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UP: पांचाल संग्रहालय में रखा है 3100 वर्ष पुराना नरकंकाल, यहां हजारों वर्ष पुराने अवशेष हैं संरक्षित

Sat, 18 May 2024 03:03 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 18 May 2024 03:03 PM IST
सार

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के इस पांचाल संग्रहालय को वर्ष 2004 में स्थापित किया गया। इसमें दो से तीन हजार साल पुरानी मूर्तियां, कंकाल, मुद्रा, धातु के बर्तन, शस्त्र, कपड़े संरक्षित हैं। 

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3100 years old skeleton kept in Panchal Museum of Ruhilkhand University Bareilly
पांचाल संग्रहालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय का पांचाल संग्रहालय पूरी तरह से डिजिटल और कई विशेष धरोहरों वाला है। इसके प्रवेश द्वार पर गुप्तकाल का मृदभांड (अन्न भंडारण घट) रखा हुआ है, जोकि आगंतुकों को आकर्षित करता है। वर्ष 2004 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से लाइसेंस मिलने के बाद उत्खनन में मिला 3100 साल पुराना नरकंकाल भी यहां मौजूद है। विद्यार्थियों के लिए यहां खास जानकारीपरक सामग्री उपलब्ध है। 

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विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के इस पांचाल संग्रहालय को वर्ष 2004 में स्थापित किया गया था। इसमें दो से तीन हजार साल पुरानी मूर्तियां, कंकाल, मुद्रा, धातु के बर्तन, शस्त्र, कपड़े संरक्षित हैं। 
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डॉ. हेमंत शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालय को एएसआई ने 2004-05 में पहली बार निष्पादन का लाइसेंस दिया था। इस पर 40 किलोमीटर दूर पीलीभीत के बीसलपुर स्थित अभयपुर गांव में उत्खनन किया गया। यहां 3100 साल पुराना नरकंकाल मिला। साथ ही डेढ़ साल के बच्चे की कब्र मिली थी, जिसे संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। 

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ये चीजें भी मिली थीं 
साथ ही चित्रित उत्खनन में धुसर मृदभांड सभ्यता की एक उपकरण कार्यशाला मिली थी। इसके अलावा जीव-जंतु और वनस्पति के अवशेष, तांबे-लोहे की वस्तुएं, पत्थर, कांच, तांबे, टेराकोटा और हड्डी से निर्मित आभूषण और मिट्टी के पात्र मिले थे। ये तत्कालीन अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को दर्शाते हैं। यहां से मिलीं वस्तुओं के लिए संग्रहालय में अभयपुर उत्खनन वीथिका बनी है, जहां आगंतुक इतिहास से रूबरू हो सकते हैं। 

2022 में हुआ डिजिटलीकरण 
कुलपति प्रो. केपी सिंह के कार्यकाल में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय का डिजिटलीकरण किया गया। 15 मई 2022 को राज्यपाल ने इसका डिजिटल संग्रहालय के रूप में उद्घाटन किया। इसमें रुहेलखंड के नौ जिलों की ऐतिहासिक इमारतों के सभी फोटो को संरक्षित किया गया है। यहां लगे स्क्रीन पर एक क्लिक में संबंधित वस्तु का इतिहास देखा जा सकता है। साथ ही संग्रहालय का नक्शा भी देखा जा सकता है। 

प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. श्याम बिहारी लाल ने बताया कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय का संग्रहालय शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दे रहा है।  शिक्षकों के प्रयास से यह स्थापित हो सका। यहां आए दिन विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी आते हैं और इतिहास से रूबरू होते हैं।

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