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निगम के प्रोजेक्ट निगम के कामों पर फैली रार, निर्माण से पहले शुरू हुई जांच
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बरेली। नगर निगम और प्रशासनिक अफसरों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। निगम के कामों को लेकर रार फैल गई है। 14वें वित्त के अंतर्गत विकास कार्यों की मंजूरी के लिए होने वाली बैठक के लिए जहां कमिश्नर की तारीख नहीं मिल पा रही है, वहीं स्मार्ट सिटी का बजट मिलने के बावजूद काम की स्थिति नहीं बन रही है। मेयर उमेश गौतम का आरोप है कि अफसरों की लापरवाही के 71.5 करोड़ रुपये लैप्स होने की कगार पर जबकि विकास कार्य कराना चाहते हैं।
पिछले दिनों स्मार्ट सिटी की बैठक में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंसी ने तीन प्रोजेक्ट पेश किए थे, मगर इन प्रोजेक्ट को प्रशासनिक अफसरों की मंजूरी नहीं मिली। स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम को 53 करोड़ रुपये का बजट मिल गया है और अगर जल्द ही इनसे विकास कार्य नहीं शुरू कराए तो यह राशि फंस जाएगी। ऐसे ही 14वें वित्त आयोग के तहत नगर निगम को 18.5 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जिनसे नाली, डिवाइडर, सड़क आदि के करीब 150 विकास कार्य होने हैं। इनकी लिस्ट बनाकर नगर निगम की ओर से बैठक की तारीख के लिए दो बार कमिश्नरी भेजी जा चुकी है, मगर अब तक बैठक की तारीख नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि कमिश्नर ने पहले इन कामों की जरूरत चेक कराने के निर्देश दिए हैं और उसके बाद ही स्वीकृति देने की बात कही है।
मंत्री ने की कान्हा उपवन की तारीफ कमिश्नर ने कमियों की झड़ी लगाई
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने उद्घाटन के दौरान कान्हा पशु आश्रय गृह को काफी पसंद किया था। मंच से ही कान्हा के साथ ही नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को भी शाबासी दी थी। मगर बुधवार को कमिश्नर ने जब यहां का निरीक्षण किया तो उन्होंने खामियों की झड़ी लगा दी। इसमें उन्होंने न सिर्फ बजट का दुरुपयोग बताया बल्कि संचालन भी अवैध तरीके से होने की बात कही।
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जनता को भाजपा की निगम सरकार से काफी उम्मीदें हैं लेकिन कुछ अफसर नहीं चाहते कि काम जमीन पर दिखें। वही लोग काम रोक रहे हैं और मीटिंग नहीं कर रहे हैं। यही हाल रहा तो जनता इन अधिकारियों से हिसाब लेगी। निजी स्वार्थ के लिए विकास कार्य नहीं रोके जाने चाहिए और ऐसा करने का अधिकार किसी को नहीं है। बैठक न होने के चलते 71.5 करोड़ के 150 से ज्यादा काम अटके हैं। - उमेश गौतम, मेयर
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पिछले दिनों स्मार्ट सिटी की बैठक में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंसी ने तीन प्रोजेक्ट पेश किए थे, मगर इन प्रोजेक्ट को प्रशासनिक अफसरों की मंजूरी नहीं मिली। स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम को 53 करोड़ रुपये का बजट मिल गया है और अगर जल्द ही इनसे विकास कार्य नहीं शुरू कराए तो यह राशि फंस जाएगी। ऐसे ही 14वें वित्त आयोग के तहत नगर निगम को 18.5 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जिनसे नाली, डिवाइडर, सड़क आदि के करीब 150 विकास कार्य होने हैं। इनकी लिस्ट बनाकर नगर निगम की ओर से बैठक की तारीख के लिए दो बार कमिश्नरी भेजी जा चुकी है, मगर अब तक बैठक की तारीख नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि कमिश्नर ने पहले इन कामों की जरूरत चेक कराने के निर्देश दिए हैं और उसके बाद ही स्वीकृति देने की बात कही है।
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मंत्री ने की कान्हा उपवन की तारीफ कमिश्नर ने कमियों की झड़ी लगाई
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने उद्घाटन के दौरान कान्हा पशु आश्रय गृह को काफी पसंद किया था। मंच से ही कान्हा के साथ ही नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव को भी शाबासी दी थी। मगर बुधवार को कमिश्नर ने जब यहां का निरीक्षण किया तो उन्होंने खामियों की झड़ी लगा दी। इसमें उन्होंने न सिर्फ बजट का दुरुपयोग बताया बल्कि संचालन भी अवैध तरीके से होने की बात कही।
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जनता को भाजपा की निगम सरकार से काफी उम्मीदें हैं लेकिन कुछ अफसर नहीं चाहते कि काम जमीन पर दिखें। वही लोग काम रोक रहे हैं और मीटिंग नहीं कर रहे हैं। यही हाल रहा तो जनता इन अधिकारियों से हिसाब लेगी। निजी स्वार्थ के लिए विकास कार्य नहीं रोके जाने चाहिए और ऐसा करने का अधिकार किसी को नहीं है। बैठक न होने के चलते 71.5 करोड़ के 150 से ज्यादा काम अटके हैं। - उमेश गौतम, मेयर