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जीएसटी: सुबह से रात तक कोई नफा-नुकसान नहीं
डॉ. पवन चंद्र, बरेली
Updated Tue, 04 Jul 2017 01:08 AM IST
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जीएसटी: सुबह से रात तक कोई नफा-नुकसान नहीं
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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जीएसटी का असर हमारे दिन की शुरुआत से लेकर और रात में बिस्तर पर सोने जाने तक हो रहा है, हालांकि इसकी दरें शून्य से लेकर 28 फीसदी तक ही हैं। इस टैक्स की भिन्नता को समझने के लिए हमारे संवाददाता ने सरकार की तरफ से विभिन्न वस्तुओं पर प्रस्तावित जीएसटी दरों की समीक्षा एक मध्यम वर्गीय परिवार पर पड़ने वाले असर से की। यहां हमने एक ऐसे मध्यम वर्गीय परिवार की कल्पना की है जिसके दिन की शुरुआत सुबह घर की साफ-सफाई से होती है। परिवार ने यह पाया कि उसे जीएसटी में नफा या नुकसान नहीं हुआ है।
52 साल के अग्रवाल जी बिहारीपुर कहरवान इलाके से हैं, उनके दिन की शुरुआत सुबह पेस्ट, साबुन, टूथब्रश व अन्य साफ सफाई के कामों से होती है। इन उत्पादों पर जीएसटी की नई दरें 12 से 28 फीसदी के बीच तय की गई हैं। वहीं फूलझाड़ू से साफ-सफाई में जुटीं मिसेज अग्रवाल काफी खुश हैं। कहती हैं कि चलो पेस्ट तो काफी कम खर्च होता है, लेकिन दूध, अंडा, दही, पनीर तो रसोई में सस्ता आएगा। थोड़ा कहते हुए चुप हो गईं बोली नहाने का साबुन-तेल तो 18 फीसदी में है।
खैर, अग्रवाल साहब का चार लोगों का परिवार अब नाश्ते की टेबल पर बैठता है। यहां वह कुछ राहत महसूस करते हैं। कारण, चाय, ब्रेड, कॉफी, बटर, बिस्किट, दही, जूस, फल पर अभी 5 से 38 फीसदी का कुल कर देना होता था, लेकिन अब जीएसटी में इन उत्पादों पर शून्य से पांच फीसदी के बीच शुल्क अदा करना होगा। यही नहीं अगर अग्रवाल साहब का परिवार देशी नाश्ता करता है यानी पराठे, सब्जी, दूध, अंडे आदि का तो उनके बजट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि इन उत्पादों पर अब तक जीरो टैक्स लगता था और जीएसटी में भी यही लागू है।
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नाश्ते के बाद सभी लोग अपने-अपने काम पर निकलते हैं और मिसेज अग्रवाल शॉपिंग करने। आज उन्हें पूरे घर के लिए ब्रांडेड जूते, कपड़े, परफ्यूम आदि खरीदना है। इस वर्ग के ब्रांडेड उत्पादों पर अभी 22 फीसदी कर लगता था, जो जीएसटी के तहत बढ़कर 28 फीसदी हो गया है। वहीं फिल्म देखने पर भी टैक्स 28 फीसदी है, जो पहले 22 फीसदी था।
अग्रवाल साहब के परिवार समेत तमाम परिवार आज की तारीख में अपने वेतन का अच्छा खासा रुपया होम लोन, बीमा, मोबाइल बिल के तौर पर देते हैं। इन भुगतान पर अभी 15 फीसदी सेवा कर देना पड़ता था, जबकि जीएसटी के तहत इन सेवाओं पर 18 फीसदी शुल्क लगा दिया गया है। वाहन लोन की मासिक किस्त पर सेवा कर को 31 फीसदी से घटाकर 28 फीसदी कर दिया गया है। यहां भी थोड़ी राहत अग्रवाल साहब को मिलेगी।
हां, अगर रात का खाना खाने यह परिवार किसी बहुत बड़े रेस्टोरेंट में जाता (पांच सितारा नहीं) है तो उन्हें ज्यादा बिल चुकाना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें खाने के बिल पर 18 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा, जबकि अभी तक यह केवल 15 फीसदी ही था, लेकिन अगर छोटे रेस्टोरेंट, (टर्नओवर सालाना 50 लाख रुपये से कम) में वह खाना खाते हैं तो सिर्फ पांच फीसदी ही कर देना होगा। यहां बता दें कि पांच सितारा रेस्टोरेंट में खाने पर 28 फीसदी टैक्स है।
छोटी ही सही पर, बचत तो हो रही है
अग्रवाल साहब का परिवार 8000 रुपये खाने व नाश्ते पर खर्च करता है। अगर वह इसका 3000 रुपये चाय, काफी, मिठाइयों, जूस, बटर बिस्किट, पैक्ड आइटमों पर खर्च करता है तो उसके मासिक बजट में 150-200 रुपये की कमी की उम्मीद की जा सकती है। वहीं शॉपिंग में मिसेज अग्रवाल ने 10 हजार रुपये की खरीदारी की है तो उन्हें जीएसटी लागू होने के बाद तकरीबन 600 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। मिसेज अग्रवाल को शॉपिंग और फिल्म देखकर जो थोड़ा नुकसान हुआ था उसकी भरपाई वह एक छोटे रेस्टोरेंट में खाना खाकर कर चुकी हैं।
- प्रखर अग्रवाल, सीए
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जीएसटी का असर हमारे दिन की शुरुआत से लेकर और रात में बिस्तर पर सोने जाने तक हो रहा है, हालांकि इसकी दरें शून्य से लेकर 28 फीसदी तक ही हैं। इस टैक्स की भिन्नता को समझने के लिए हमारे संवाददाता ने सरकार की तरफ से विभिन्न वस्तुओं पर प्रस्तावित जीएसटी दरों की समीक्षा एक मध्यम वर्गीय परिवार पर पड़ने वाले असर से की। यहां हमने एक ऐसे मध्यम वर्गीय परिवार की कल्पना की है जिसके दिन की शुरुआत सुबह घर की साफ-सफाई से होती है। परिवार ने यह पाया कि उसे जीएसटी में नफा या नुकसान नहीं हुआ है।
52 साल के अग्रवाल जी बिहारीपुर कहरवान इलाके से हैं, उनके दिन की शुरुआत सुबह पेस्ट, साबुन, टूथब्रश व अन्य साफ सफाई के कामों से होती है। इन उत्पादों पर जीएसटी की नई दरें 12 से 28 फीसदी के बीच तय की गई हैं। वहीं फूलझाड़ू से साफ-सफाई में जुटीं मिसेज अग्रवाल काफी खुश हैं। कहती हैं कि चलो पेस्ट तो काफी कम खर्च होता है, लेकिन दूध, अंडा, दही, पनीर तो रसोई में सस्ता आएगा। थोड़ा कहते हुए चुप हो गईं बोली नहाने का साबुन-तेल तो 18 फीसदी में है।
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खैर, अग्रवाल साहब का चार लोगों का परिवार अब नाश्ते की टेबल पर बैठता है। यहां वह कुछ राहत महसूस करते हैं। कारण, चाय, ब्रेड, कॉफी, बटर, बिस्किट, दही, जूस, फल पर अभी 5 से 38 फीसदी का कुल कर देना होता था, लेकिन अब जीएसटी में इन उत्पादों पर शून्य से पांच फीसदी के बीच शुल्क अदा करना होगा। यही नहीं अगर अग्रवाल साहब का परिवार देशी नाश्ता करता है यानी पराठे, सब्जी, दूध, अंडे आदि का तो उनके बजट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि इन उत्पादों पर अब तक जीरो टैक्स लगता था और जीएसटी में भी यही लागू है।
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नाश्ते के बाद सभी लोग अपने-अपने काम पर निकलते हैं और मिसेज अग्रवाल शॉपिंग करने। आज उन्हें पूरे घर के लिए ब्रांडेड जूते, कपड़े, परफ्यूम आदि खरीदना है। इस वर्ग के ब्रांडेड उत्पादों पर अभी 22 फीसदी कर लगता था, जो जीएसटी के तहत बढ़कर 28 फीसदी हो गया है। वहीं फिल्म देखने पर भी टैक्स 28 फीसदी है, जो पहले 22 फीसदी था।
अग्रवाल साहब के परिवार समेत तमाम परिवार आज की तारीख में अपने वेतन का अच्छा खासा रुपया होम लोन, बीमा, मोबाइल बिल के तौर पर देते हैं। इन भुगतान पर अभी 15 फीसदी सेवा कर देना पड़ता था, जबकि जीएसटी के तहत इन सेवाओं पर 18 फीसदी शुल्क लगा दिया गया है। वाहन लोन की मासिक किस्त पर सेवा कर को 31 फीसदी से घटाकर 28 फीसदी कर दिया गया है। यहां भी थोड़ी राहत अग्रवाल साहब को मिलेगी।
हां, अगर रात का खाना खाने यह परिवार किसी बहुत बड़े रेस्टोरेंट में जाता (पांच सितारा नहीं) है तो उन्हें ज्यादा बिल चुकाना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें खाने के बिल पर 18 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा, जबकि अभी तक यह केवल 15 फीसदी ही था, लेकिन अगर छोटे रेस्टोरेंट, (टर्नओवर सालाना 50 लाख रुपये से कम) में वह खाना खाते हैं तो सिर्फ पांच फीसदी ही कर देना होगा। यहां बता दें कि पांच सितारा रेस्टोरेंट में खाने पर 28 फीसदी टैक्स है।
छोटी ही सही पर, बचत तो हो रही है
अग्रवाल साहब का परिवार 8000 रुपये खाने व नाश्ते पर खर्च करता है। अगर वह इसका 3000 रुपये चाय, काफी, मिठाइयों, जूस, बटर बिस्किट, पैक्ड आइटमों पर खर्च करता है तो उसके मासिक बजट में 150-200 रुपये की कमी की उम्मीद की जा सकती है। वहीं शॉपिंग में मिसेज अग्रवाल ने 10 हजार रुपये की खरीदारी की है तो उन्हें जीएसटी लागू होने के बाद तकरीबन 600 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। मिसेज अग्रवाल को शॉपिंग और फिल्म देखकर जो थोड़ा नुकसान हुआ था उसकी भरपाई वह एक छोटे रेस्टोरेंट में खाना खाकर कर चुकी हैं।
- प्रखर अग्रवाल, सीए