एपी मिश्रा ने मामले की जांच चीफ इंजीनियर बीपी वर्मा को सौंप दी। मंगलवार को वर्मा बरेली पहुंचे और पूरे दिन छानबीन की। उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड मांगा तो अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए। छानबीन कर वर्मा लौट गए। बताया जाता है कि वे जल्द फिर जांच करने आएंगे। इस मामले में स्थानीय स्तर पर भी जांच टीम बनी थी लेकिन उसने लीपापोती के अलावा कुछ नहीं किया।
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बिजली विभाग ने वर्ष 2010 में मीरगंज, फरीदपुर, बहेड़ी, आंवला, नवाबगंज और बरेली तहसील में कंप्यूटराइज बिलिंग शुरू कराने को निजी कंपनी एन साफ्ट को ठेका दिया था। कंपनी को मीटर रीडिंग, बिल बनाना और बांटना, चेक से भुगतान लेना और बकाएदारों की कनेक्शन काटने आदि काम करने थे। अफसरों की साठगांठ से कंपनी ने कई हजार बिलों को संशोधित कर तीन से चार करोड़ रुपये की रकम कम करा दी। करोड़ों का यह घोटाला कर कंपनी पिछले साल कारोबार समेटकर यहां से निकल गई। इसके बाद बिल संशोधन संबंधी रिकॉर्ड भी गायब कर दिया गया।
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‘अमर उजाला’ के इस घोटाले का खुलासा करने के बाद जेई और कर्मचारी संगठन सक्रिय हो गए। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एपी मिश्रा ने मामले की जांच चीफ इंजीनियर बीपी वर्मा को सौंप दी। मंगलवार को वर्मा बरेली पहुंचे और पूरे दिन छानबीन की। उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड मांगा तो अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए। छानबीन कर वर्मा लौट गए। बताया जाता है कि वे जल्द फिर जांच करने आएंगे। इस मामले में स्थानीय स्तर पर भी जांच टीम बनी थी लेकिन उसने लीपापोती के अलावा कुछ नहीं किया।
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