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शाहाबाद की पहचान टूटी सड़कें और गंदगी के ढेर
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बरेली। घनी आबादी वाला शाहाबाद वार्ड की पहचान ही गंदगी, कूड़े के ढेर और टूटी जर्जर गलियों से है। इलाके की 80 फीसदी से ज्यादा गलियां कच्ची या टूटकर जर्जर हो चुकी हैं। सबसे बदतर हालत तो आर्य समाज रोड की है, जो बदहाल पड़ी है। डलावघर में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। उनमें सफाई कर्मचारी डर के मारे अंदर नहीं घुसते। चाहरदीवार भी जर्जर हालत में है। छह महीने से पानी भरा है।
डलावघर के रिपेयरिंग की मांग एक साल से हो रही है, लेकिन नगर निगम ने रिपेयरिंग नहीं कराई। इस डलावघर में जब सफाई कर्मचारी घुसते हैं तो उनके पैर में शीशा चुभ जाता है। 25 सफाई कर्मचारी वार्ड को दिए गए हैं, लेकिन उनमें एक ड्राइवर बन गया। 24 सफाई कर्मियों में कई रोजाना ड्यूटी नहीं करते। इसलिए पूरा इलाका गंदगी और कूड़े के ढेर की बदबू से बदहाल है। दीवानखान से शराफत मियां की मजार तक रोड जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। कोहाड़ापीर पुलिस चौकी से कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप तक लगभग 200 मीटर नाला बनना बहुत जरूरी है क्योंकि पुराना नाला जगह-जगह से टूट चुका है। नाले का एस्टीमेट नगर निगम में तैयार भी कराया गया, लेकिन टेंडर होने से पहले आचार संहिता लग गई। नाला निर्माण का काम लटक गया। अगर बरसात से पहले नाला नहीं बना तो पूरे वार्ड की गलियों में जलभराव होना तय है। 60 फीसदी इलाके में सीवर नहीं है। नाले गंदगी से पटे पड़े हैं।
क्या कहते हैं बाशिंदे
नाले नालियों में गंदगी पटी पड़ी है। सीवर की गंदगी भी नालों में बह रही है। डलावघर से कूड़ा कई महीनों तक नहीं उठता। उससे उठने वाली दुर्गंध से पूरे इलाके में संक्रामक बीमारियां फैल सकती है। गर्मी शुरू होते ही बच्चे बीमार होने लगते हैं। प्राइवेट क्लीनिकों पर लाइन लगती है। अरुण वर्मा
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आर्य समाज रोड तो चलने लायक नहीं है। बाइक 10 की स्पीड से भी नहीं चल सकती। गलियों में गहरे गड्ढे हो चुके हैं। डलावघर को रिपेयरिंग की सख्त जरूरत है। सड़क, नाली, सीवर और गंदगी पर बहुत काम की जरूरत है। सोनू
पांच सड़कें, एक नाला और चार सीवर लाइन बिछाने के प्रस्ताव नगर निगम में दे चुके हैं। सही बात तो यह है कि नगर निगम में दो साल से कोई काम ही नहीं हो रहा है। हम कई बार लिखकर दे चुके हैं। मलिन बस्ती समेत पूरे वार्ड की हालत बद से बदतर है। अब्दुल कयूम मुन्ना, पार्षद शाहाबाद
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डलावघर के रिपेयरिंग की मांग एक साल से हो रही है, लेकिन नगर निगम ने रिपेयरिंग नहीं कराई। इस डलावघर में जब सफाई कर्मचारी घुसते हैं तो उनके पैर में शीशा चुभ जाता है। 25 सफाई कर्मचारी वार्ड को दिए गए हैं, लेकिन उनमें एक ड्राइवर बन गया। 24 सफाई कर्मियों में कई रोजाना ड्यूटी नहीं करते। इसलिए पूरा इलाका गंदगी और कूड़े के ढेर की बदबू से बदहाल है। दीवानखान से शराफत मियां की मजार तक रोड जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। कोहाड़ापीर पुलिस चौकी से कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप तक लगभग 200 मीटर नाला बनना बहुत जरूरी है क्योंकि पुराना नाला जगह-जगह से टूट चुका है। नाले का एस्टीमेट नगर निगम में तैयार भी कराया गया, लेकिन टेंडर होने से पहले आचार संहिता लग गई। नाला निर्माण का काम लटक गया। अगर बरसात से पहले नाला नहीं बना तो पूरे वार्ड की गलियों में जलभराव होना तय है। 60 फीसदी इलाके में सीवर नहीं है। नाले गंदगी से पटे पड़े हैं।
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क्या कहते हैं बाशिंदे
नाले नालियों में गंदगी पटी पड़ी है। सीवर की गंदगी भी नालों में बह रही है। डलावघर से कूड़ा कई महीनों तक नहीं उठता। उससे उठने वाली दुर्गंध से पूरे इलाके में संक्रामक बीमारियां फैल सकती है। गर्मी शुरू होते ही बच्चे बीमार होने लगते हैं। प्राइवेट क्लीनिकों पर लाइन लगती है। अरुण वर्मा
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आर्य समाज रोड तो चलने लायक नहीं है। बाइक 10 की स्पीड से भी नहीं चल सकती। गलियों में गहरे गड्ढे हो चुके हैं। डलावघर को रिपेयरिंग की सख्त जरूरत है। सड़क, नाली, सीवर और गंदगी पर बहुत काम की जरूरत है। सोनू
पांच सड़कें, एक नाला और चार सीवर लाइन बिछाने के प्रस्ताव नगर निगम में दे चुके हैं। सही बात तो यह है कि नगर निगम में दो साल से कोई काम ही नहीं हो रहा है। हम कई बार लिखकर दे चुके हैं। मलिन बस्ती समेत पूरे वार्ड की हालत बद से बदतर है। अब्दुल कयूम मुन्ना, पार्षद शाहाबाद