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Bareilly News: स्नातक में 61,000 सीटें खाली, एक लाख से अधिक हुए पंजीकरण
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूसरे चरण के पंजीकरण किए जा रहे हैं। शनिवार शाम तक दो लाख सीटों के लिए 1.39 लाख विद्यार्थियों ने आवेदन किया। सीटें खाली रहने के पीछे विशेषज्ञ रेगुलर कक्षाएं नहीं लगने और प्रचार-प्रसार में कमी को भी कारण मानते हैं।
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 25 जुलाई तक स्नातक के लिए पंजीकरण किए जाएंगे। दो बार पंजीकरण की तिथि बढ़ाए जाने के बाद भी स्नातक में 61 हजार सीटें खाली हैं। वहीं, कॉलेजों में बीए के बाद बीएससी (बायो समूह) में अधिक आवेदन आए हैं। सबसे खराब स्थिति बीएससी गणित समूह की रही। इसमें सीटों के बराबर भी पंजीकरण नहीं हो सके। यही हाल कॉलेजों में संचालित स्नातक स्तर के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का हुआ है। मुख्य प्रवेश समन्वयक प्रो. एसके पांडे के अनुसार शनिवार शाम तक 1.39 लाख पंजीकरण किए गए। वहीं, कॉलेजों की ओर से कटऑफ जारी कर प्रवेश किए जा रहे हैं, लेकिन कई पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी रुचि नहीं ले रहे हैं।
बरेली कॉलेज के पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों के भीतर परंपरागत विषयों के प्रति रुचि कम हो रही है। वे ऐसे पाठ्यक्रम को चुनना चाहते हैं, जिससे उन्हें आगे चलकर रोजगार मिल सके। एनईपी के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है। नियमित कक्षाएं लगाने से भी विद्यार्थियों के आवेदन बढ़ सकते हैं। शिक्षाविद डॉ. अनुराग मोहन भटनागर का कहना है कि एनईपी से भी विद्यार्थियों का स्नातक की तरफ झुकाव कम हुआ है। सत्र को नियमित किया जाए, जिससे विद्यार्थी सिर्फ परीक्षाएं देने में व्यस्त न रहें। इसके साथ ही संस्थानों को प्रवेश के प्रति प्रसार-प्रसार करने की जरूरत है। संवाद
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विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 25 जुलाई तक स्नातक के लिए पंजीकरण किए जाएंगे। दो बार पंजीकरण की तिथि बढ़ाए जाने के बाद भी स्नातक में 61 हजार सीटें खाली हैं। वहीं, कॉलेजों में बीए के बाद बीएससी (बायो समूह) में अधिक आवेदन आए हैं। सबसे खराब स्थिति बीएससी गणित समूह की रही। इसमें सीटों के बराबर भी पंजीकरण नहीं हो सके। यही हाल कॉलेजों में संचालित स्नातक स्तर के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का हुआ है। मुख्य प्रवेश समन्वयक प्रो. एसके पांडे के अनुसार शनिवार शाम तक 1.39 लाख पंजीकरण किए गए। वहीं, कॉलेजों की ओर से कटऑफ जारी कर प्रवेश किए जा रहे हैं, लेकिन कई पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी रुचि नहीं ले रहे हैं।
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बरेली कॉलेज के पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों के भीतर परंपरागत विषयों के प्रति रुचि कम हो रही है। वे ऐसे पाठ्यक्रम को चुनना चाहते हैं, जिससे उन्हें आगे चलकर रोजगार मिल सके। एनईपी के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत है। नियमित कक्षाएं लगाने से भी विद्यार्थियों के आवेदन बढ़ सकते हैं। शिक्षाविद डॉ. अनुराग मोहन भटनागर का कहना है कि एनईपी से भी विद्यार्थियों का स्नातक की तरफ झुकाव कम हुआ है। सत्र को नियमित किया जाए, जिससे विद्यार्थी सिर्फ परीक्षाएं देने में व्यस्त न रहें। इसके साथ ही संस्थानों को प्रवेश के प्रति प्रसार-प्रसार करने की जरूरत है। संवाद
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