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तीन डाक्टर समेत पांच आरोपी बरी, दो को दोषी ठहराया
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गंगाशील अस्पताल में दुष्कर्म मामला
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बरेली। छह साल पहले शहर के नामचीन गंगाशील अस्पताल में हुए दुष्कर्म मामले में शनिवार को अदालत ने फैसला सुना दिया। मामले में अदालत ने दो लोगोें को दोषी ठहराया जबकि तीन डाक्टरों समेत पांच लोगों को बरी कर दिया। दोषियों की सजा का फैसला सोमवार आठ अप्रैल को होगा। मामला अपर सत्र न्यायाधीश कृष्ण यादव की कोर्ट का है।
14 जुलाई 13 को गंगाशील अस्पताल में वहीं पर काम करने वाली एक अटेंडेट ने उसी अस्पताल के दो कर्मचारियों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। रिपोर्ट लड़की के पिता ने घटना के दो दिन बाद 16 जुलाई 13 को लिखाई। रिपोर्ट में कहा कि उनकी 18 साल की बेटी गंगाशील अस्पताल में डॉ. शालिनी माहेश्वरी की अटेंडेंट थी। घटना वाले दिन दोपहर के दो बजे अभियुक्त शिवराज जो डॉ. निशांत गुप्ता का अटेंडेंट था। उसने फर्स्ट फ्लोर पर काम करने के लिए उसकी बेटी को बुलाया। जब वह वहां पहुंची तो उसने अपने साथी नरसिंह की मदद से दरवाजा बंद कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार अभियुक्त शिवराज ने उसके साथ दुष्कर्म किया और नरसिंह ने उसके साथ दुराचार करने की कोशिश की। जख्मी हालत में उसे घर भेज दिया। घर आकर उसने पूरी घटना सुनाई। पिता ने डॉ. शालिनी माहेश्वरी को फोन किया तो उन्होंने तुरंत अस्पताल में बुलाकर उसका अल्ट्रासाउंड और इलाज कराया। पैसे का लालच देकर जुबान बंद रखने की बात कही। पुलिस में जाने की बात कहने पर जान से मारने की धमकी दी। वादी मुकदमा ने कहा कि उसने घटना के अगले दिन पुलिस में आने की कोशिश की पर जान के खतरे की वजह से बाहर नहीं निकला। बाद में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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विवेचना के बाद मामले में डॉ निशांत, डॉ. शालिनी, डॉ. दुष्यंत, मैनेजर संकेत बाली और मनीष वैष्णव को भी आरोपी बनाकर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई। मुकदमे में अभियोजन की ओर से सरकारी वकील जावेद अली खां के अलावा वादी के निजी अधिवक्ता शंकर सक्सेना ने पक्ष रखते हुए कुल चौदह गवाह पेश किए। कोर्ट ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए तीनों डाक्टरों के अलावा संकेत बाली और मनीष वैष्णव को उन पर लगे आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट अभियुक्त नरसिंह और शिवराज को दोषी ठहराया है। दोनों अभियुक्तों की सजा पर सोमवार को फैसला सुनाया जाएगा। अभियुक्त शिवराज घटना के समय से ही जेल में है।
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हाईकोर्ट में अपील करेंगे
बरेली। गंगाशील दुष्कर्म मामले में फैसला आने के बाद वादी के निजी अधिवक्ता शंकर सक्सेना ने कहा कि वह सेशन अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाऐंगे। जो लोग दोषमुक्त हुए है। हमारे विचार में उनके खिलाफ पत्रावली पर साक्ष्य मिटाने, घटना छुपाने, सूचना न देने तथा पीड़ित परिवार को धमकाने के पर्याप्त सुबूत है।