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Bareilly News: नवाबगंज में आईडी हैक कर बनाए 271 फर्जी प्रमाण निरस्त
Thu, 04 Apr 2024 02:05 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 04 Apr 2024 02:05 AM IST
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बरेली। नवाबगंज के लेखपाल की आईडी हैक कर बीते माह फर्जी तरीके से जारी 271 आय प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही, नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के पोर्टल से भी ये दस्तावेज हटा दिए गए हैं पर आरोपी जनसेवा केंद्र संचालक के खिलाफ अभी तक रिपोर्ट नहीं हुई है।
बीते माह नवाबगंज के ग्राम करुआ सहाबगंज के इम्तियाज अहमद का आय प्रमाणपत्र लेखपाल तौसीफ के पास सत्यापन के लिए पहुंचा तो प्रकरण का खुलासा हुआ। पता चला कि तौसीफ की लॉगिन से गरीबी की रेखा के नीचे का आय प्रमाणपत्र बना है, जबकि करुआ साहबगंज तौसीफ के सर्किल में नहीं आता। तौसीफ ने 90 दिन में लॉगिन से जारी प्रमाणपत्रों की जांच की तो पता चला कि 150 से ज्यादा फर्जी आय प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।
इसी तरह लेखपाल वीरेंद्र प्रताप सिंह की आईडी हैक कर भी करीब सौ फर्जी आय प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। लेखपालों ने सौंपे गए पत्र में कहा था कि जितने भी आय प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, सभी गरीबी रेखा से नीचे के हैं और फर्जी तरीके से उनका सत्यापन किया गया है।
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जनसेवा केंद्र संचालक लगा रहा था रिपोर्ट
लेखपाल ने तहसीलदार को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि सभी आय प्रमाणपत्रों का सत्यापन तहसील कार्यालय के पास संचालित जनसेवा केंद्र के संचालक वीरेंद्र पाल उर्फ नत्थू लाल ने किया है। जिस दिन आवेदन होता था, वह उसी दिन रात में 12 बजे के बाद रिपोर्ट लगा देता था। तहसीलदार ने प्रकरण में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए नवाबगंज थाने में तहरीर दी थी पर अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
संचालक को पता था आईडी-पासवर्ड
जनसेवा केंद्र संचालक को लेखपालों का लॉगिन आईडी और पासवर्ड पता था। इससे साफ जाहिर है कि लेखपालों ने स्वयं या अन्य किसी तहसील के कर्मचारी ने इसे साझा किया होगा। एनआईसी से अधिकारियों और कर्मचारियों को लॉगिन-पासवर्ड 15 दिन या माहभर में बदलने के लिए कहा जाता है। यहां लापरवाही बरती गई।
यह होती है प्रक्रिया
आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जनसेवा केंद्र से किया गया आवेदन सीधे तहसीलदार के लॉगिन में पहुंचता है। वह सत्यापन के लिए लेखपाल को अग्रसारित करते हैं। लेखपाल संबंधित आवेदक के दावों का सत्यापन करता है, फिर ऑनलाइन ही रिपोर्ट लगती है। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
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तहसीलदार से प्राप्त पत्र के साथ संलग्न आय प्रमाणपत्रों की सूची एनआईसी लखनऊ भेज दिया था। अब उन्हें पोर्टल से हटा दिया गया है। सभी से अपील है कि वे समय-समय पर लॉगिन आईडी-पासवर्ड जरूर बदलते रहें। - मनोज शर्मा, सीनियर डायरेक्टर आईटी, एनआईसी
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तहसीलदार की तहरीर पर जनसेवा केंद्र संचालक के खिलाफ मुकदमा अभी दर्ज नहीं हुआ है। मैंने सारी रिपोर्ट बनाकर कप्तान को भेज दी है, क्योंकि धारा 420 के तहत मुकदमा उन्हीं के आदेश पर दर्ज होता है। - राजकुमार शर्मा, इंस्पेक्टर, नवाबगंज
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बीते माह नवाबगंज के ग्राम करुआ सहाबगंज के इम्तियाज अहमद का आय प्रमाणपत्र लेखपाल तौसीफ के पास सत्यापन के लिए पहुंचा तो प्रकरण का खुलासा हुआ। पता चला कि तौसीफ की लॉगिन से गरीबी की रेखा के नीचे का आय प्रमाणपत्र बना है, जबकि करुआ साहबगंज तौसीफ के सर्किल में नहीं आता। तौसीफ ने 90 दिन में लॉगिन से जारी प्रमाणपत्रों की जांच की तो पता चला कि 150 से ज्यादा फर्जी आय प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।
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इसी तरह लेखपाल वीरेंद्र प्रताप सिंह की आईडी हैक कर भी करीब सौ फर्जी आय प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। लेखपालों ने सौंपे गए पत्र में कहा था कि जितने भी आय प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, सभी गरीबी रेखा से नीचे के हैं और फर्जी तरीके से उनका सत्यापन किया गया है।
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जनसेवा केंद्र संचालक लगा रहा था रिपोर्ट
लेखपाल ने तहसीलदार को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि सभी आय प्रमाणपत्रों का सत्यापन तहसील कार्यालय के पास संचालित जनसेवा केंद्र के संचालक वीरेंद्र पाल उर्फ नत्थू लाल ने किया है। जिस दिन आवेदन होता था, वह उसी दिन रात में 12 बजे के बाद रिपोर्ट लगा देता था। तहसीलदार ने प्रकरण में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए नवाबगंज थाने में तहरीर दी थी पर अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
संचालक को पता था आईडी-पासवर्ड
जनसेवा केंद्र संचालक को लेखपालों का लॉगिन आईडी और पासवर्ड पता था। इससे साफ जाहिर है कि लेखपालों ने स्वयं या अन्य किसी तहसील के कर्मचारी ने इसे साझा किया होगा। एनआईसी से अधिकारियों और कर्मचारियों को लॉगिन-पासवर्ड 15 दिन या माहभर में बदलने के लिए कहा जाता है। यहां लापरवाही बरती गई।
यह होती है प्रक्रिया
आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जनसेवा केंद्र से किया गया आवेदन सीधे तहसीलदार के लॉगिन में पहुंचता है। वह सत्यापन के लिए लेखपाल को अग्रसारित करते हैं। लेखपाल संबंधित आवेदक के दावों का सत्यापन करता है, फिर ऑनलाइन ही रिपोर्ट लगती है। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
तहसीलदार से प्राप्त पत्र के साथ संलग्न आय प्रमाणपत्रों की सूची एनआईसी लखनऊ भेज दिया था। अब उन्हें पोर्टल से हटा दिया गया है। सभी से अपील है कि वे समय-समय पर लॉगिन आईडी-पासवर्ड जरूर बदलते रहें। - मनोज शर्मा, सीनियर डायरेक्टर आईटी, एनआईसी
तहसीलदार की तहरीर पर जनसेवा केंद्र संचालक के खिलाफ मुकदमा अभी दर्ज नहीं हुआ है। मैंने सारी रिपोर्ट बनाकर कप्तान को भेज दी है, क्योंकि धारा 420 के तहत मुकदमा उन्हीं के आदेश पर दर्ज होता है। - राजकुमार शर्मा, इंस्पेक्टर, नवाबगंज