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ध्रुवीकरण की वजह से दूर हुए छोटे राजनीतिक दल
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बरेली। 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार से छोटे राजनीतिक दलों के गायब रहने के मुद्दे को उठाने पर कुछ राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आई। दलों के अध्यक्षों ने अमर उजाला को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाने के लिए आभार जताया और फिर अपनी बात स्पष्ट करते हुए लिखा कि मतदाताओं के लगातार होने वाले ध्रुवीकरण की वजह से वह चुनावी मैदान से दूर हुए हैं।
जनता की आवाज दल के मुखिया चौधरी जगपाल सिंह यादव ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से दूर होने की वजह यह है कि अब चुनाव केवल हिंदू मुस्लिम बनकर रह गया है। विकास के मुद्दे पीछे चले गए हैं। इसलिए वह चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेना चाहते। जनता की आवाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएस खान का कहना है कि बरेली के चुनावों की हवा हिंदू मुसलमानों के बीच सद्भावना बिगाड़ रही है। वोटों का धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण होने से वह उदासीन हैं। जनता को अपना वोट प्रत्याशी देखकर देना चाहिए, न कि पार्टी देखकर। मगर, जनता अब केवल पार्टी देखकर वोट देने का मन बनाए है। ऐसे में छोटे दलों का दूरी बनाना ही उचित है। पूर्व लोकसभा प्रत्याशी कमल किशोर इंजीनियर का कहना है कि अब निर्दलीय प्रत्याशी भी नहीं लड़ना चाहते क्योंकि चुनाव विकास के मुद्दे पर न होकर सांप्रदायिक आधार पर हो गए हैं।
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जनता की आवाज दल के मुखिया चौधरी जगपाल सिंह यादव ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से दूर होने की वजह यह है कि अब चुनाव केवल हिंदू मुस्लिम बनकर रह गया है। विकास के मुद्दे पीछे चले गए हैं। इसलिए वह चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेना चाहते। जनता की आवाज दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएस खान का कहना है कि बरेली के चुनावों की हवा हिंदू मुसलमानों के बीच सद्भावना बिगाड़ रही है। वोटों का धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण होने से वह उदासीन हैं। जनता को अपना वोट प्रत्याशी देखकर देना चाहिए, न कि पार्टी देखकर। मगर, जनता अब केवल पार्टी देखकर वोट देने का मन बनाए है। ऐसे में छोटे दलों का दूरी बनाना ही उचित है। पूर्व लोकसभा प्रत्याशी कमल किशोर इंजीनियर का कहना है कि अब निर्दलीय प्रत्याशी भी नहीं लड़ना चाहते क्योंकि चुनाव विकास के मुद्दे पर न होकर सांप्रदायिक आधार पर हो गए हैं।
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