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पुल बनाने में निकलने वाला लाखों का मिट्टी-रेता कहां लग रहा ठिकाने
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बरेली। सेतु निगम के पुल निर्माण में खुदान से निकलने वाली लाखों रुपये की मिट्टी और रेता को ठिकाने तो नहीं लगाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि ओवरब्रिज और फ्लाईओवर बनाने के लिए पिलर की नींव तैयार करने के लिए पाईलिंग मशीन से सैकड़ों व हजारों क्विंटल रेता-मिट्टी निकलती है, उसे सरकारी रिकार्ड में दिखाए बगैर ही पुल के निर्माण में खपाया जा रहा है। इसमें सेतु निगम के इंजीनियर और ठेकेदार दोनों ही मिलकर पहले मिट्टी खुदान का खर्च लेते हैं। बाद में उससे निकलने वाली मिट्टी को पुल के निर्माण में लगा दिया जाता है, जबकि पुल निर्माण में इसके लिए अलग से मिट्टी खरीद की मोटी रकम प्रस्ताव में शामिल की जाती है। ऐसी गड़बड़ी सामने आ रही है तो बचाव में प्रशासन के अधिकारी जांच कराने की बात कह रहे हैं।
ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के तमाम बड़े प्रोजेक्ट कई साल से चल रहे हैं। इसमें लालफाटक, आईवीआरआई पुल का निर्माण करीब तीन साल से चल रहा है, जबकि हाल में सेटेलाइट और चौपुला फ्लाईओवर के निर्माण कार्य भी सेतु निगम के अधिकारियों ने शुरू कराए हैं।
सूत्र बताते हैं कि पुल निर्माण के लिए पिलर का फाउंडेशन बनाने को 20 से 25 मीटर तक खुदाई पाईलिंग मशीन से कराई जाती है। इसमें प्रत्येक पिलर से सैकड़ों क्विंटल मिट्टी और उसके नीचे रेता निकलता है। बताते हैं कि पुल निर्माण से होने वाली खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को गुपचुप तरीके से या तो बेच दिया जाता है या फिर उसे पुल के स्लोप भरने में खपा दिया जाता है, जबकि नियम यह है कि खुदाई से निकलने वाली मिट्टी का निस्तारण प्रशासन से कराकर उससे राजस्व वसूलना चाहिए। इसके अलावा पुल का स्लोप या सर्विस लेन बनाने के लिए ठेकेदार को मिट्टी की खरीद करनी चाहिए, जबकि इंजीनियर और ठेकेदार दोनों ही मिलकर मिट्टी का खेल कर रहे हैं। इस प्रशासन की तरफ से भी कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
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मकान और भराव कराने वाले दे जाते हैं अच्छे दाम
पुल बनाने के लिए काफी गहरी खुदाई होती है। माना जाता है कि आठ से दस मीटर से ज्यादा गहराई में मिट्टी और रेता की क्वालिटी काफी अच्छी होती है। इसलिए भवनों का निर्माण कराने वाले इस मिट्टी और रेता के अच्छे दाम देने के लिए तैयार रहते हैं। सेतु निगम का स्टाफ और कांट्रेक्टर की सांठगांठ से इसे भी अंजाम दिया जा रहा है।
रामगंगा पुल के पास एप्रोच रोड बनाने के लिए शुरू हुआ पटान
बदायूं रोड पर पुल बनाने का काम अभी 50 फीसदी ही हो सका है। पीडब्ल्यूडी ने यहां एप्रोच रोड बनाने के लिए मिट्टी का भराव शुरू कर दिया है। ठेकेदार इस मिट्टी को कहां से ला रहा है, अधिकारियों ने इसकी भी जांच कराए जाने की बात कही है।
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। अभी खनन अधिकारी की नई पोस्टिंग होने वाली है। जल्द ही इस गंभीर मामले की जांच कराई जाएंगी।
- मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त
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ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के तमाम बड़े प्रोजेक्ट कई साल से चल रहे हैं। इसमें लालफाटक, आईवीआरआई पुल का निर्माण करीब तीन साल से चल रहा है, जबकि हाल में सेटेलाइट और चौपुला फ्लाईओवर के निर्माण कार्य भी सेतु निगम के अधिकारियों ने शुरू कराए हैं।
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सूत्र बताते हैं कि पुल निर्माण के लिए पिलर का फाउंडेशन बनाने को 20 से 25 मीटर तक खुदाई पाईलिंग मशीन से कराई जाती है। इसमें प्रत्येक पिलर से सैकड़ों क्विंटल मिट्टी और उसके नीचे रेता निकलता है। बताते हैं कि पुल निर्माण से होने वाली खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को गुपचुप तरीके से या तो बेच दिया जाता है या फिर उसे पुल के स्लोप भरने में खपा दिया जाता है, जबकि नियम यह है कि खुदाई से निकलने वाली मिट्टी का निस्तारण प्रशासन से कराकर उससे राजस्व वसूलना चाहिए। इसके अलावा पुल का स्लोप या सर्विस लेन बनाने के लिए ठेकेदार को मिट्टी की खरीद करनी चाहिए, जबकि इंजीनियर और ठेकेदार दोनों ही मिलकर मिट्टी का खेल कर रहे हैं। इस प्रशासन की तरफ से भी कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
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मकान और भराव कराने वाले दे जाते हैं अच्छे दाम
पुल बनाने के लिए काफी गहरी खुदाई होती है। माना जाता है कि आठ से दस मीटर से ज्यादा गहराई में मिट्टी और रेता की क्वालिटी काफी अच्छी होती है। इसलिए भवनों का निर्माण कराने वाले इस मिट्टी और रेता के अच्छे दाम देने के लिए तैयार रहते हैं। सेतु निगम का स्टाफ और कांट्रेक्टर की सांठगांठ से इसे भी अंजाम दिया जा रहा है।
रामगंगा पुल के पास एप्रोच रोड बनाने के लिए शुरू हुआ पटान
बदायूं रोड पर पुल बनाने का काम अभी 50 फीसदी ही हो सका है। पीडब्ल्यूडी ने यहां एप्रोच रोड बनाने के लिए मिट्टी का भराव शुरू कर दिया है। ठेकेदार इस मिट्टी को कहां से ला रहा है, अधिकारियों ने इसकी भी जांच कराए जाने की बात कही है।
मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। अभी खनन अधिकारी की नई पोस्टिंग होने वाली है। जल्द ही इस गंभीर मामले की जांच कराई जाएंगी।
- मनोज कुमार पांडेय, एडीएम वित्त