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कुल के साथ पूरा हुआ उर्स आले रसूल
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बरेली। दरगाह आले रसूल खानकाह वामिकिया में चार रोजा उर्स कुल की रस्म के साथ पूरा हो गया। इसमें शिरकत करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर अकीदत का इजहार किया।
खानकाह में उर्स की तकरीब सुबह तिलावते कुरान से हुई। इसके बाद नातो मनकबत का नजराना पेश किया गया। सैयद अनस वामिकी, हाफिज मुजाहिद वामिकी, कारी गुलाम यासीन, हाफिज बशीर अहमद और नैनीताल के रिजवान वामिकी ने हजरत वामिक मियां के लिखे कलाम पेश किए। इसके बाद उलमा की तकरीर हुई। इसमें प्रोफेसर डा. महमूद हुसैन वामिकी, ककराला के मुफ्ती फहीम सकलैनी, अल्लामा रिफाकत सकलैनी, बहेड़ी के हाफिज अनवार शेरी, कमाले निशात वामिकी, मुफ्ती सना उल्ला, सहसवान के अल्लामा मोहम्मद यूनुस बरकाती सहित विभिन्न शहरों से आए उलमा ने तकरीर की।
जलसे के बाद ठीक एक बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद सरपरस्ती करते हुए सज्जादानशीन सैयद मोहम्मद मियां वामिकी जिलानी ने खास दुआ की। सदारत नायब सज्जादा मौलाना सैयद असलम मियां वामिकी ने की। निजामत हाफिज अलाउद्दीन वामिकी की रही। आखिर में वामिकिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से लंगर किया गया। व्यवस्था में शानू अतहर वामिकी ने अकरम वामिकी, शालू, इफ्तेकार कुरैशी, अकरम कुरैशी, नदीम चिश्ती आदि का सहयोग रहा।
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खानकाह में उर्स की तकरीब सुबह तिलावते कुरान से हुई। इसके बाद नातो मनकबत का नजराना पेश किया गया। सैयद अनस वामिकी, हाफिज मुजाहिद वामिकी, कारी गुलाम यासीन, हाफिज बशीर अहमद और नैनीताल के रिजवान वामिकी ने हजरत वामिक मियां के लिखे कलाम पेश किए। इसके बाद उलमा की तकरीर हुई। इसमें प्रोफेसर डा. महमूद हुसैन वामिकी, ककराला के मुफ्ती फहीम सकलैनी, अल्लामा रिफाकत सकलैनी, बहेड़ी के हाफिज अनवार शेरी, कमाले निशात वामिकी, मुफ्ती सना उल्ला, सहसवान के अल्लामा मोहम्मद यूनुस बरकाती सहित विभिन्न शहरों से आए उलमा ने तकरीर की।
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जलसे के बाद ठीक एक बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद सरपरस्ती करते हुए सज्जादानशीन सैयद मोहम्मद मियां वामिकी जिलानी ने खास दुआ की। सदारत नायब सज्जादा मौलाना सैयद असलम मियां वामिकी ने की। निजामत हाफिज अलाउद्दीन वामिकी की रही। आखिर में वामिकिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से लंगर किया गया। व्यवस्था में शानू अतहर वामिकी ने अकरम वामिकी, शालू, इफ्तेकार कुरैशी, अकरम कुरैशी, नदीम चिश्ती आदि का सहयोग रहा।
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