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हाईकमान तक पहुंचा सपा नेता का वायरल ऑडियो
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बरेली। सपा के एक दिग्गज नेता का अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को वोट न देने के लिए कार्यकर्ता से बातचीत करने का ऑडियो वायरल होने का मामला हाईकमान तक पहुंच गया। हाईकमान ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। 23 मई की मतगणना के बाद लखनऊ से ऑडियो की जांच कराने के संकेत मिले हैं। फोन पर साइकिल चुनाव निशान को वोट न देने की बात कहने वाले नेताजी कार्रवाई के घेरे में भी आ सकते हैं।
सपा के एक नेता का भोजीपुरा के कार्यकर्ता से फोन पर बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था। उसमें नेताजी ने अपने कार्यकर्ता से किसी भी हाल में साइकिल को उस बूथ से न जीतने देने की बात कही थी। जब कार्यकर्ता ने कहा कि प्रधान जी मान नहीं रहे हैं तो नेताजी ने कार्यकर्ता से कहा कि वह उनके घर जाकर समझाए कि वह साइकिल-साइकिल क्यों कर रहे हैँ? इतना ही नहीं, नेताजी ने अपनी बिरादरी के वोट दूसरे दल को ट्रांसफर करने की बात भी फोन पर कही थी। ऑडियो वायरल होने के बाद यह सपा के स्थानीय नेताओं के बीच में पहुंच गया। अब यह ऑडियो एक दूसरे के मोबाइल से होकर घूम रहा है। सपा नेता ऑडियो सुनकर आपस में नेताजी की निष्ठा के बारे में चर्चा कर रहे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो हाईकमान के नेताओं ने ऑडियो के बारे में उन नेताजी से ही बात करने की सलाह दी, जिनकी उस ऑडियो में बातचीत है। जब स्थानीय सपा नेताओं ने फोन पर नेताजी से बात की तो वह पहले तो अपना ऑडियो होने से ही साफ मुकर गए। फिर सफाई दी कि जो ऑडियो वायरल हुआ है, वह इस बार के लोकसभा चुनावों का न होकर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों का है। तब वर्तमान सपा प्रत्याशी अपनी इसी पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़े थे और जिन नेताजी का ऑडियो है, वह दूसरे राजनीतिक दल से लोकसभा का चुनाव लड़े थे। नेताजी वह ऑडियो तबका बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। हालांकि उनकी इस बात को हाईकमान कितना मानता है, यह तो 23 मई की मतगणना के बाद हाईकमान के रुख से ही स्पष्ट होगा।
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सपा के एक नेता का भोजीपुरा के कार्यकर्ता से फोन पर बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था। उसमें नेताजी ने अपने कार्यकर्ता से किसी भी हाल में साइकिल को उस बूथ से न जीतने देने की बात कही थी। जब कार्यकर्ता ने कहा कि प्रधान जी मान नहीं रहे हैं तो नेताजी ने कार्यकर्ता से कहा कि वह उनके घर जाकर समझाए कि वह साइकिल-साइकिल क्यों कर रहे हैँ? इतना ही नहीं, नेताजी ने अपनी बिरादरी के वोट दूसरे दल को ट्रांसफर करने की बात भी फोन पर कही थी। ऑडियो वायरल होने के बाद यह सपा के स्थानीय नेताओं के बीच में पहुंच गया। अब यह ऑडियो एक दूसरे के मोबाइल से होकर घूम रहा है। सपा नेता ऑडियो सुनकर आपस में नेताजी की निष्ठा के बारे में चर्चा कर रहे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो हाईकमान के नेताओं ने ऑडियो के बारे में उन नेताजी से ही बात करने की सलाह दी, जिनकी उस ऑडियो में बातचीत है। जब स्थानीय सपा नेताओं ने फोन पर नेताजी से बात की तो वह पहले तो अपना ऑडियो होने से ही साफ मुकर गए। फिर सफाई दी कि जो ऑडियो वायरल हुआ है, वह इस बार के लोकसभा चुनावों का न होकर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों का है। तब वर्तमान सपा प्रत्याशी अपनी इसी पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़े थे और जिन नेताजी का ऑडियो है, वह दूसरे राजनीतिक दल से लोकसभा का चुनाव लड़े थे। नेताजी वह ऑडियो तबका बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। हालांकि उनकी इस बात को हाईकमान कितना मानता है, यह तो 23 मई की मतगणना के बाद हाईकमान के रुख से ही स्पष्ट होगा।
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