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नोटबंदी से तबाह रियल एस्टेट कारोबार में सर्किल रेट के कारण आई और मंदी

Thu, 03 Aug 2017 01:40 AM IST
Updated Thu, 03 Aug 2017 01:40 AM IST
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नोटबंदी से तबाह रियल एस्टेट कारोबार में सर्किल रेट के कारण आई और मंदी
नोटबंदी से तबाह रियल एस्टेट कारोबार में सर्किल रेट के कारण आई और मंदी - फोटो : Reuters
बरेली।
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नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट कारोबार पहले से ही तबाह है। सर्किल रेट और वास्तविक कीमत के अंतर ने जमीन को और महंगा कर दिया है। मंदी के इस दौर में छोटे-छोटे बिल्डर भूमिगत हो गए हैं। रियल एस्टेट मेें पूंजी निवेश करने वाले लोग भी किनारा कर गए हैं। कुछ लोगों ने तो प्रॉपर्टी के कारोबार से बजाए दूसरा काम तलाशना शुरू कर दिया है। नई कालोनियों में प्लाट नहीं बिक रहे हैं। जो प्लाट बिक गए हैं सर्कि ल रेट की वजह से उनके बैनामे नहीं हो पा रहे हैं।
बड़ा बाईपास पर साक्षी डेवलपर्स ने इस्कॉन सिटी के नाम से कालोनी बनानी शुरू की थी। यहीं कामाख्या रेंजीडेसी कालोनी भी बननी शुरू र्हुई थी। बीसलपुर रोड पर ग्रीन पार्क से आगे साहनी एन्फ्रा जोन के नाम से बंटी खान कालोनी बना रहे हैं। धनराज बिल्डर ने नकटिया नदी के किनारे कृष्णा कालोनी के नाम से प्लाटिंग शुरू की थी। बदायूं रोड पर करगैना में सुमंगलम कालोनी बनाने की नींव रख गई थी, लेकिन नोटबंदी के बाद ये बस नहीं पाईं। बलीपुर गांव के पास झुमका एस्टेट के नाम से समाजवादी आवास बनाने का दावा किया गया था, लेकिन समाजवादी पार्टी की सरकार जाने के बाद बीडीए में इसकी डिटेल प्रोजक्ट रिपोर्ट ही फेल हो गई। लिहाजा यह कालोनी पूरी ही नहीं हो पाई।
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केस-1
मैने रिठौरा में भड़सर रोड पर ढाई लाख रुपये बीघा से हिसाब से कृषि फार्म के लिए 40 बीघा जमीन खरीदी थी। एग्रीमेंट भी करा लिया था। सोचा यह था कि महंगाई होने पर बेच लेंगे, लेकिन सर्किल रेट छह लाख रुपये बीघा है। ऐसे में वह अब जमीन का बैनामा कराने की स्थिति में नहीं है। इसलिए जमीन का सौदा कैंसिल करके किसानों से अपना पैसा लेना है। - ललित गंगवार, कारोबारी
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केस-दो
मैने महानगर से सटे धौरहरा माफी गांव में ग्यारह बीघा जमीन 10 लाख रुपयेप्रति बीघा के हिसाब से खरीदी थी। पैसा इसलिए लगाया था कि आगे महंगाई होने पर बेच लेंगे, लेकिन यहां कृषि भूमि का सर्किल रेट तीस लाख रुपये बीघा है। आगे की 500 मीटर जमीन का न्यूनतम आवासीय रेट पर बैनामा कराना होगा, इसलिए किसानों को दिया एडवांस वापस लेना है। -अंकुश अग्रवाल, प्रॉपर्टी डीलर

केस-तीन
नरियावल में इंटरनेशल सिटी नाम से कॉलोनी बनाई है। नोटबंदी के पहले फर्स्ट फेस के 199 प्लाट बिक गए। नोटबंदी के बाद से हालात बेहद खराब हैं। प्रशासन ने सर्किल बढ़ाकर साढे़ नौ हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है। मंदी के इस दौर में सर्किल रेट बढ़ने से खरीदने वालों पर और अधिक असर पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि इस समस्या का व्यवहारिक हल निकाले। - राजेश गुप्ता, रियल एस्टेट कारोबारी

केस-चार
बीसलपुर रोड पर नई कालोनी में दो प्लाट खरीदकर पैसा इन्वेस्ट किया था। यहां आवासीय भूमि के रेट साढ़े चार हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हैं, जबकि सर्किल रेट सात हजार रुपये है। नोटबंदी के बाद प्लाट के खरीददार ही नहीं मिल रहे हैं। जो आता भी है, वह सर्किल रेेट की वजह से नहीं खरीदता है। - प्रेम केशवानी, भूमि एसोसिएट्स

शहर के जिन इलाकों में विकास हो सकता है वहां सर्किल रेट कम होना चाहिए, ताकि जरूरत होने पर लोग जमीन की खरीद सकें। बड़ा बाईपास की जमीनों के सर्किल रेट इतने बढ़ा दिए हैं कि वहां जमीन खरीदना मुश्किल है। प्रशासन को शहर के विकास के लिए इस पर विचार करना चाहिए। - डॉ. केशव अग्रवाल, निदेशक, रुहेलखंड मेडिकल, कालेज

नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट का बुरा हाल है। सर्किल रेट बढ़ने से और ज्यादा असर पड़ रहा है। गरीब आदमी घर बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। जमीन की बिक्री बंद होने से शहर का विकास रुक गया है। शासन को इसे लेकर नीति बनाने के बाद व्यवहारिक फैसला लेना चाहिए। - अजय अग्रवाल, डेवलपर्स

बड़ा बाईपास
बड़ा बाईपास किनारे की जमीन का रेट दो करोड़ रुपये हेक्टेयर है, जबकि यहां चार लाख रुपये बीघा तक जमीन आसानी से मिल रही है। बीडीए ने रोड के किनारे दो सौ मीटर तक की जमीन को ग्रीन बेल्ट घोषित करके किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा रखी है। इससे किसानों का सपना चकनाचूर हो गया है। बाईपास के आसपास के गांव के किसानों ने सोचा था कि जमीन के दाम बढ़ जाएंगे, लेकिन ग्रीन बेल्ट होने की वजह से उनकी जमीन की बेकद्री हो गई। वह खेती के अलावा जमीन में कुछ नहीं कर सकते हैं।

रामपुर रोड
इस रोड का सर्किल रेट 30 हजार रुपये है, जबकि होंडा कार एजेंसी के पीछे ही जमीन 10-15 हजार रु पये गज बिक रही है। बड़ा प्लाट और सस्ते में मिल जाता है। इसके बाद भी सर्किल रेट पर किसी ने विचार नहीं किया। पूरे सीबीगंज इलाके का यही हाल है। फतेहगंज पश्चिमी रोड तक यही हाल है। सर्किल रेट ज्यादा होने की वजह से किसानों की जमीन नहीं बिक पा रही है।

नैनीताल रोड
इस रोड का सर्किल रेट 22 से 25 हजार रुपये मीटर है, जबकि यहां 10 से 12 हजार तक में जमीन आसानी से मिल रही है। ऐसे में घर बनाने के लिए जमीन खरीदने वाले भी हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं। इसी रोड पर पीपलसाना और भोजीपुरा के सर्किल रेटों में भी काफी फर्क है, जिसकी वजह से किसानों की भूमि नहीं बिक पा रही है।


पीलीभीत रोड
इस रोड का सर्किल रेट 28 से 30 हजार रुपये है। अंदर के रोडों पर 12 से 13 हजार तक सर्किल रेट रखा गया है, इसलिए यहीं सबसे ज्यादा खरीददार हैं। इस रोड की कालोनियों में सबसे ज्यादा प्लाट बिक रहे हैं। रोड के आसपास की कालोनियों में भी प्लाटों की री-सेल वैल्यू ठीक है। कालोनाइजरों का काम भी सही चल रहा है।
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