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फसल बीमा: सिस्टम ने नहीं मिलने दी किसानों को राहत
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बरेली। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मकसद प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करना था, मगर सरकारी सिस्टम ने केंद्र की इस योजना को ठीक से लागू नहीं किया। इससे बीते साल रबी और खरीफ की फसलों में बीमा कंपनी ने किसानों से 2.5 करोड़ से ज्यादा प्रीमियम तो बैंकों के जरिए तुरंत वसूल लिया, लेकिन जब किसानों को बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई का वक्त आया तो न ठीक से फसल नुकसान का सर्वे किया गया और न ही सर्वे में हुए नुकसान का मुआवजा समय पर मिला।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में खरीफ सीजन में बीमा कंपनी ने 23424 किसानों की 26869 हेक्टेयर एरिया की फसल का बीमा किया गया। उसमें किसानों के केसीसी खाते से बीमा कंपनी ने लगभग 1.75 करोड़ का प्रीमियम काटा। इसी तरह रबी सीजन में 14161 किसानों से 11940 हेक्टेयर एरिया में गेहूं व अन्य फसल का बीमा कराने के लिए 90 लाख से ज्यादा का प्रीमियम जमा कराया गया। दोनों फसलीय चक्र में किसानों से 2.65 करोड़ का प्रीमियम जमा कराने के बाद भी न तो कंपनी ने अपना दफ्तर बनाया। न ही किसानों को फसल नुकसान का सर्वे कराने के लिए समुचित व्यवस्था की। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के अनुसार बीमा कंपनी ने जो टोल फ्री नंबर जारी किया, वह अक्सर या तो उठता नहीं। अगर उठ भी गया तो टोल फ्री नंबर पर ठीक से जवाब नहीं मिलता।
बीते सीजन में ओलावृष्टि और बारिश-आंधी से फसलों की तबाही भी हुई, वह किसान अब भी अपना क्लेम पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पर न तो कृषि विभाग ठीक से जवाब दे रहा, न ही बैंकों से कुछ बताया जा रहा है। अब एक बार फिर से आंधी तूफान आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बीमा कंपनी पर किसानों की एक बार फिर से निगाहें लगी हैं कि किसानों के नुकसान की स्थिति में कंपनी की क्या भूमिका रहेगी?
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जिन किसानों की फसल का नुकसान प्राकृतिक आपदा की वजह से हुआ, उनका सर्वे कराने के बाद नुकसान का आकलन करके कंपनी को भेजा जा चुका है। फसल नुकसान का क्लेम पाने के लिए एक निर्धारित समय था। अब अगर ऐसी स्थिति आती है तो किसान टोल फ्री नंबर के अलावा ब्लॉकों, तहसील और कृषि विभाग के दफ्तर में नुकसान के 72 घंटे के अंदर लिखित सूचना देकर खेत का सर्वे करा सकते हैं। उनको क्लेम दिलाया जाएगा।
- धीरेंद्र सिंह चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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वित्तीय वर्ष 2018-19 में खरीफ सीजन में बीमा कंपनी ने 23424 किसानों की 26869 हेक्टेयर एरिया की फसल का बीमा किया गया। उसमें किसानों के केसीसी खाते से बीमा कंपनी ने लगभग 1.75 करोड़ का प्रीमियम काटा। इसी तरह रबी सीजन में 14161 किसानों से 11940 हेक्टेयर एरिया में गेहूं व अन्य फसल का बीमा कराने के लिए 90 लाख से ज्यादा का प्रीमियम जमा कराया गया। दोनों फसलीय चक्र में किसानों से 2.65 करोड़ का प्रीमियम जमा कराने के बाद भी न तो कंपनी ने अपना दफ्तर बनाया। न ही किसानों को फसल नुकसान का सर्वे कराने के लिए समुचित व्यवस्था की। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के अनुसार बीमा कंपनी ने जो टोल फ्री नंबर जारी किया, वह अक्सर या तो उठता नहीं। अगर उठ भी गया तो टोल फ्री नंबर पर ठीक से जवाब नहीं मिलता।
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बीते सीजन में ओलावृष्टि और बारिश-आंधी से फसलों की तबाही भी हुई, वह किसान अब भी अपना क्लेम पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। पर न तो कृषि विभाग ठीक से जवाब दे रहा, न ही बैंकों से कुछ बताया जा रहा है। अब एक बार फिर से आंधी तूफान आने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बीमा कंपनी पर किसानों की एक बार फिर से निगाहें लगी हैं कि किसानों के नुकसान की स्थिति में कंपनी की क्या भूमिका रहेगी?
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जिन किसानों की फसल का नुकसान प्राकृतिक आपदा की वजह से हुआ, उनका सर्वे कराने के बाद नुकसान का आकलन करके कंपनी को भेजा जा चुका है। फसल नुकसान का क्लेम पाने के लिए एक निर्धारित समय था। अब अगर ऐसी स्थिति आती है तो किसान टोल फ्री नंबर के अलावा ब्लॉकों, तहसील और कृषि विभाग के दफ्तर में नुकसान के 72 घंटे के अंदर लिखित सूचना देकर खेत का सर्वे करा सकते हैं। उनको क्लेम दिलाया जाएगा।
- धीरेंद्र सिंह चौधरी, जिला कृषि अधिकारी