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लोकसभा बस पांच साल की, व्यासपीठ का नाता परलोक तक
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लोकसभा बस पांच साल की, व्यासपीठ का नाता परलोक तक
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। बुधवार को मिशन शक्ति के जरिए प्रधानमंत्री ने दुनिया में भारत का परचम लहराया है। भारत ‘चौकीदारी’ करता है, यह इसका प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने जो कर दिखाया, उससे खुशी होना लाजिमी है। अन्त:करण में अध्यात्म और विज्ञान के जरिए नये-नये लक्ष्य सिद्ध हो रहे हैं। मैं बहादुर प्रधानमंत्री, वैज्ञानिकों और राष्ट्रपति को बधाई देता हूं।’ भारत के अंतरिक्ष की महाशक्ति बनने पर संत मोरारी बापू ने अपने भाव कुछ इसी अंदाज में जाहिर किए। इसके बाद उन्होंने श्रद्धालुओं को ‘मानस अपराध’ कथा का रसपान भी कराया।
मोरारी बापू ने कहा, ‘ठाकुर हमारे रमण बिहारी, हम हैं रमण बिहारी के, साधू सेवा धर्म हमारा, काम न दुनियादारी से’, ‘कोई भला कहे, कोई बुरा कहे, हम हो गये रमण बिहारी के।’ इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने कहा कि उन्हें सत्ता से कोई लेना-देना नही हैं। लोकसभा का चुनाव जीत भी गए तो महज पांच साल ही टिकोगे, लेकिन व्यासपीठ का टिकट ले लिया तो परलोक तक साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी कई ऐसे धर्म हैं जो कच्चे हैं। पालने में झूल रहे हैं। दरअसल, उन्हें नहीं पता कि धर्म एक फल है, जिसका रस सेवा है। उन्होंने सेवा भाव को सबसे बड़ा धर्म बताया। बोले, पूजा करना अच्छा है, लेकिन सेवा करना उससे भी बढ़कर है। हर मनुष्य में ठाकुर जी का वास है, इसलिए कमजोर, असहाय, निर्बल और निर्धन मानवों की सेवा करना ही सच्ची सेवा है। ‘जमाने में ऐसे कई नादान होते हैं, जहां ले जाते हैं कश्ती, वहां तूफान होते हैं’ के माध्यम से बताया, कितना भी समझाओ कुछ लोग जानबूझकर गलत रास्ता पकड़ते हैं।
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मोरारी बापू ने कहा, ‘ठाकुर हमारे रमण बिहारी, हम हैं रमण बिहारी के, साधू सेवा धर्म हमारा, काम न दुनियादारी से’, ‘कोई भला कहे, कोई बुरा कहे, हम हो गये रमण बिहारी के।’ इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने कहा कि उन्हें सत्ता से कोई लेना-देना नही हैं। लोकसभा का चुनाव जीत भी गए तो महज पांच साल ही टिकोगे, लेकिन व्यासपीठ का टिकट ले लिया तो परलोक तक साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी कई ऐसे धर्म हैं जो कच्चे हैं। पालने में झूल रहे हैं। दरअसल, उन्हें नहीं पता कि धर्म एक फल है, जिसका रस सेवा है। उन्होंने सेवा भाव को सबसे बड़ा धर्म बताया। बोले, पूजा करना अच्छा है, लेकिन सेवा करना उससे भी बढ़कर है। हर मनुष्य में ठाकुर जी का वास है, इसलिए कमजोर, असहाय, निर्बल और निर्धन मानवों की सेवा करना ही सच्ची सेवा है। ‘जमाने में ऐसे कई नादान होते हैं, जहां ले जाते हैं कश्ती, वहां तूफान होते हैं’ के माध्यम से बताया, कितना भी समझाओ कुछ लोग जानबूझकर गलत रास्ता पकड़ते हैं।
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आय का दसवां भाग सेवा में लगाएं
मोरारी बापू ने कहा, मनुष्य के पास पैसा खूब है, लेकिन प्रेम का अभाव है। उन्होंने सुझाव दिया कि धन को बंदी न बनाओ। आय का दस प्रतिशत हिस्सा सेवा में लगाना चाहिए। उन्होंने मौजूद फैक्टरी मालिकों को कर्मचारियों को दोपहर का भोजन कराने का सुझाव दिया। कथा कराने, शादियों में कम खर्च करने, शौचालय बनवाने और रसोई बनवाने की सलाह दी।
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