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मूल्यांकन न करने वाले शिक्षक नहीं ले पाएंगे प्रैक्टिकल

Wed, 23 May 2018 01:26 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 23 May 2018 01:26 AM IST
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No practicals for teachers neglecting copy checking duty
MJP Rohilkhand university
आगरा, मेरठ समेत प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों ने राजकीय और अनुदानित कॉलेजों के शिक्षकों के लिए मूल्यांकन में कॉपियों की संख्या निर्धारित कर दी है। उनको निर्धारित कॉपियां हर हाल में चेक करनी होती हैं। इन विश्वविद्यालयों से सबक लेते हुए एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी मूल्यांकन से दूर भागने वाले शिक्षकों को सबक सिखाने जा रहा है। जो शिक्षक मूल्यांकन कार्य नहीं करेंगे उनको कॉलेजों में प्रैक्टिकल लेने नहीं भेजा जाएगा। इसके अलावा उन्हें न तो संबद्धता पैनल में शामिल किया जाएगा और न ही कोऑर्डिनेटर बनाया जाएगा।
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दरअसल, इन दिनों विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक की कॉपियों का मूल्यांकन चल रहा है। सेल्फ फाइनेंस के शिक्षक तो मूल्यांकन कार्य में दिलचस्पी ले रहे हैं, लेकिन राजकीय और अनुदानित कॉलेजों के तमाम शिक्षक मूल्यांकन करने के बजाए गर्मियों की छुट्टियां मना रहे हैं। कई तो विदेशों की सैर पर निकल गए हैं। विश्वविद्यालय में अब भी कई लाख कॉपियां चेक होनी बाकी है। परीक्षा नियंत्रक ने जब परीक्षकों की सूची देखी तो इसमें बरेली और मुरादाबाद मंडल के करीब 50 राजकीय और अनुदानित कॉलेजों के शिक्षक मूल्यांकन में पहुंचे ही नहीं। विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन को लेकर कोई बाध्यता नहीं रखी तो इसका फायदा शिक्षक उठा रहे हैं। राजकीय और अनुदानित कॉलेज के शिक्षकों का वेतन अच्छा होने के कारण वह दस और बारह रुपये की कॉपी चेक करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। इसी के चलते विश्वविद्यालय कठोर कदम उठाने जा रहा है। सभी मूल्यांकन केंद्रों के कोऑर्डिनेटर से ऐसे शिक्षकों की सूची मांगी गई है जो मूल्यांकन में नहीं आए, ताकि उन्हें प्रैक्टिकल आदि कार्यों से वंचित किया जा सके।
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प्रैक्टिकल लेने में मिलता है ‘पैकेट’
कॉलेजों के प्रैक्टिकल के लिए शिक्षकों को विश्वविद्यालय की तरफ से प्रतिदिन के हिसाब से पैसा तो मिलता ही है साथ ही कॉलेजों में भी परीक्षकों का खासा ख्याल रख जाता है। विश्वविद्यालय के एक शिक्षक की मानें तो ज्यादातर सेल्फ फाइनेंस कॉलेज परीक्षकों को ‘पैकेट’ देते है। शायद यही वजह कि विश्वविद्यालय शिक्षकों से मूल्यांकन कार्य कराने के लिए प्रैक्टिकल का दांव चल रहा है।
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मूल्यांकन न करने वाले शिक्षकों से प्रैक्टिकल और अन्य कार्य भी नहीं लिए जाएंगे। मूल्यांकन कार्य भी उनकी जिम्मेदारी है। अन्य विश्वविद्यालयों ने तो एक शिक्षक को कितनी कॉपियां चेक करनी होंगी, यह संख्या निर्धारित कर दी है। -महेश कुमार परीक्षा नियंत्रक
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