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शुद्धता भूल जाएं... मावा में शकरकंद, मैदा, अरारोट और रिफाइंड की भरमार
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बरेली। होली के लिए अगर आपका इरादा मावा या उससे बनी रेडीमेड गुझिया खरीदने का है तो आपको पहले थोड़ा सतर्क हो जाने की जरूरत है। कहीं ऐसा न हो कि आप बाजार से मिलावटी मावा या उससे बनी गुझिया खरीद लाएं जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा दे। खास बात यह है कि सिर्फ देखने भर से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि असली मावा कौन सा है और नकली कौन सा। स्वाद में भी बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता क्योंकि मिलावटखोरी के उस्ताद सिंथेटिक मावे में शुद्ध मावे जैसी खुशबू लाने के लिए एसेंस भी मिलाने लगे हैं।
ऐसे बनता है नकली मावा
सपरेटा दूध में पांच-छह गुना पानी और अरारोट मिलाकर बड़ी कड़ाही में उसे गरम किया जाता है। अरारोट से दूध गाढ़ा होने के बाद उसमें रिफाइंड, मैदा, उबला आलू और शकरकंद मिलाकर मावा तैयार कर लिया जाता है। एक किलो मिलावटी मावे में दो-ढाई सौ ग्राम असली मावा भी मिलाया जाता है। यह देखने में हल्का पीले कलर का दिखता है। मिलावटखोर मिलावटी मावे में एसेंस का भी इस्तेमाल करते हैं ताकि उसकी सुगंध असली मावे जैसी लगे। बाजार में एसेंस की शीशी 35 से 40 रुपये में आसानी से मिल जाती है। एक कारोबारी के मुताबिक एक किलो मिलावटी मावा बनाने में सिर्फ 60 से 80 रुपये तक की लागत आती है जबकि बाजार में मावे का रेट 220 से 250 रुपये किलो है जो होली तक 350 रुपये किलो तक पहुंचने के आसार हैं।
ऐसे करें नकली मावे की पहचान
1- देखने में हल्का पीला रंग
2- असली मावे की तुलना में ज्यादा भारी
3- बड़ी-बड़ी पिंडी में बनाया जाता है
4- शुद्ध मावे की तुलना में थोड़ा मीठा स्वाद
5- शुद्ध मावे के मुकाबले थोड़ा सख्त
6- हाथ में रगड़ने पर हल्के दाने से महसूस होते हैं
7- जल्द खराब नहीं होता जबकि शुद्ध मावा गर्मी में 24 घंटे बाद खट्टा लगने लगता है
ये हैं मिलावटी मावे के नुकसान
1- मिलावटी मावा खाने से पेट फूलने लगता है
2- ज्यादा मात्रा में खाने पर उल्टी और डायरिया का खतरा
3- लिवर और किडनी खराबी का डर
4- रिफाइंड की मात्रा होने से वजन का बढ़ना
कहां बनता है मिलावटी मावा
बिनावर, आंवला, विशारतगंज, फरीदपुर, नकटिया, नरियावल, नवाबगंज में (लभेड़ा), सेंथल, भमौरा, देवचरा, सरदार नगर, चांडपुर, चौबारी समेत रामगंगा नदी के उस पर के एक दर्जन से अधिक गांवों में बड़े पैमाने पर मिलावटी मावा बनता है। इसकी सबसे बड़ी मंडी बिनावर में है। यहां से बरेली, बदायूं और मुरादाबार को मिलावटी मावे की सप्लाई होती है।
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ऐसे बनता है नकली मावा
सपरेटा दूध में पांच-छह गुना पानी और अरारोट मिलाकर बड़ी कड़ाही में उसे गरम किया जाता है। अरारोट से दूध गाढ़ा होने के बाद उसमें रिफाइंड, मैदा, उबला आलू और शकरकंद मिलाकर मावा तैयार कर लिया जाता है। एक किलो मिलावटी मावे में दो-ढाई सौ ग्राम असली मावा भी मिलाया जाता है। यह देखने में हल्का पीले कलर का दिखता है। मिलावटखोर मिलावटी मावे में एसेंस का भी इस्तेमाल करते हैं ताकि उसकी सुगंध असली मावे जैसी लगे। बाजार में एसेंस की शीशी 35 से 40 रुपये में आसानी से मिल जाती है। एक कारोबारी के मुताबिक एक किलो मिलावटी मावा बनाने में सिर्फ 60 से 80 रुपये तक की लागत आती है जबकि बाजार में मावे का रेट 220 से 250 रुपये किलो है जो होली तक 350 रुपये किलो तक पहुंचने के आसार हैं।
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ऐसे करें नकली मावे की पहचान
1- देखने में हल्का पीला रंग
2- असली मावे की तुलना में ज्यादा भारी
3- बड़ी-बड़ी पिंडी में बनाया जाता है
4- शुद्ध मावे की तुलना में थोड़ा मीठा स्वाद
5- शुद्ध मावे के मुकाबले थोड़ा सख्त
6- हाथ में रगड़ने पर हल्के दाने से महसूस होते हैं
7- जल्द खराब नहीं होता जबकि शुद्ध मावा गर्मी में 24 घंटे बाद खट्टा लगने लगता है
ये हैं मिलावटी मावे के नुकसान
1- मिलावटी मावा खाने से पेट फूलने लगता है
2- ज्यादा मात्रा में खाने पर उल्टी और डायरिया का खतरा
3- लिवर और किडनी खराबी का डर
4- रिफाइंड की मात्रा होने से वजन का बढ़ना
कहां बनता है मिलावटी मावा
बिनावर, आंवला, विशारतगंज, फरीदपुर, नकटिया, नरियावल, नवाबगंज में (लभेड़ा), सेंथल, भमौरा, देवचरा, सरदार नगर, चांडपुर, चौबारी समेत रामगंगा नदी के उस पर के एक दर्जन से अधिक गांवों में बड़े पैमाने पर मिलावटी मावा बनता है। इसकी सबसे बड़ी मंडी बिनावर में है। यहां से बरेली, बदायूं और मुरादाबार को मिलावटी मावे की सप्लाई होती है।
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