{"_id":"5ca272e6bdec222dcc577ae1","slug":"21554150118-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैक की ओके रिपोर्ट आई नहीं, नहीं दौड़ सकीं ट्रेनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैक की ओके रिपोर्ट आई नहीं, नहीं दौड़ सकीं ट्रेनें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। रेलवे ने 120 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रेनें चलाने के लिए पूरे साल खराब स्लीपरों को बदला। कार्य के अंतिम चरण में 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाने की तारीख भी एक अप्रैल तय कर दी गई। उत्सुक यात्री आज जब स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि ट्रेनें अपनी पुरानी रफ्तार से ही चल रही हैं। कारण, अभी ट्रेनें दौड़ाने के लिए इंजीनियरिंग अनुभाग की ओके रिपोर्ट आना बाकी है।
रेलवे फरवरी 2018 से दिल्ली लखनऊ रूट पर 120 किलोमीटर की स्पीड से ट्रेनें चलाने की कवायद कर रहा है। लखनऊ से दिल्ली तक अलग-अलग सेक्शन में घंटों ट्रेनें रोककर पटरियां और स्लीपर बदले गए। जहां पटरी कमजोर थी, वहां 52 की जगह साठ किलो की पटरी बिछाई गई। इसके अलावा स्लीपर बदलने, पटरियों की नॉन इंटरलॉकिंग भी की गई। इसमें गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई और लखनऊ के इंजीनियरिंग टीम के अधिकारियों को 30 मार्च तक ट्रैक फिट करके देना था, ताकी एक अप्रैल से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेनें चलाई जा सकें, लेकिन ऐन मौके पर सभी तैयारियां धरी रह गईं। यात्रियों को उम्मीद थी कि बरेली दिल्ली या लखनऊ जाने में कम समय लगेगा, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। इंजीनियरिंग अनुभाग के ट्रैक की ओके रिपोर्ट न देने पर एक अप्रैल से स्पीड से ट्रेनें नहीं चल सकीं। सोमवार को इस रूट पर 70 किलोमीटर की स्पीड से ट्रेनें चलाई गईं। गौरतलब है कि लखनऊ-दिल्ली रूट पर रोजाना करीब सौ ट्रेनों का आवागमन होता है। मुरादाबाद डिवीजन के एडीआरएम ने बताया कि ओके रिपोर्ट मिलते ही ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जाएगी।
विज्ञापन
रेलवे फरवरी 2018 से दिल्ली लखनऊ रूट पर 120 किलोमीटर की स्पीड से ट्रेनें चलाने की कवायद कर रहा है। लखनऊ से दिल्ली तक अलग-अलग सेक्शन में घंटों ट्रेनें रोककर पटरियां और स्लीपर बदले गए। जहां पटरी कमजोर थी, वहां 52 की जगह साठ किलो की पटरी बिछाई गई। इसके अलावा स्लीपर बदलने, पटरियों की नॉन इंटरलॉकिंग भी की गई। इसमें गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई और लखनऊ के इंजीनियरिंग टीम के अधिकारियों को 30 मार्च तक ट्रैक फिट करके देना था, ताकी एक अप्रैल से 120 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेनें चलाई जा सकें, लेकिन ऐन मौके पर सभी तैयारियां धरी रह गईं। यात्रियों को उम्मीद थी कि बरेली दिल्ली या लखनऊ जाने में कम समय लगेगा, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। इंजीनियरिंग अनुभाग के ट्रैक की ओके रिपोर्ट न देने पर एक अप्रैल से स्पीड से ट्रेनें नहीं चल सकीं। सोमवार को इस रूट पर 70 किलोमीटर की स्पीड से ट्रेनें चलाई गईं। गौरतलब है कि लखनऊ-दिल्ली रूट पर रोजाना करीब सौ ट्रेनों का आवागमन होता है। मुरादाबाद डिवीजन के एडीआरएम ने बताया कि ओके रिपोर्ट मिलते ही ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जाएगी।
विज्ञापन