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अवैध कालोनी और अफसरों के बीच अटूट दीवार बने ‘पप्पू भरतौल’
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बरेली। सौ फुटा रोड पर बृहस्पतिवार को पुलिस-पीएसी का भारी लावलश्कर लेकर अवैध कॉलोनी ध्वस्त करने पहुंचे बीडीए-प्रशासन के अफसरों और कॉलोनी के बीच बिथरी के विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल दीवार बनकर खड़े हो गए। विधायक ने बीडीए सचिव और सिटी मजिस्ट्रेट से पूछा कि जब अवैध निर्माण चल रहा था, तब आप लोग कहां थे। अब कॉलोनी में इतना पैसा लग चुका है तो उसे तोड़ने चले आए। उन्होंने कहा कि बीडीए कॉलोनी तोड़ने के बजाय कॉलोनाइरों से जुर्माना लेकर मामला कंपाउंड करे। सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव कार्रवाई करने पर अड़े तो विधायक से कई बार उनकी नोकझोंक भी हुई। विधायक के लगातार शांत करने के बावजूद उनके समर्थक भी अफसरों से बदसलूकी पर उतर आए। विधायक और अफसरों के बीच यह जद्दोजहद दो घंटे तक चली, लेकिन अफसर फिर भी अवैध कॉलोनी पर जेसीबी का पंजा नहीं चलवा पाए। विधायक के आने से पहले अफसर एक मकान का जो आंशिक हिस्सा तुड़वा चुके थे, वहीं अपनी कार्रवाई बंद कर उन्हें लौटना पड़ा।
सौ फुटा रोड पर बनी अवैध कॉलोनियों गिराने के लिए बीडीए ने प्रशासन से सिटी मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने की मांग की थी। तय कार्यक्रम के अनुसार बृहस्पतिवार को बीडीए सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और एक्सईएन जहीरुद्दीन की अगुवाई में सुबह 10.30 बजे बीडीए की 12 सदस्यीय टीम थाना इज्जतनगर पहुंच गई। एक-डेढ़ घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला भी पहुंच गए। कॉलोनी गिराने के लिए इसके बाद भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ चार जेसीबी लेकर अफसरों की टीम सौ फुटा रोड पर राधा एन्क्लेव पहुंची। कॉलोनी में पहुंचकर बीडीए की जेसीबी ने जैसे ही एक मकान पर पंजा चलाना शुरू किया कि भाजपा विधायक पप्पू भरतौल भी दर्जनों समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। विधायक ने पहले तो जेसीबी रुकवाई और फिर सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव से कहा कि जो तोड़फोड़ होनी थी, हो चुकी। अब और कुछ करने की जरूरत नहीं है। तोड़फोड़ के बजाय कालोनाइजरों से जुर्माना लेकर कंपाउंडिंग कर दो। अफसरों ने इंकार किया तो नोकझोंक शुरू हो गई।
विधायक से नोकझोंक के दौरान उनके समर्थक भी अफसरों पर उग्र होने लगे। साथ गया फोर्स इस दौरान शांत खड़ा रहा। लोग अपने मकानों की छतों, दीवारों और गेट पर जमा होने लगे। विधायक की बीडीए सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला से काफी देर नोकझोंक हुई। आखिरकार अफसर इस बात पर विधायक को रजामंद करने की कोशिश करने लगे कि दो-चार मकान गिर जाने दो, बाकी पर मामला कंपाउंड करा देंगे। मगर विधायक नहीं मानें। उन्होंने कहा कि वह बीडीए वीसी से खुद उनके ऑफिस जाकर बात कर लेंगे। जेसीबी फौरन वापस करो। आखिरकार बीडीए की जेसीबी वापस हो गई।
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थाने में टीम पहुंचते ही फोन पर बजने लगीं घंटियां
थाने में टीम पहुंची तो अफसरों के फोन घनघनाने लगे। कभी उनके पास विधायक तो कभी उच्चाधिकारियों के फोन आ रहा था। विधायक कालोनी को ध्वस्त न करने का दबाव बना रहे थे, जबकि उच्चाधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव से अपना काम जारी रखने के निर्देश दे रहे थे। थाने के अंदर यह हाई वोल्टेज ड्रामा एक बजे तक चलता रहा। अंत में तय हो गया कि बीडीए की टीम सिटी मजिस्ट्रेट और फोर्स ले जाकर हर हाल में अवैध कालोनी ध्वस्त करेगी। देखते ही देखते बीडीए की चार जेसीबी भारी भरकम लाव लश्कर के साथ सौ फुटा रोड पर पहुंच गईं।
भरतौल बोले- अफसर लेते हैं पैसा, सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा- नेता कहां पीछे
इंस्पेक्टर इज्जतनगर बुदबुदाए- अवैध कॉलोनी का पैसा हमें कहां, बीडीए वाले ही लेते होंगे
अवैध कॉलोनी गिराने पहुंचे अफसरों से विधायक पप्पू भरतौल की नोकझोंक इस कदर बढ़ी कि भरतौल ने सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव के मुंह पर ही कह दिया कि अवैध कॉलोनी ऐसे ही नहीं बनतीं। अफसर ही उन्हें बसाने का पैसा लेते हैं। उन्होंने कहा कि विधायक बनने से पहले वह जब खुद कॉलोनाइजिंग करते थे, तब 2005-06 में एक कॉलोनी का नक्शा पास कराने के लिए बीडीए के चक्कर लगाते-लगाते उनकी चप्पलें घिस गईं थीं, लेकिन नक्शा आखिरकार बीडीए के वीसी को दो लाख रुपये देने के बाद ही पास हुआ। बोले- कहो तो उस वीसी का नाम भी खोल दूं। वही वीसी अब शासन में बड़े अफसर हैं। बीडीए का जब इतना बुरा हाल है तो लोग अवैध कॉलोनी बसाएंगे ही। विधायक ने जब खुलेआम रिश्वतखोरी के आरोप लगाए तो सिटी मजिस्ट्रेट भी भड़क गए। विधायक बोले- साहब! अगर अफसर पैसे लेते हैं तो नेता कौन से कम हैं। वह भी तो पैसे लेते हैं। इसी बीच इंस्पेक्टर इज्जतनगर उपेंद्र सिंह से भीड़ में से किसी ने पूछ लिया- आपको तो अवैध कालोनी का पैसा नहीं मिलता। फिर आप क्यों कालोनियां गिराने में आगे रहते हैं। इस पर इंस्पेक्टर धीरे से बुदबुदाए- हमें कौन पैसा दे रहा है। कॉलोनी का पैसा तो लोग बीडीए वालों को ही देते होंगे।
बीडीए वीसी से बंद कमरे में बात
विधायक पप्पू भरतौल जेसीबी वापस जाने के बाद अपराह्न 2.30 बजे बीडीए उपाध्यक्ष डा. सुरेंद्र कुमार से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। वहां दोनों की बंद कमरे में बात हुई। बाहर निकलकर विधायक ने बताया कि उन्होंने बीडीए उपाध्यक्ष से कह दिया है कि अवैध कालोनी में तोड़फोड़ करने के बजाय जुर्माना लेकर कंपाउंडिंग करा दें क्योंकि अब वहां परिवार रहने लगे हैं। लोगों के बच्चे बेघर हो जाएंगे। विधायक के जाते ही घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया।
विधायक ने कहा है कि वह पैसा जमाकर कंपाउंडिंग कराने को तैयार हैं। अगर वह कालोनी कंपाउंडेबिल है तो बीडीए को उसकी कंपाउंडिंग कराने में कोई एतराज नहीं है। हमने शासन को लिखकर भेजा है कि अवैध कालोनियों को संज्ञेय अपराध घोषित करें। डा. सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष बीडीए
अवैध कालोनी ध्वस्त करने के लिए पूरी तैयारी होनी चाहिए। मौके पर ध्वस्तीकरण आदेश नहीं था। इसलिए जेसीबी वापस भेजनी पड़ीं। जो कालोनियां कंपाउंड हो सकती हैं, बीडीए को उनकी कंपाउंडिंग कर देनी चाहिए। अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट
कालोनी में रहने वाले लोगों के घर उजाड़ना ठीक नहीं है। बीडीए जुर्माना लेकर इन्हें कंपाउंड कर दे। पहले तो एई-जेई पैसा लेकर कालोनियां बनने देते हैं, बनने के बाद अपने अफसरों को गलत जानकारी देकर ध्वस्त करने जाते हैं। यह ठीक नहीं है। राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल, विधायक बिथरी
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सौ फुटा रोड पर बनी अवैध कॉलोनियों गिराने के लिए बीडीए ने प्रशासन से सिटी मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस फोर्स उपलब्ध कराने की मांग की थी। तय कार्यक्रम के अनुसार बृहस्पतिवार को बीडीए सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और एक्सईएन जहीरुद्दीन की अगुवाई में सुबह 10.30 बजे बीडीए की 12 सदस्यीय टीम थाना इज्जतनगर पहुंच गई। एक-डेढ़ घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला भी पहुंच गए। कॉलोनी गिराने के लिए इसके बाद भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ चार जेसीबी लेकर अफसरों की टीम सौ फुटा रोड पर राधा एन्क्लेव पहुंची। कॉलोनी में पहुंचकर बीडीए की जेसीबी ने जैसे ही एक मकान पर पंजा चलाना शुरू किया कि भाजपा विधायक पप्पू भरतौल भी दर्जनों समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए। विधायक ने पहले तो जेसीबी रुकवाई और फिर सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव से कहा कि जो तोड़फोड़ होनी थी, हो चुकी। अब और कुछ करने की जरूरत नहीं है। तोड़फोड़ के बजाय कालोनाइजरों से जुर्माना लेकर कंपाउंडिंग कर दो। अफसरों ने इंकार किया तो नोकझोंक शुरू हो गई।
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विधायक से नोकझोंक के दौरान उनके समर्थक भी अफसरों पर उग्र होने लगे। साथ गया फोर्स इस दौरान शांत खड़ा रहा। लोग अपने मकानों की छतों, दीवारों और गेट पर जमा होने लगे। विधायक की बीडीए सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला से काफी देर नोकझोंक हुई। आखिरकार अफसर इस बात पर विधायक को रजामंद करने की कोशिश करने लगे कि दो-चार मकान गिर जाने दो, बाकी पर मामला कंपाउंड करा देंगे। मगर विधायक नहीं मानें। उन्होंने कहा कि वह बीडीए वीसी से खुद उनके ऑफिस जाकर बात कर लेंगे। जेसीबी फौरन वापस करो। आखिरकार बीडीए की जेसीबी वापस हो गई।
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थाने में टीम पहुंचते ही फोन पर बजने लगीं घंटियां
थाने में टीम पहुंची तो अफसरों के फोन घनघनाने लगे। कभी उनके पास विधायक तो कभी उच्चाधिकारियों के फोन आ रहा था। विधायक कालोनी को ध्वस्त न करने का दबाव बना रहे थे, जबकि उच्चाधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव से अपना काम जारी रखने के निर्देश दे रहे थे। थाने के अंदर यह हाई वोल्टेज ड्रामा एक बजे तक चलता रहा। अंत में तय हो गया कि बीडीए की टीम सिटी मजिस्ट्रेट और फोर्स ले जाकर हर हाल में अवैध कालोनी ध्वस्त करेगी। देखते ही देखते बीडीए की चार जेसीबी भारी भरकम लाव लश्कर के साथ सौ फुटा रोड पर पहुंच गईं।
भरतौल बोले- अफसर लेते हैं पैसा, सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा- नेता कहां पीछे
इंस्पेक्टर इज्जतनगर बुदबुदाए- अवैध कॉलोनी का पैसा हमें कहां, बीडीए वाले ही लेते होंगे
अवैध कॉलोनी गिराने पहुंचे अफसरों से विधायक पप्पू भरतौल की नोकझोंक इस कदर बढ़ी कि भरतौल ने सिटी मजिस्ट्रेट और बीडीए सचिव के मुंह पर ही कह दिया कि अवैध कॉलोनी ऐसे ही नहीं बनतीं। अफसर ही उन्हें बसाने का पैसा लेते हैं। उन्होंने कहा कि विधायक बनने से पहले वह जब खुद कॉलोनाइजिंग करते थे, तब 2005-06 में एक कॉलोनी का नक्शा पास कराने के लिए बीडीए के चक्कर लगाते-लगाते उनकी चप्पलें घिस गईं थीं, लेकिन नक्शा आखिरकार बीडीए के वीसी को दो लाख रुपये देने के बाद ही पास हुआ। बोले- कहो तो उस वीसी का नाम भी खोल दूं। वही वीसी अब शासन में बड़े अफसर हैं। बीडीए का जब इतना बुरा हाल है तो लोग अवैध कॉलोनी बसाएंगे ही। विधायक ने जब खुलेआम रिश्वतखोरी के आरोप लगाए तो सिटी मजिस्ट्रेट भी भड़क गए। विधायक बोले- साहब! अगर अफसर पैसे लेते हैं तो नेता कौन से कम हैं। वह भी तो पैसे लेते हैं। इसी बीच इंस्पेक्टर इज्जतनगर उपेंद्र सिंह से भीड़ में से किसी ने पूछ लिया- आपको तो अवैध कालोनी का पैसा नहीं मिलता। फिर आप क्यों कालोनियां गिराने में आगे रहते हैं। इस पर इंस्पेक्टर धीरे से बुदबुदाए- हमें कौन पैसा दे रहा है। कॉलोनी का पैसा तो लोग बीडीए वालों को ही देते होंगे।
बीडीए वीसी से बंद कमरे में बात
विधायक पप्पू भरतौल जेसीबी वापस जाने के बाद अपराह्न 2.30 बजे बीडीए उपाध्यक्ष डा. सुरेंद्र कुमार से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। वहां दोनों की बंद कमरे में बात हुई। बाहर निकलकर विधायक ने बताया कि उन्होंने बीडीए उपाध्यक्ष से कह दिया है कि अवैध कालोनी में तोड़फोड़ करने के बजाय जुर्माना लेकर कंपाउंडिंग करा दें क्योंकि अब वहां परिवार रहने लगे हैं। लोगों के बच्चे बेघर हो जाएंगे। विधायक के जाते ही घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया।
विधायक ने कहा है कि वह पैसा जमाकर कंपाउंडिंग कराने को तैयार हैं। अगर वह कालोनी कंपाउंडेबिल है तो बीडीए को उसकी कंपाउंडिंग कराने में कोई एतराज नहीं है। हमने शासन को लिखकर भेजा है कि अवैध कालोनियों को संज्ञेय अपराध घोषित करें। डा. सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष बीडीए
अवैध कालोनी ध्वस्त करने के लिए पूरी तैयारी होनी चाहिए। मौके पर ध्वस्तीकरण आदेश नहीं था। इसलिए जेसीबी वापस भेजनी पड़ीं। जो कालोनियां कंपाउंड हो सकती हैं, बीडीए को उनकी कंपाउंडिंग कर देनी चाहिए। अशोक कुमार शुक्ला, सिटी मजिस्ट्रेट
कालोनी में रहने वाले लोगों के घर उजाड़ना ठीक नहीं है। बीडीए जुर्माना लेकर इन्हें कंपाउंड कर दे। पहले तो एई-जेई पैसा लेकर कालोनियां बनने देते हैं, बनने के बाद अपने अफसरों को गलत जानकारी देकर ध्वस्त करने जाते हैं। यह ठीक नहीं है। राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल, विधायक बिथरी