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उस्ताद के बिना अधूरी हैं पहलवान सपना-मुस्कान

Mon, 08 Oct 2018 01:13 AM IST
Updated Mon, 08 Oct 2018 01:13 AM IST
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उस्ताद के बिना अधूरी हैं पहलवान सपना-मुस्कान
बरेली। दंगल फिल्म देख गीता-बबिता जैसा बनने का सपना लेकर कुश्ती लड़ने अखाड़े में उतरीं बरेली की सपना और मुस्कान ने अपने दम पर मंडल की टीम में तो जगह बना ली है, लेकिन बिना कोच के उन्हें नेशनल खेल पाने का अपना सपना साकार होता नहीं दिख रहा है। बदायूं में हुई मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में दोनों ने शानदार प्रदर्शन के दम पर मंडल की टीम में जगह पा ली है। अब उनका सपना प्रदेश में जीतकर नेशनल के लिए क्वालीफाई करना है।
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कोच न मिल पाने के कारण दोनों दंगल फिल्म देखकर ही कुश्ती के दांव-पेंच सीख रही हैं। रिक्खी सिंह गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली सपना के पिता उमेश पाल दुकान चलाते हैं तो मुस्कान के पिता हुकुम चंद प्राइवेट जॉब करते हैं। दोनों हरियाणा में महावीर सिंह फोगाट तक पहुंच गईं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते उन्हें वहां से लौटना पड़ा। अब मंडल की टीम में चुने जाने के बाद उनके हौसले बुलंद हुए हैं। दोनों का कहना है कि अच्छा कोच मिल जाए तो वह प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। अगर कोच नहीं मिला तो वह अपने दम पर प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता की तैयारी करेंगी।
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